ट्रंप के यार की हार, ब्राजील में फिर से लूला की सरकार: भारत के लिए 'चीन की काट', 30 अरब डॉलर ट्रेड का रास्ता साफ
India-Brazil Relation: ब्राजील में लूला की जीत से भारत क्यों खुश है ? कैसे लूला की जीत से भारत को फायदा होने वाला है, कैसे भारत-ब्राजील की दोस्ती चीन और अमेरिका की मनमानी की काट साबित होने वाली है?
India Brazil Trade: मेटल वर्कर लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा चौथी बार ब्राजील के राष्ट्रपति बने हैं. उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समर्थक और लिबरल पार्टी के नेता फ्लावियो बोल्सोनारो को हराकर एक बार फिर से ब्राजील की सत्ता हासिल की है. लूला की जीत से जहां व्हाइट हाउस में निराशा हो सकती है, वहीं भारत के लिए यह बड़ी खुशखबरी है. लूला की जीत पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बधाई संदेश भेजा है. दोनों देशों के बीच मजबूत संबंध और साझेदारी की बात की है.
तेल और रेयर अर्थ से लबालब भरा है ब्राजील
ब्राजील कच्चे तेल से समृद्ध है. नेशनल एजेंसी ऑफ पेट्रोलियम के डेटा के मुताबिक उसके पास करीब 17.488 बिलियन बैरल कच्चे तेल का प्रमाणित तेल भंडार है. रेयर अर्थ मिनरल्स के मामले में वो दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है.दुलर्भ खनिज पर चीन की मनमानी को नियंत्रित करने वाला ब्राजील भारत के लिए जरूरी है.
ब्राजील लैटिन अमेरिका में भारत का सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर है. ब्रिक्स का एक मजबूत सहयोगी है. ब्राजील में लूला की वापसी से भारत-ब्राजील के बीच द्विपक्षीय संबंधों, आर्थिक प्रभाव, निवेश को बढ़ावा मिलेगा. जहां एक तरफ युद्ध की वजह से वैश्विक अनिश्चितता और तनाव का माहौल बना है,अमेरिका-चीन के बीच रणनीतिक प्रतिद्वंद्विता और वर्चस्व की बहस छिड़ी है. ऐसे वक्त में लैटिन अमेरिका में भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार में पुराने दोस्त के हाथों में फिर से सत्ता लौटी है.
ब्राजील में लूला की वापसी से भारत क्या हासिल करेगा
भारत और ब्राजील की कई प्राथमिकताएं एक-दूसरे से मेल खाती है. चाहे वो अंतरराष्ट्रीय फैसलों में ग्लोबल साउथ की भागीदारी बढ़ाने की बात हो या ब्रिक्स देशों के बीच मजबूत व्यापार का पक्ष हो. भारत के लिए लूला की ये जीत इसलिए भी जरूरी है कि क्योंकि वह अपनी ट्रेड डायवर्सिफिकेश स्ट्रेटेजी को धार देने में लगा हुआ है. इसके लिए दिल्ली का फोकस ब्राजील जैसे विकासशील देशों पर बढ़ा है.
ब्राजील में लूला की जीत से भारत को क्या हासिल होगा?
भारत और ब्राजील एक दशक से व्यापारिक साझेदार है. दोनों के बीच 15.21 अरब डॉलर से अधिक का द्विपक्षीय कारोबार होता है. भारत के विदेश मंत्रालय की ओर से साझा किए गए डेटा के मुताबिक...
- साल 2024 में भारत-ब्राजील के बीच 12.20 अरब डॉलर का ट्रेड हुआ.
- साल 2025 में ये ट्रेड 25% बढ़ाकर 15.21 अरब डॉलर पर पहुंच गया.
- साल 2026 के शुरुआती 6 महीने में ये डेटा 8.77 अरब डॉलर पर पहुंच चुका है.
- इस साल भारत-ब्राजील के व्यापार में 37% ग्रोथ का अनुमान है.
30 अरब डॉलर के व्यापार पर लक्ष्य
जुलाई 2025 में पीएम मोदी ब्राजील गए, जहां दोनों देशों में अगले 5 सालों में व्यापार को 20 अरब डॉलर पर पहुंचाने का लक्ष्य रखा. फरवरी 2026 में लूला भारत आए थे . उन दौरान दोनों देशों के बीच करीब 10 से अधिक समझौते हुए. दोनों देशों ने साल 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाकर 20 अरब डॉलर पर पहुंचाने का लक्ष्य रखा.
भारत-ब्राजील के बीच किन-किन चीजों का आयात-निर्यात होता है
साल 2025 के ट्रेड फीगर के मुताबिक भारत का ब्राजील को एक्सपोर्ट 8.35 अरब डॉलर का रहा, जबकि इंपोर्ट 6.86 अरब डॉलर का था. यानी भारत का ब्राजील के साथ ट्रेड सरप्लस करीब 1.49 अरब डॉलर का है. साल-दर-साल इसमें बढ़ोतरी की उम्मीद है.
भारत ब्राजील को भेजता है: पेट्रोलियम प्रोडक्ट और डीजल, फार्मास्यूटकल, नाइट्रोजन, जैविक रसायन, कीटनाशक, कच्चा एल्युमिनियम, ऑटो पार्ट्स, चाय, मसाले, गारमेंट्स, चमड़े के उत्पाद आदि
ब्राजील से खरीदता है: ब्राजील से भारत चीनी, कच्चा तेल, वनस्पति तेल, कपास और लौह अयस्क खरीदता है.
