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PF सब्सक्राइबर्स को झटका! सैलरी लिमिट बढ़कर ₹25000 हुई, फिर भी सरकार क्यों नहीं बढ़ा रही कॉन्ट्रीब्यूशन

केंद्र सरकार की तरफ से यह साफ किया गया है कि EPS में 25,000 रुपये की नई वेज सीलिंग के बावजूद उसका कॉन्ट्रीब्यूशन पहले की ही तरह 1.16% रहेगा. यह पुरानी वेज सीलिंग 15000 रुपये जितना ही है. इस फैसले का आपकी पेंशन और पीएफ अकाउंट पर आने वाले समय में क्या असर पड़ेगा.

Written By Kriyanshu Saraswat
Published: Oct 24, 2026, 04:36 PM IST | Updated: Oct 24, 2026, 04:43 PM IST
Image Credit: (File Pic) सरकार अभी 15000 रुपये की वेज सीलिंग के हिसाब से 174 रुपये का कॉन्ट्रीब्यूशन करती है.
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अगर आप सैलरीड क्लास हैं तो हर महीने आपकी सैलरी से भी पीएफ (PF) और पेंशन (EPS) का पैसा कटता होगा. सरकार ने पिछले दिनों कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) के तहत सैलरी लिमिट को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये कर दिया था. इस फैसले के बाद करोड़ों कर्मचारियों ने उम्मीद की थी कि अब सरकार की तरफ से उनके पेंशन अकाउंट में अपना कॉन्ट्रीब्यूशन बढ़ाया जाएगा. लेकिन 15 अक्टूबर 2026 को सरकार की तनफ से जारी नोटिफिकेशन से पूरी स्थिति बदल गई है.

सरकार की तरफ से साफ किया गया कि 25,000 रुपये की नई वेज सीलिंग लागू होने के बावजूद अपना कॉन्ट्रीब्यूशन 15,000 रुपये की पुरानी लिमिट पर ही बनाए रखेगी. लेबर मिनिस्ट्री की तरफ से जारी नोटिफिकेशन के अनुसार सोशल सिक्योरिटी कोड 2020 के सेक्शन-15 के तहत मिले अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए कर्मचारी पेंशन योजना 2026 में बदलाव किया गया है. सरकार ने साफ किया कि भले ही नई वेज सीलिंग 25,000 रुपये महीना 17 सितंबर 2025 से मान्य है. लेकिन ईपीएस (EPS) में सरकार का 1.16% कॉन्ट्रीब्यूशन पुरानी 15,000 रुपये की लिमिट पर ही दियाा जाएगा.

कानूनी क्लॉज में क्या बदलाव किया?

ईपीएस 2026 स्कीम के तहत नियम था कि सरकार ईपीएस मेंबर्स की सैलरी का 1.16% योगदान देगी. यह सरकार की तरफ से तय की जाने वाली लिमिट तक सीमित होगा. पुराने नियम के तहत एम्प्लॉयर और सरकार दोनों के योगदान को एक वेज सीलिंग तक सीमित रखने की बात कही गई थी. हालांकि, नए बदलाव के बाद नियम से 'और केंद्र सरकार' को हटा दिया गया है. संशोधित नियम के तहत साफ किया गया कि केंद्र सरकार का कॉन्ट्रीब्यूशन 15,000 रुपये प्रति माह तक की सैलरी पर 1.16% रहेगा. एम्प्लॉयर का कॉन्ट्रीब्यूशन नोटिफाइड वेज सीलिंग के हिसाब से तय होगा.

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आंकड़ों से समझिए पूरी कैलकुलेशन

सरकार की तरफ से लिये गए फैसले के लिये आपको आंकड़ों को समझना होगा. मौजूदा नियम के अनुसार सरकार कर्मचारी की बेसिक सैलरी का 1.16% हिस्सा ईपीएस अकाउंट में जमा करती है. वेज सीलिंग 15,000 रुपये होने पर सरकार का कॉन्ट्र्रीब्यूशन (1.16%) 174 रुपये बनता था. लेकिन यदि 25,000 रुपये की वेज सीलिंग के बेस पर कॉन्ट्रीब्यूशन को 1.16% किया जाता है तो यह रकम बढ़कर 290 रुपये महीना हो जाएगी. आसान भाषा में कहें तो हर कर्मचारी के पेंशन अकाउंट में सरकार की तरफ से हर महीने 116 रुपये का ज्यादा कॉन्ट्रीब्यूशन किया जाता. लेकिन सरकार की तरफ से लिमिट तय किये जाने के कारण यह मदद 174 रुपये पर ही रुक गई.

