अपने ही खाते में पैसा जमा करने पर लगता है चार्ज, कैश निकालना भी फ्री नहीं...आम आदमी से कैसे-कैसे कमाई करते हैं बैंक?
Banks Charges: खाता खाता खोलने से लेकर बैंक में पैसा जमा करने, एटीएम से कैश निकालने यहां तक कि बैंक की ओर से SMS में भेजे जाने पर बैंक की ओर से चार्ज वसूला जाता है.
Bank Charges: घर में पैसे चोरी ना हो जाए, इसलिए हम और आप बैंक खाते में कैश जमा करते हैं. बैंक हमारे पैसों को निवेश कर मोटा रिटर्न कमाते हैं. हम जो पैसे बैंक में जमा करते हैं, FD कराते हैं, उन्हें बैंक वापस निवेश करके, लोन बांटकर मोटा ब्याज तो कमाते ही है, साथ ही साथ आम खाताधारकों से अलग-अलग तरह के फीस वसूलकर करोड़ों में कमाई करते है. बैंक खाते में पैसा जमा करने से लेकर अपना पैसा निकालना तक...बैंक कुछ भी फ्री में नहीं करते हैं.
पैसा आपका, खाता भी आपका पर बैंक वसूलती है फीस
बैंक आपसे अलग-अलग सर्विसेस के लिए चार्ज वसूलती है. खाता खोल लिया और उसमें पैसे तय सीमा से कम हो गए, तो भी बैंक पेनेल्टी वसूलेगी. जरूरत पड़ने पर आपने अपने खाते से अपना ही पैसा निकाला, तो भी आपको चार्ज देना पड़ता है. इतना ही नहीं, बैंक खाते में कैश जमा करने या निकालने पर मोबाइल पर जो मैसेज आता है, वो भी फ्री नहीं है. बैंक उसके लिए भी आपसे चार्ज वसूलती है.
बैलेंस चेक करने पर भी लगता है चार्ज
थोड़ा और आगे बढ़ते हैं, खाते में पैसा जमा करने पर भी फीस लगती है. बस ये चेक किया कि आपके खाते में बैलेंस कितना है, उस पर भी चार्ज लगता है. चेकबुक चाहिए या पासबुक का स्टेटमेंट निकालना, वो भी फ्री नहीं है. ना कैश निकाला और ना ही बैलेंस चेक किया, बस ऑनलाइन खाते से दूसरे खाते में फंड ट्रांसफर किया, फिर भी आप बैंक के शुल्क वसूली के रडार से बच नहीं सकते हैं. भले ही UPI पेमेंट फ्री हो, लेकिन बैंक ऑनलाइन फंड ट्रांसफर (IMPS) पर चार्ज वसूलती है.
FD जमा पर ब्याज कम, सर्विस पर चार्ज ज्यादा
कुल मिलाकर आप कह सकते हैं कि FD जमा पर ब्याज कम हो रहा है, लेकिन बैंकों की पेनेल्टी और चार्जेज लगातार बढ़ रहे हैं. आपसे पेनेल्टी वसूलकर बैंक मोटी कमाई करते हैं. वित्त वर्ष 2023 से 2026 के बीच बैंकों ने सिर्फ मिनिमम बैलेंस नहीं रखने वाले ग्राहकों से जुर्माने के तौर पर 26,170 करोड़ रुपये की वसूली की.
वसूली में कौन-सा बैंक सबसे आगे
FY26 में बैंकों ने सिर्फ मिनिमम बैलेंस के नाम पर ग्राहकों से 7086 करोड़ रुपये की वसूली की, जिसमें से प्राइवेंट बैंकों की हिस्सेदारी 4,948.71 करोड़ और सरकारी बैंकों की वसूली 2,137.92 करोड़ रुपये थी.
- मिनिमम बैलेंस के नाम पर HDFC ने 1798 करोड़ रुपये
- एक्सिस बैंक ने 1081 करोड़ रुपये
- ICICI बैंक ने 353.50 करोड़ रुपये
- बैंक ऑफ बड़ौदा ने 394.10 करोड़
- SBI ने 477.27 करोड़ रुपये
SBI ने पिछले 5 सालों में ATM से कैश ट्रांजैक्शन पर 2043 करोड़ रुपये की चार्ज वसूली की. ये सिर्फ एक बैंक का आंकड़ा है. फ्री लिमिट के बाद एटीएम से अपना ही कैश निकालने पर बैंक आपके चार्ज वसूलती है.
बैंक की कौन-कौन-सी सर्विस पर कितना लगता है चार्ज?
बैंक खाते में पैसा जमा करने पर भी चार्ज: SBI बैंक की ऑफिशियल वेबसाइट के मुताबिक सेविंग अकाउंट में कस्टमर हर महीने 3 बार फ्री कैश डिपॉजिट कर सकते हैं. इसके बाद हर बार कैश जमा करने पर ₹50 + GST का चार्ज लगता है. प्राइवेट बैंक ICICI हर महीने 3 फ्री ट्रांजैक्शन की सुविधा देता है. इसके बाद हर महीने 1 लाख रुपये तक का फ्री कैश जमा कर सकते हैं. इससे ज्यादा बार कैश जमा करने पर बैंक आपसे चार्जेस वसूलती है.
मिनिमम बैलेंस पर चार्ज: सेविंग्स अकाउंट में तय सीमा से कम बैलेंस रखने पर बैंक आपके ऊपर पेनेल्टी लगाती है. शहर और अकाउंट के हिसाब से मिनिमम बैलेंस की लिमिट अलग-अलग है. जैसे अगर आपका बैंक HDFC में है, तो शहरी ब्रांच के खातों में 10000 रुपये और ग्रामीण इलाकों में बैंक खाते में कम से कम 5000 रुपये का बैलेंस रखना होगा. SBI 20 रुपये महीना, तो कई प्राइवेट बैंक 650 रुपये प्रति माह तक चार्ज वसूलते हैं.