भारत के लिए ब्राजील क्यों जरूरी है?
लूला के सत्ता में वापसी के बाद भारत और ब्राजील पास इस साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का मौका है. बात सिर्फ द्विपक्षीय व्यापार तक सीमित नहीं है. दोनों देशों के मजबूत संबंध वैश्विक मंच पर ब्रिक्स की मजबूती को दिखाने के साथ-साथ अमेरिका और चीन के बीच मनमानी के लिए गतिरोध पैदा करते हैं.
ब्राजील के पास तेल का भंडार: भारतीय सरकारी तेल कंपनी BPCL ने इसी साल ब्राजील से 780 मिलियन डॉलर के कच्चे तेल की खरीद की डील की है. साल 2027 तक भारत ब्राजील से 27 मिलियन कच्चा तेल खरीदने की तैयारी में है, जो पिछले साल से दोगुना है. ग्लोबल ऑयल मार्केट में उठापटक, रूसी तेल पर अमेरिका की लटकती तलवार के बीच ब्राजील तेल का बड़ा साझेदार बन सकता है.
चीन को झटका, रेयर अर्थ के लिए भारत को मिला 'नया दोस्त'
दुलर्भ मिनिरल्स मामले में ब्राजील दुनिया का दूसरे सबसे संपन्न देश है. उसके पास लगभग 21 मिलियन टन का विशाल भंडार है और ग्लोबल रेयर अर्थ मिनिरल्स में ब्राजील की हिस्सेदारी 17-25% है. फरवरी 2026 में जब लूला भारत दौरे पर आए थे, उन्होंने भारत के साथ रेयर अर्थ मिनिरल्स के लिए डील की थी. भारत चीन पर अपनी निर्भरता का विकल्प तलाश रहा है और ब्राजील भारत के लिए दुर्लभ धातुओं के लिए चीन का विकल्प बन रहा है.
चीन का विकल्प
चूंकि भारत तेजी से इलेक्ट्रिक वाहन, सोलर पैनल, विंड टरबाइन, बैटरी और सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग की ओर बढ़ रहा है. ऐसे में रेयर अर्थ की उपलब्धता सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिकता है. चीन के साथ अनिश्चितता बनी रहती है, ऐसे में ब्राजील एक बड़ा सहयोगी साबित हो सकता है.
भारत की कंपनियों को फायदा
फरवरी 2026 के दौरे पर ही लूला ने फार्मास्युटिकल्स समेत कई सेक्टर्स से जुड़ी डील की थी. भारत ब्राजील को भारी मात्रा में दवाएं बेचता है. लूला की वापसी के बाद भारतीय दवा कंपनियों, ऑटोमोबाइल कंपनियों, इंजीनियरिंग सेक्टर के लिए ब्राजील का बाजार तेजी से बढ़ेगा. ट्रंप के टैरिफ धमकियों के बीच अमेरिकी बाजार को लेकर असमंजस की स्थिति बनी रहती है , ऐसे में फार्मा कंपनियों के लिए ब्राजील के बाजार की उपलब्धता भी जरूरी है.
रुपये की मजबूती में मिलेगा ब्राजील का साथ
ब्रिक्स के संस्थापक देशों में से एक ब्राजील खुले मंच पर कई बार डी-डॉलराइजेशन की वकालत कर चुका है. लूला अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने की वकालत कर चुके हैं. वो व्यापार में स्थानीय मुद्राओं के अधिक उपयोग के मुखर समर्थक रहे हैं.ऐसे में उम्मीद बढ़ रही है कि भारत-ब्राजील के बीच लोकल करेंसी में व्यापार को बढ़ावा मिल सकता है, जिससे देश की करेंसी और अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और डॉलर को झटका लगेगा.
ग्लोबल मंच पर भारत का मजबूत पार्टनर
भारत-ब्राजील सिर्फ व्यापारिक पार्टनर ही नहीं है, बल्कि ग्लोबल मंच पर दोनों एक-दूसरे का साथ देते हैं. भारत लंबे वक्त से UN की सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता चाहता है और ब्राजील उसका समर्थन भी करता रहा है. दोनों देश ब्रिक्स देशों के बीच लोकल करेंसी में व्यापार की संभावना तलाशने पर जोर दे रहे हैं.
भारत-मर्कोसुर व्यापार समझौते को करेगा मजबूत
लूला की जीत भारत-मर्कोसुर व्यापार समौते पर और विस्तारिक और मजबूत करेगी. दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग और मजबूत होगा. भारत के लिए लूला की वापसी रिन्यूएबल एनर्जी, एथेनॉल ब्लेंडिंग और सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल के क्षेत्र में नए पार्टनर की वापसी है.
मर्कोसुर को भी समझिए
दरअसल मर्कोसुर एक लैटिन अमेरिकी व्यापार समूह है, जिसमें ब्राजील, अर्जेंटीना, उरुग्वे और पैराग्वे शामिल हैं. भारत और मर्कोसुर PTA डील जून, 2009 को लागू हुआ था. इस डील के तहत भारत करीबन450 प्रोडक्ट्स पर आयात शुल्क में छूच देता है, जबकि भारत के करीब 452 उत्पादों पर इन देशों में टैरिफ में छूट मिलती है. धीरे-धीरे इसका दायरा बढ़ाने पर बात चल रही है. साल 2026 में ही इस PTA डील को FTA में बदलने की बातचीत शुरू हो गई है. अगर ऐसा होता है, तो भारतीय उत्पादों के लिए एक बड़ा बाजार उपलब्ध होगा.