IDBI बैंक के बिकने से सरकार को क्या मिला, बैंक में क्या बदलेगा, कर्मचारी से लेकर आपकी FD और EMI का क्या होगा?
IDBI Bank: कनाडा की कंपनी ने IDBI बैंक में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी खरीद ली है. इस डील के बाद बैंक में क्या-कुछ बदलने वाला है, FD, EMI से लेकर बैंक कर्मचारियों के लिए क्या बदलेगा ?
IDBI Bank deal : देश का एक बड़ा बैंक प्राइवेट कंपनी के हाथ में चला गया है. केंद्र सरकार ने IDBI बैंक की 60.72 फीसदी हिस्सेदारी कनाडा की कंपनी Fairfax को बेचने के प्रस्ताव को हरी झंडी दिखा दी है. डील पूरी होने के बाद बैंक का नियंत्रण सरकार के हाथों से निकलकर निजी कंपनी के पास पहुंच जाएगा. ऐसे में बैंक के खाताधारकों और कर्मचारियों के मन में तमाम सवाल उठ रहे हैं.
- बैंक के खाताधारकों के लिए क्या कुछ बदल जाएगा?
- बैंक में FD रखने वालों का क्या होगा, क्या ब्याज दरें बदल जाएगी?
- सरकारी योजनाओं का लाभ पहले की तरह मिलता रहेगा?
- बैंक के 16000 कर्मचारियों का क्या होगा?
- बैंक का निजीकरण होने के बाद क्या-क्या बदल जाएगा?
IDBI बैंक बिक गया... इसका मतलब आपके लिए क्या है?
आईडीबीआई बैंक में सरकार और LIC ने अपनी हिस्सेदारी कम की है. केंद्र सरकार के पास बैंक में 49.24 फीसदी और बीमा कंपनी LIC के पास 45.48 फीसदी की हिस्सेदारी थी, जो अब घटकर सरकार के पास 19 फीसदी और एलआईसी के पास 15 फीसदी रह जाएगी. दोनों के 60..72 फीसदी शेयर्स कनाडा की फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स (Fairfax Financial Holdings) ने खरीद लिया है. यानी अब फेयरफैक्स के पास बैंक के सबसे ज्यादा शेयर्स हैं, यानी कंट्रोल अब उसके हाथों में है. सबसे ज्यादा हिस्सेदारी रखने वाला फेयरफैक्स अब बैंक का नया मालिक बन गया है.
IDBI के बिकने से सरकार और LIC को क्या मिला?
ये डील करीब 53,000 करोड़ रुपये में हुई है. सरकार को 30.48 फीसदी हिस्सेदारी बेचने पर करीब 26,620 करोड़ रुपये और एलआईसी को 30.24 फीसदी हिस्सेदारी के लिए करीब 26,440 करोड़ रुपये मिलेंगे.
बिकने के बाद क्या बदल जाएगा IDBI बैंक?
बैंक के विनिवेशक का काम 2027 तक पूरा हो सकता है. बैंक का नियंत्रण कनाडा की कंपनी के हाथों में होगा. बैंक के बिकने के बाद क्या-क्या बदलाव हो सकते हैं ? ग्लोबल इक्विटी रिसर्च फर्म जेफरीज की माने, तो फेयरफैक्स गो डिजिट इंश्योरेंस और आईआईएफएल कैपिटल में अपने शेयर्स को आईडीबीआई बैंक के अधीन ला सकता है. जिससे IDBI बैंक एक फाइनेंशियल सर्विसेज इंस्टीट्यूट के तौर पर काम करेगा. बैंक इंश्योरेंस और शेयर बाजार से जुड़ी सर्विसेस ला सकता है. फेयरफैक्स के साथ डील के बाद IDBI बैंक के साथ नई सर्विसेस जुड़ सकती हैं.
- बैंकिंग
- इंश्योरेंस
- प्रॉपर्टी इंश्योरेंस
- लाइफ इंश्योरेंस
- वेल्थ मैनेजमेंट
- इन्वेस्टमेंट बैंकिंग
IDBI तो 2019 से प्राइवेट, फिर बिका क्यों?
साल 2019 में LIC ने इस बैंक में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी हासिल कर ली थी, तो रिजर्व बैंक ने इसे प्राइवेट सेक्टर के बैंक की कैटेगरी में डाल दिया था. हालांकि सरकार के पास इसमें 45 फीसदी से अधिक ही हिस्सेदारी थी, जिसकी वजह से मैनेजमेंट पर उसका होल्ड था. अब सरकार ने अपने रणनीतिक विनिवेश योजना के तहत इसमें अपनी बड़ी हिस्सेदारी बेच दी है, जिसके बाद बैंक का मैनेजमेंट कनाडा की कंपनी फेयरफैक्स के पास पहुंच गया है.
IDBI बैंक में जमा पैसों, FD, लोन की EMI क्या होगा ?
सरकार और खुद बैंक के नए मालिक की ओर से ये साफ किया जा चुका है कि बैंक का मैनेजमेंट होल्ड बदलने से खाताधारकों पर कोई असर नहीं होगा. खाते, जमा राशि और मौजूदा लोन की शर्तें, EMI में कुछ भी बदलाव नहीं होने वाला है.
क्या IDBI बैंक का नाम बदल जाएगा?
इस डील में ये शर्त रखी गई है कि मालिकाना हक भले बदला हो, लेकिन अगले 3 साल के लिए बैंक का नाम नहीं बदलेगा. बैंक के ब्रांच आि तुरंत नहीं बदले जाएंगे.
IDBI के मौजूदा कर्मचारियों का क्या होगा ?
फेयरफैक्स के मालिक प्रेम वत्स ने टाइम्स ऑफ इंडिया के साथ इंटरव्यू में साफ किया है कि डील से किसी भी कर्मचारी की सेवा या उसकी शर्तों या उसे मिलने वाले लाभों में कोई बदलाव नहीं होगा. उन्होंने साफ किया कि बैंक के कर्मचारियों की नौकरी सुरक्षित है. हालांकि बैंक के कर्मचारी इस डील का विरोध कर रहे हैं. कर्मचारियों ने काली पट्टी बांधकर इसका विरोध जताया है.