SOCIAL MEDIA

Newsletter

PARTNER SITES
Select language

सोना-चांदी छोड़िए! भारत के पास है 'अरबों का वो खजाना', जो ड्रैगन की ऐंठ कर देगा ढीली; जानिए मोदी सरकार का मास्टर प्लान

सोने और चांदी को सम्पन्नता का प्रतीक माना जाता है. इसलिए धनतेरस के दिन बेशकीमती धातुओं की खरीददारी और पूजा होती है. लेकिन कुछ धातुएं सोने-चांदी से भी ज्यादा मूल्यवान होती हैं. ये मिनरल देश को वैभवशाली बनाते हैं. सरकार ने ऐसी बहूमुल्य धातुओं की प्रोसेसिंग के लिए बड़ा फैसला किया है.

Edited By Devinder Kumar
Published: Nov 06, 2026, 11:54 PM IST | Updated: Nov 07, 2026, 12:03 AM IST
Image Credit: भारत का क्रिटिकल मिनरल प्लान क्या है
Join

देश को आर्थिक रफ्तार देने वाले सेक्टर्स को महत्वपूर्ण खनिजों की बिना रुकावट आपूर्ति होती रहे, इसके लिए 2 हजार 814 करोड़ की योजना को मंजूरी दी गई है. ये निर्णय इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि प्राकृतिक संसाधन ही तय करते हैं कि कौन से देश तेज गति से उन्नति करेंगे. इसलिए अब हम धनतेरस पर क्रिटिकल मिनरल की पूजा वाली सरकार की पॉलिसी को डिकोड करेंगे.

प्रसिद्ध ब्रिटिश इतिहासकार अर्नोल्ड जे. टायन्बी का विचार है कि सभ्यताओं का उदय और पतन इस बात पर निर्भर करता है कि वे अपनी भौगोलिक सीमाओं के भीतर उपलब्ध प्राकृतिक और रणनीतिक संसाधनों का प्रबंधन कैसे करती हैं. भारत की भौगोलिक सीमा के अंदर महत्वपूर्ण खनिजों की प्रोसेसिंग को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने बड़ी योजना को मंजूरी दी है.

खनिजों से जुड़े प्रोसेसिंग प्लांट पर मिलेगी 30 फीसदी सब्सिडी

इस योजना के तहत, मूल्यवान खनिजों से जुड़े प्रोसेसिंग प्लांट लगाने के लिए सरकार 30 प्रतिशत सब्सिडी देगी, यानी प्रोसेसिंग प्लांट लगाने के कुल खर्च में से सरकार 30 प्रतिशत पैसा देगी. सब्सिडी के तौर पर केंद्र सरकार कुल 2 हजार 8 सौ 14 करोड़ रुपए खर्च करेगी. 30 हजार टन की क्षमता वाले दो लिथियम प्रोसेसिंग यूनिट और 50 हजार टन की क्षमता वाले दो निकल प्रोसेसिंग यूनिट के लिए सब्सिडी दी जाएगी. लिथियम प्रोसेसिंग के लिए हर यूनिट को 500 करोड़ रुपए और निकल प्रोसेसिंग के लिए हर यूनिट को 900 करोड़ रुपए की सब्सिडी दी जाएगी.

महत्वपूर्ण खनिजों की प्रोसेसिंग दुनिया के अलग-अलग देशों में होती है. ईरान वॉर में जैसे दुनिया की सप्लाई चेन में रुकावट आई है, उसने भविष्य के संकट से आगाह किया है. क्रिटिकल मिनरल की आपूर्ति देश की आर्थिक सुरक्षा के लिए अनिवार्य है. इसलिए भारत अब इस सेक्टर में आत्मनिर्भर बनना चाहता है.

क्रिटिकल मिनरल्स में आत्मनिर्भरता के लिए 2024 में नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन की शुरुआत की गई थी. सरकार का नया ऐलान इसी प्रोजेक्ट की अगली कड़ी है. फोकस क्रिटिकल मिनरल्स की खोज पर नहीं उसे खदान से निकाल कर इस्तेमाल करने के लिए प्रोसेस करने पर है. इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए धीरे-धीरे कई कदम आगे बढ़ना होगा. पहले कदम के तौर पर लिथियम और निकल की प्रोसेसिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है. ये प्रोसेसिंग यूनिट शुरू होने में 5 साल का समय लग सकता है.

भारत के पास क्रिटिकल मिनरल्स का कितना समृद्ध भंडार?