डेबिट कार्ड पर भी फीस: डेबिट कार्ड इश्यू करने, एनुअल मेंटिनेंस या रिप्लेसमेंट के लिए चार्ज लगता है. शुल्क कितनी होगी ये कार्ड के फीचर्स पर निर्भर करता है. कुछ अकाउंट्स के साथ फ्री डेबिट कार्ड्स भी मिलते हैं, जबकि आमतौर पर डेबिट कार्ड पर 99 रुपये से लेकर सालाना 750 रुपये तक का चार्ज लगता है. आपका आपका डेबिट कार्ड गुम हो गया, तो बैंक नए कार्ड के लिए आपसे 200 रुपये वसूलता है.
ATM से कैश निकालने पर चार्ज: फ्री ट्रांजैक्शन लिमिट के बाद अपने या दूसरे बैंक के ATM से कैश निकाला या बैलेंस चेक किया तो भी चार्ज लगता है. RBI ने एटीएम से कैश निकालने की फ्री लिमिट तय की है. मेट्रो सिटी में अपने बैंक के एटीएम से 5 बार, दूसरे बैंक के एटीएम से 5 बार फ्री में कैश निकाल सकते हैं. इससे अधिक बार एटीएम से कैश विड्रॉल करने पर आपको 8 से 20 रुपये का चार्ज कैश निकालने, बैलेंस चेक करने, मिनी स्टेटमेंट निकालने पर भरना होगा. इसके अलावा डेबिट कार्ड की सालाना शुल्क 100 से 500 रुपये वसूली जाती है. यहां तक कि ATM PIN रीसेट करने पर भी आपको चार्ज भरना होगा.
चेक पर भी चार्ज: चेक बाउंस होने, ज्यादा चेकबुक पन्ने या चेक सर्विस लेने पर भी बैंक चार्ज वसूलती है. चेक क्लीयरेंस के लिए भी आपको कई बार चार्ज लेना पड़ता है. ये चार्ज चेक में भरी गई रकम पर निर्भर करता है.
कैश जमा करने/निकालने पर चार्ज : तय सीमा से ज्यादा कैश ट्रांजैक्शन करने पर बैंक शुल्क वसूलते हैं. ये सीमा अलग-अलग बैंक खातों के लिए अलग-अलग होती है. तय सीमा से अधिक कैश जमा करने या निकालने पर आपको 50 से 150 रुपये तक का शुल्क जमा करना पड़ सकता है.
SMS अलर्ट का चार्ज: बैंक मोबाइल पर ट्रांजैक्शन अलर्ट के लिए, जो SMS नोटिफिकेशन भेजती है, उसपर भी फीस लेती है.बैंक हर महीने आपसे 15-20 रुपये इस मैसेज भेजने के एवज में वसूलती है.
फंड ट्रांजैक्शन पर भी शुल्क: NEFT/RTGS/IMPS से ट्रांजैक्शन करने पर चार्ज लगता है.
अकाउंट बंद करने पर भी चार्ज : कुछ परिस्थितियों में खाता जल्दी बंद करने पर बैंक ग्राहकों से शुल्क वसूलता है.
लोन लेने पर, जल्दी खत्म करने पर भी चार्ज: लोने लेने पर प्रोसेसिंग फीस, सर्विस चार्ज और जल्दी खत्म करने पर प्री-क्लोजर चार्ज लगता है.
बैंक स्टेटमेंट निकालने पर चार्ज: बैंक स्टेटमेंट निकालने के लिए भी आपको 50 से 100 रुपये तक की फीस भरनी पड़ती है.
बैंक खाते में मोबाइल नंबर-ईमेल अपडेट करवाना भी फ्री नहीं: बैंक खाते में अगर आप अपना मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी बदलवाते हैं, तो भी चार्ज लगेगा. SBI इसके लिए 50 रुपये वसूलता है. जबकि साइन ऑथराइजेशन के लिए 100 रुपये की फीस भरनी पड़ती है.
सर्विस कम, चार्ज ज्यादा
बैंकों की ओर से समय-समय पर सर्विस में अपडेट की जाती है. SBI ने 1 अक्टूबर 2026 से सैलरी खाताधारकों को दूसरे बैंक के एटीएम पर हर महीने 10 की जगह सिर्फ 5 फ्री ट्रांजैक्शन कर दिया. एक्सिस बैंक ने अपने प्रीमियम क्रेडिट कार्ड के फायदे घटा दिए. उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक ने SMS अलर्ट को बढ़ाकर 30 पैसे कर दिए.
बैंक जमा पर घटते फायदे, बढ़ता शुल्क
FD यानी फिक्स्ड डिपॉजिट, जिसमें आप अपना पैसा निश्चित अवधि के लिए बैंकों के पास रखते हैं, उसपर बीते कुछ सालों से इंटरेस्ट घटता जा रहा है. देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक, प्राइवेट बैंक की ओर से FD के इंटरेस्ट रेट्स में बड़े बदलाव किए जा रहे हैं. हाल ही में एक बार फिर से SBI ने अपने FD रेट्स को घटा दिए हैं. बैंकों की ओर से कम रिटर्न के ऑफर के चलते एफडी को लेकर लोगों की दिलचस्पी कम हो रही है. बैंकों से मिलने वाले फायदे घट रहे हैं और खर्चे और शुल्क बढ़ते जा रहे हैं.