Gold Price Today: एक तरफ कच्चे तेल के दाम भाग रहे हैं, तो दूसरी तरफ सोने-चांदी की कीमतों में भारी गिरावट का सिलसिला जारी है. सोने की कीमत में फिर से बड़ी गिरावट देखने को मिली है. जो सोना साल के शुरुआत में 1.76 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के भाव पर बिक रहा था, वो गिरते-गिरते अब 1.40 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम से नीचे खिसकने लगा है. चांदी का हाल तो और भी बुरा है. चांदी की कीमत जनवरी 2026 में 3.86 लाख रुपये से ऊपर पहुंच चुकी थी. आज उसकी कीमत 1.94 लाख रुपये से नीचे आ चुकी है.
इंटरनेशनल मार्केट में गोल्ड की कीमतों में बड़ी गिरावट देखी जा रही है. कॉमैक्स गोल्ड -30.86 डॉलर की गिरावट के साथ 3,993.96 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच चुका है.MCX पर सोने की कीमत में 1159 रुपये की गिरावट आई और बाजार बंद होने से पहले सोना 1.42 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया. भारतीय सर्राफा बाजार की बात करें, तो इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट पर जारी रेटलिस्ट के मुताबिक सोने-चांदी की कीमत कुछ इस तरह से रही है.
इस साल चांदी की कीमत में बड़ी गिरावट देखने को मिली है. चांदी करीब 10 महीने बाद फिर 2 लाख रुपए के नीचे पहुंच चुकी है. इस हफ्ते चांदी की कीमत 16503 रुपये गिरी है, जबकि सोना सिर्फ तीन दिन में 4796 रुपए सस्ता हो चुका है. वहीं अगर ऑल टाइम हाई से तुलना करें तो 29 जनवरी को सोना-चांदी दोनों अपने उच्चतम वैल्यू पर था. तब से लेकर अब तक चांदी अपने ऑल टाइम हाई से 1.86 लाख रुपये सस्ती हो चुकी है. जबकि सोना 34000 रुपये गिर चुका है.
वैश्विक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में लगातार आ रही तेजी, महंगाई बढ़ने का डर, अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड जैसे कई फैक्टर्स हैं, जो सोने-चांदी की कीमतों पर असर डाल रहे हैं. कच्चे तेल के उबाल ने सोने-चांदी पर दबाव बनाया है. क्रूड ऑयल 117 डॉलर के ऊपर बनी हुई है, जो महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ा रहा है. बढ़ती महंगाई इस आशंका को और बढ़ा रही है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व लंबे वक्त तक ब्याज दरों को ऊंचे स्तर पर बनाए रख सकता है.
ऊंची ब्याज दरें सोने और चांदी पर दबाव डाल सकती हैं,चूंकि सोने पर कोई ब्याज नहीं मिलता है. निवेशक सोने के बजाए बेहतर रिटर्न के लिए बॉन्ड में पैसा लगा सकते हैं, जो सोने को लेकर निवेशकों के क्रेज को कम करता है. 27-28 अक्टूबर को फिर से अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक होने वाली है, जिसमें ब्याज दरों को लेकर संकेत मिल सकते हैं. इन सब वजहों से कमोडिटी का बाजार हिला हुआ है.