आमतौर पर हम सोना और चांदी को सबसे अनमोल धातु समझते हैं. लेकिन उससे भी ज्यादा बेशकीमती धातु हैं क्रिटिकल मिनरल्स. सिर्फ देश के लिए नहीं हमारे लिए भी. जानते हैं हम जो इलेक्ट्रिक व्हीकल चलाते हैं, जो बैटरी इस्तेमाल करते हैं, जो मोबाइल चलाते हैं, लैपटॉप चलाते हैं, कोई भी ऐसा उपकरण चलाते हैं, जिसमें चिप का इस्तेमाल होता है, उसे बनाने के लिए क्रिटिकल मिनरल चाहिए.

देश की रक्षा से जुड़े उपकरण, ड्रोन, सोलर पावर पैनल से लेकर सैटेलाइट तक बनाने में इन्हीं क्रिटिकल मिनरल्स का प्रयोग होता है. इसलिए धनतेरस पर क्रिटिकल मिनरल की पूजन का महत्व ज्यादा है. पहले समझिए क्रिटिकल मिनरल्स के मोर्चे पर हम भारतवासी कितने समृद्ध हैं.

बहुत ध्यान से सुनिए और समझिए कि भारत के पास क्रिटिकल मिनरल्स का कितना समृद्ध भंडार है और ये खजाना देश के किस-किस हिस्से में है. सबसे पहले बात करते हैं लिथियम की. क्योंकि लिथियम के दो प्रोसेसिंग प्लांट लगाए जाने हैं. भारत में लिथियम का लगभग 59 लाख टन का भंडार है. जम्मू-कश्मीर के रियासी और कर्नाटक के मांड्या में ये प्राकृतिक खजाना है.

रेयर अर्थ एलिमेंट्स का करीब 1 करोड़ 31 लाख टन का खजाना केरल, ओडिशा, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और झारखंड में है.

पहाड़, चट्टान और रेत सकता है हमारी ताकत

भारत के पास ग्रेफाइट का करीब 21 करोड़ टन का भंडार है. इसका सबसे बड़ा हिस्सा अरुणाचल प्रदेश में है. जम्मू-कश्मीर, झारखंड, तमिलनाडु, ओडिशा और राजस्थान में भी ग्रेफाइट की संपदा है. टाइटेनियम का 77 लाख टन का भंडार केरल,ओडिशा, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश जैसे तटीय राज्यों में है.

पोटेशियम का करीब 23 हजार करोड़ टन का भंडार है. यह खजाना राजस्थान के नागौर, मध्य प्रदेश के पन्ना, उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में है. फॉस्फेट का 31 करोड़ टन का भंडार झारखंड, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में मौजूद है.

जिन्हें हम पहाड़, चट्टान और रेत समझते हैं, वो दुनिया में हमारी आर्थिक श्रेष्ठता के स्रोत बन सकते हैं. आपके मन में जिज्ञासा होगी कि फिर हम क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ एलिमेंट्स का आयात क्यों करते हैं. हम क्यों चीन जैसे देशों पर निर्भर हैं.

भंडार खूब, फिर चीन से क्यों करते हैं आयात?

इसका जवाब है प्रोसेसिंग क्षमता का अभाव. हमारे पास बेशकीमती खनिजों का खजाना तो है लेकिन उसे प्रोसेस कर इस्तेमाल में लाने की क्षमता नहीं है. समझिए जैसे क्रूड ऑयल को प्रोसेस कर डीजल, पेट्रोल और दूसरे पेट्रोलियम पदार्थ बनाए जाते हैं. भारत में दुनिया का सिर्फ 0.28 प्रतिशत ही क्रूड ऑयल है. लेकिन दुनिया में क्रूड की प्रोसेसिंग में हमारी हिस्सेदारी 6 प्रतिशत है. तो ऐसे ही क्रिटिकल मिनरल्स की प्रोसेसिंग में भी भारत बड़ी ताकत बनने के लिए धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है.

कार्ल मार्क्स का विचार है कि वो व्यक्ति जो दुनिया के भौतिक संसाधनों और उत्पादन के साधनों का मालिक है, अंततः समाज की राजनीतिक शक्ति और वैचारिक दिशा का भी मालिक होता है.

रेयर अर्थ सप्लाई पर एकाधिकार के कारण ही चीन पूरी दुनिया को धौंस दिखाता है. लेकिन अगले कुछ सालों में ये पूरा समीकरण बदल जाएगा. क्रिटिकल मिनरल्स का खजाना हमारे पास पहले से है, हमने अपनी प्रोसेसिंग पावर को मजबूत किया तो दुनिया के अर्थतंत्र का पूरा समीकरण उल्टा हो जाएगा.