क्या आपकी पेंशन कम हो जाएगी?

काफी नौकरीपेशा के मन में यही सवाल है कि सरकारी कॉन्ट्रीब्यूशन पुराने लेवल पर ही बने रहने से रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली पेंशन कम हो जाएगी. लेकिन आपको बता दें ईपीएस एक 'डिफाइंड बेनिफिट स्कीम' है. इसका सीधा सा मतलब यह हुआ कि आपकी पेंशन की रकम इस बात पर निर्भर नहीं करती कि अकाउंट में कुल कितना पैसा जमा? यह पेंशन आपकी नौकरी के साल और आखिरी 60 महीने की औसत सैलरी के फॉर्मूले के आधार पर तय होती है. इसलिए सरकार का कॉन्ट्रीब्शून पुरने ही लेवल पर बने रहने से आपकी मंथली पेंशन पर कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा.

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पेंशन फंड पर क्या होगा असर?

मौजूदा समय में आपकी पेंशन पर भले ही सीधा असर नहीं हो. लेकिन लंबे समय में इसका अप्रत्यक्ष असर पड़ सकता है. यदि वेज सीलिंग बढ़ने के बावजूद सरकार अपना कॉन्ट्रीब्शून नहीं बढ़ाती तो EPS फंड में उम्मीद के हिसाब से पैसा जमा नहीं हो पाएगा. यदि भविष्य में पेंशन फंड के पास पेंशनर्स को पेमेंट करने के लिए पर्याप्त पैसा नहीं बचता तो ईपीएफओ या सरकार को पेंशन गैप (Pension Gap) भरने के लिए नियमों में बदलाव करना पड़ सकता है.

सरकार ने क्यों लिया यह फैसला?

सरकार की तरफ से जारी नोटिफिकेशन में कोई खास कारण तो नहीं बताया गया लेकिन इसके पीछे वित्तीय बोझ को बड़ा कारण माना जा रहा है. लेबर मिनिस्ट्री की तरफ से जुलाई 2025 में यह साफ किया गया था कि ईपीएस फंड का हर साल वैल्यूएशन किया जाता हे. 31 मार्च 2019 के वैल्यूएशन के अनुसार पेंशन फंड में कई साल से बड़ा घाटा चल रहा था. संसद में दिए गए बयान के अनुसार सरकार 1.16% के नियमित कॉन्ट्रीब्शून के अलावा 1,000 रुपये की मिनिमम पेंशन के लिए पहले से ही बजटीय सपोर्अ दे रही है.

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About the Author

क्रियांशु सारस्वत वरिष्ठ बिजनेस जर्नलिस्ट (Business Journalist) हैं, उन्हें डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 17 साल का अनुभव है. मौजूदा समय में वह Zee News (Hindi) की डिजिटल टीम में बतौर 'असिस्टेंट न्यूज एडिटर' कार्यरत हैं. क्रियांशु को बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, टैक्सेशन, कमोडिटी और सरकारी योजनाओं आदि से जुड़ी खबरों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में महारथ हासिल है. Zee News से पहले क्रियांशु ने टाइम्स इंटरनेट, हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण और अमर उजाला की वेबसाइट में अहम संपादकीय जिम्मेदारियां निभाई हैं. इस दौरान क्रियांशु ने ऑटो, टेक्नोलॉजी और लाइफस्‍टाइल लीड की जिम्मेदारी संभाली है. अभी क्रियांशु बिजनेस लीड हैं. यूपी से ताल्‍लुक रखने वाले क्र‍ियांशु पत्रकार‍िता में पोस्ट ग्रेजुएट हैं.
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