तेल पर भारी, चीन-रूस की यारी: भारत ने बदला अपना रूट, अब कहां से खरीद रहा सबसे ज्यादा क्रूड? नया गणित समझिए
Russian Oil: रूस से भारत ने तेल की खरीद में गिरावट आई है. सितंबर के आंकड़े यही बता रहे हैं. चीन के साथ बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच भारत से तेल पर अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है.
Russia Oil Import: भारत ऊर्जा जरूरतों को आयात से पूरा करता है. जरूरत का 85 से 90 फीसदी तक कच्चे तेल का आयात करता है. खाड़ी युद्ध शुरू होने के बाद से भारत 40 से अधिक देशों से ऑयल इंपोर्ट कर रहा है, लेकिन रूस भारत का सबसे बड़ा पार्टनर बना रहा. अमेरिका ने रूसी तेल की खरीद पर भारत पर 25 फीसदी टैरिफ तक लगाया, लेकिन भारत ने फिर भी रूस से तेल की खरीद बंद नहीं की. खाड़ी युद्ध शुरू होने के बाद रूस से होने वाला तेल आयात बढ़ गया, लेकिन अब इस इंपोर्ट में गिरावट का ग्राफ दिख रहा है.
रूस से तेल की खरीद में गिरावट
भारत की सबसे बड़ी सरकारी तेल कंपनी भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) ने रूस से तेल की खरीद घटा दी है. नवंबर 2026 में रूसी तेल की खरीद में गिरावट आई है. दरअसल रूसी तेस पर मिलने वाला डिस्काउंट तो खत्म हुआ ही है, साथ ही साथ शिपिंग कॉस्ट बढ़ रहा है. जिसके चलते तेल कंपनियां रूसी तेल से दूरी बना रही है.
तेल पर भारत की स्ट्रेटजी
भारत कई बार ये कह चुका है कि कच्चे तेल को लेकर उसकी रणनीति तय है कि जहां से सस्ता तेल मिलेगा, भारत वहां से तेल खरीदेगा. बीपीसीएल के डायरेक्टर (फाइनेंस) वेत्सा रामकृष्ण गुप्ता ने कहा कि रूस से तेल खरीद में माल झुलाई की ऊंची लागत बड़ी चुनौती बनी हुई है. रूस से तेल पर मिलने वाला डिस्काउंट भी खत्म कर दिया है. ऐसे में कंपनी ने नवंबर में रूस से तेल की खेप में कमी कर दी है. BPCLने जुलाई-सितंबर 2026 में अपनी कुल खरीद में करीब 37% तेल मॉस्को से खरीदा था. अब वो इसमें कटौती कर रहा है.
तेल पर भारत की रणनीति में बड़ा बदलाव
भारत ने तेल पर अपनी रणनीति बदल दी है. अब भारत ने रूस से क्रूड की खरीद कम कर मिडिल ईस्ट से खरीद बढ़ा दी है,
- सितंबर 2026 में मिडिल ईस्ट से तेल आयात बढ़कर 28 लाख बैरल प्रतिदिन पर पहुंच चुका है, जो अगस्त 2026 के मुकाबले 32% ज्यादा है.
- रूस से आयात आयात में गिरावट आई है और अगस्त के मुकाबले ये 14 फीसदी गिरकर 18 लाख बैरल पर पहुंच गया है.
- भारत के कुल तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी अगस्त के 46.6% से घटकर सितंबर में 33.5% रह गई है.
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चीन की भूमिका भी समझना जरूरी
दरअसल चीन ने ईरानी तेल की उपलब्धता कम होने पर रूस से तेल की खरीद बढ़ा दी है. ऐसे में रूसी तेल की सप्लाई के लिए भारत और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ी है. ऐसे में डिस्काउंट कम हुआ है और भारत ने रूस से तेल की खरीद कम कर खाड़ी देशों से खेप बढ़ा दी है.