ड्रैगन का दबदबा खत्म करेगा भारत

जब भारत कच्चे खनिजों को रिफाइन करके हाई-प्योरिटी मैटेरियल, बैटरी सेल्स और परमानेंट मैग्नेट तैयार करने में आत्मनिर्भर बनेगा, तब दक्षिण एशिया, अफ्रीका और दुनिया के दूसरे विकासशील देश जो चीन के एकाधिकार से परेशान हैं. उनके सामने फिनिश्ड मैटेरियल्स और बैटरी के लिए भारत एक मजबूत विकल्प होगा. अमेरिका और यूरोप के देश भी अपनी सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए भारत से हाथ मिला सकते हैं. इससे भारतीय कंपनियां वैश्विक सप्लाई चेन की लीडर बनेंगी.

क्रिटिकल मिनरल्स की आपूर्ति में वैश्विक ताकत बनने से विश्व मंच पर जियोपॉलिटिक्स और वैश्विक कूटनीति में भारत की ताकत बढ़ेगी. वैश्विक तंत्र के समीकरणों में बदलाव के साथ ही हमारी अर्थव्यवस्था ग्लोबल सप्लाई चेन में रुकावट आने या वैश्विक कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव जैसे झटकों से पूरी तरह सुरक्षित हो जाएगी. भारत सिर्फ कच्चे माल का निर्यातक या आयातक नहीं रहेगा, हाई-वैल्यू मैन्युफैक्चरिंग का हब बनेगा. इससे आर्थिक मोर्चे पर बड़ा फायदा होगा.

समझिए क्रिटिकल मिनरल्स की पूजा से एक दशक बाद भारत विश्व मंच पर एक बड़ी आर्थिक और राजनीतिक ताकत बनेगा. क्योंकि दुनिया के हर देश को क्रिटिकल मिनरल्स की जरूरत है. उनकी ये जरूरत भारत पूरी करेगा. अब उस जरूरी सवाल पर भी चर्चा करते हैं कि भारत क्रिटिकल मिनरल्स का हब बना तो आपको-हमें क्या फायदा होगा. जब देश में ही क्रिटिकल मिनरल्स की प्रोसेसिंग होगी तो किन वस्तुओं के दाम कम होंगे. ये हमें सीधे मिलने वाला फायदा है. इसलिए इसे आप बहुत ध्यान से समझिए.

क्रिटिकल मिनरल्स से हमें क्या होगा फायदा?

भारत में क्रिटिकल मिनरल की प्रोसेसिंग होने से इलेक्ट्रिक वाहन सस्ते होंगे. EV की बैटरियां देश में ही बनने और प्रोसेस होने से इनकी लागत घटेगी. हमारे लिए इलेक्ट्रिक स्कूटर और इलेक्ट्रिक कार खरीदना सस्ता होगा. स्मार्टफोन और लैपटॉप जैसे पोर्टेबल इलेक्ट्रॉनिक्स गैजेट्स जो आयात के कारण महंगे होते हैं. उनके दाम कम होंगे. हमें फोन और लैपटॉप खरीदने में कम पैसा खर्च करना होगा.

सोलर पैनल और बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम से जुड़े प्रोडक्ट सस्ते होंगे. यानी हमारे घर का बिजली बिल सस्ता होगा. बिजली की सप्लाई सुनिश्चित होगी. ये डायरेक्ट फायदा है. इसके साथ ही देश में नए कारखाने लगेंगे, प्रोसेसिंग पार्क खुलेंगे. इससे लाखों हाई-स्किल नौकरियां पैदा होंगी. यानी हमारे लिए धन और समृद्धि का रास्ता खुलेगा.
 

Add Zee News as a Preferred Source
TAGS:

About the Author

अनुभवी पत्रकार और अंतर्राष्ट्रीय मामलों के विश्लेषक हैं. पिछले 18 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. अमर उजाला और नवभारत टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में काम करने के बाद, वर्तमान में वे Zee News में कार्यरत हैं. देश-दुनिया और ब्रेकिंग न्यूज पर नजर रखते हैं. अंतर्राष्ट्रीय राजनीति, वैश्विक घटनाक्रमों और खोजपरक पत्रकारिता में विशेष पकड़ है.
Read More

ZEENEWS TRENDING STORIES