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LTCG Tax: बजट से पहले आने वाले हफ्तों में सरकार इक्विटी पर लगने वाले लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स की समीक्षा कर सकती है. इस कदम का असर विदेशी और घरेलू, दोनों तरह के निवेशकों पर पड़ सकता है, क्योंकि केंद्र सरकार भारतीय इक्विटी को और अधिक आकर्षक बनाने के तरीकों पर विचार कर रही है.
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार मौजूदा LTCG टैक्स फ्रेमवर्क में बदलाव करने पर विचार कर रही है. इसमें अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के टैक्स रेट की तुलना में अपने टैक्स रेट की समीक्षा करना भी शामिल है.
फिलहाल, लिस्टेड इक्विटी की बिक्री से होने वाले लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स पर 12.5% की दर से टैक्स लगता है. इसमें इंडेक्सेशन का फायदा नहीं मिलता है. ये टैक्स एक वित्तीय वर्ष में 1.25 लाख रुपये से अधिक के मुनाफे पर लागू होता है. रिपोर्ट के अनुसार, अनलिस्टेड शेयरों के मामले में 1.25 लाख रुपये की छूट सीमा लागू नहीं होती है.
इंडेक्सेशन की सर्विस के तहत किसी संपत्ति की खरीद कीमत को महंगाई के असर के हिसाब से एडजस्ट किया जाता है. इससे टैक्स की गणना के लिए मुनाफे की रकम कम हो सकती है. लेकिन, शेयरों और इक्विटी म्यूचुअल फंड से होने वाले लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) पर मौजूदा टैक्स सिस्टम में ये सर्विस नहीं मिलती है.
रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र सरकार ने LTCG फ्रेमवर्क और पूंजी के बाहर जाने (कैपिटल आउटफ्लो) पर इसके असर को लेकर उद्योग प्रतिनिधियों, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड, बैंकों और अन्य शेयर होल्डर के साथ कई बैठकें की हैं.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में एक सरकारी अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि टैक्स फ्रेमवर्क में बदलाव को लेकर जल्द ही कोई फैसला लिया जा सकता है. चर्चाओं से जुड़े एक वरिष्ठ बैंकिंग अधिकारी ने बताया कि सरकार के भीतर ये बात समझी जा रही है कि भारतीय इक्विटी की कॉम्पिटेटिवनेस बढ़ाने और उन्हें विदेशी निवेशकों के लिए और अधिक आकर्षक बनाने के लिए टैक्स फ्रेमवर्क की समीक्षा करना जरूरी है.
रिपोर्ट में बताया गया है कि सरकार कई प्रस्तावों पर विचार कर रही है, इनमें LTCG से जुड़े प्रस्ताव भी शामिल हैं.
ये समीक्षा ऐसे समय में हो रही है जब भारतीय इक्विटी से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की भारी निकासी देखने को मिल रही है. सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज लिमिटेड (CDSL) के आंकड़ों के मुताबिक, 2024 में अब तक इक्विटी से कुल FPI निकासी 3.1 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है. रिपोर्ट में बताया गया है कि ये आंकड़ा पूरे 2025 के दौरान निकाले गए 1.7 लाख करोड़ रुपये से काफी अधिक है.
सरकार इस बात की जांच कर रही है कि क्या टैक्स फ्रेमवर्क में बदलाव करके भारतीय इक्विटी को विदेशी निवेशकों के लिए और अधिक आकर्षक (प्रतिस्पर्धी) बनाया जा सकता है. 13 अक्टूबर को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार LTCG टैक्स को हटाने के संबंध में लोगों की राय जानने की इच्छुक है. हालांकि, टैक्स फ्रेमवर्क में बदलाव को लेकर अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है.