रूस से तेल खरीद में गिरावट की वजह क्या है?
कच्चे तेल की कीमत ऊंची बनी हुई है. ब्रेंट क्रूड 115 डॉलर प्रति बैरल के करीब है. महंगा तेल और ऊपर से माल ढुलाई की ऊंची लागत के कारण रूसी कच्चे तेल की खेप में कमी आई है. छूट के बजाए अक्टूबर में रूसी कच्चे तेल की कीमत स्टैंडर्ड कीमत से 12-13 डॉलर प्रति बैरल ज्यादा थी.ऊंची कीमत ने रूसी तेल से दूरी बढ़ा दी है.
खाड़ी देशों से सस्ता तेल
वहीं खाड़ी देशों से भारत को रूस के मुकाबले सस्ता तेल मिल रहा है. इराक के कार्गो स्टैंडर्ड बेंचमार्क से 25 डॉलर प्रति बैरल तक के डिस्काउंट मिल रहा है. सऊदी अरब, ईरान, कतर के अलावा वेनेजुएला जैसे देशों से तेल किफायती तेल खरीद रहा है. पश्चिम एशिया से मिलने वाला कच्चा तेल अब भारत के लिए व्यावसायिक रूप से ज्यादा फायदेमंद साबित हो रहा है.
रूस और ईरान से तेल खरीद पर टैरिफ का डर
रूस से तेल खरीद पर अमेरिका के 100 फीसदी टैरिफ का खतरा भी बना हुआ है. अमेरिका ने लिंडसे ओ. ग्राहम सेंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026 पास किया है, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस और ईरान से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने का अधिकार मिल गया है. भारत भी इस लिस्ट में शामिल है. हालांकि रूस के साथ डीजल डील के बाद अमेरिका ने अप्रैल 2027 तक के लिए रूसी तेल के निर्यात पर अस्थायी छूट दी है. भारत को अगर प्रतिबंधित तेल की खरीदना है, तो उसके पास रूस और ईरान दो विकल्प है. अब किससे खरीद बढ़ानी है ये किफायती लागत पर निर्भर करेगा.
रूस से भारत कितना तेल खरीद रहा है?
भारत और रूस के बीच दशकों के तेल का व्यापार हो रहा है. अगर सिर्फ 2026 की बात करें, तो रूस से भारत के तेल आयात में भारी उतार-चढ़ाव दिखा है, लेकिन मॉस्को हमेशा से भारत का भरोसेमंद साथी बना रहा है.
- जनवरी 2026 में भारत ने रूस से 1.1 मिलियन डॉलर प्रति बैरल कच्चे तेल का आयात किया.
- फरवरी 2026 में ये आयात बढ़कर 1.62 मिलियन डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया.
- मार्च 2026 में खाड़ी युद्ध शुरू होने के बाद रूसी तेल के आयात में उछाल आया और 2.06 मिलियन डॉलर प्रति बैरल रोजाना पर पहुंच गया
- अप्रैल 2026 में 29.4% गिरावट आई और यह 1.6 मिलियन डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचा.
- मई 2026 में इसमें फिर से तेजी आई और रूसी तेल का इंपोर्ट 1.9 मिलियन डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया.
- जून 2026 में रूसी तेल का इंपोर्ट रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया और ये 2.6 मिलियन डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया.
- जुलाई 2026 में रूसी तेल के आयात में महीने-दर-महीने 2.1 फीसदी का उछाल आया और ये 2.82 मिलियन डॉलर प्रति बैरल रोजाना पर पहुंचा. भारत के कुल तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी बढ़कर 55 फीसदी पर पहुंच गई.
- अगस्त 2026 में इसमें गिरावट आई और ये गिरकर 1.9 मिलियन डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया.
सितंबर 2026 में रूसी तेल में 14% का फॉल आया और ये गिरकर 1.8 मिलियन डॉलर प्रति बैरल रोजाना पर पहुंच गया.