YouTube के फ्री वाले ‘मास्टर साब’ के आगे क्यों टिक पा रही करोड़ों की एडटेक कंपनियां, BYJU’S से Unacademy तक कैसे हुए फ्लॉप?
Edtech In India: पहले FIITJEE, फिर बायजू, अब अनएकेडमी...एक के बाद एक भारत में एडटेक स्टार्टअप्स फ्लॉप हो क्यों रहे हैं? क्यों यूनिकॉर्न बनने के बाद भी ये कंपनियां टिक नहीं पा रही हैं?
Edtech Ecosystem: इंजीनियरिंग और मेडिकल की तैयारी करवाने वाली चर्चित कोचिंग संस्थान फ़िटजी (FIITJEE) के दर्जनों सेंटर रातों-रात बंद हो गए. कभी शाहरूख खान और लियोनेल मेस्सी को अपना ब्रांड एबेंसडर बनाने वाली ऑनलाइन कोचिंग सेंटर Byju's (बायजू) की हालत किसी से नहीं छिपी, कंपनी और कंपनी के मालिक बायजू रविंद्रन दोनों ही दिवालिया हो चुके हैं. नीट और जेईई की तैयारी करवानी वाली कोचिंग सेंटर Aakash Institute की हालात इतनी बिगड़ी कि साल 2021 में उसे बेचना पड़ा. अब एनअकेडमी (Unacademy) का भी वहीं हाल हुआ है. 1900 करोड़ रुपये में ये एडटेक कंपनी UpGrad के हाथों बिक गई. ये बस कुछ पॉपुलर एडटेक स्टार्टअप्स के नाम नाम हैं, जो बीते कुछ सालों में अर्श से फर्श पर पहुंच चुकी हैं. आंकड़े बताते हैं कि बीते 5 सालों में 2,148 एडटेक स्टार्टअप्स बंद हुए हैं. QuizMind, Vedu Academy और Tribac Blue जैसे कई नाम इस लिस्ट में शामिल हैं.
अब सवाल यह है कि आखिर भारत में एडटेक कंपनियां क्यों फ्लॉप हो रही है? क्या भारत में एडटेक कंपनियों के लिए सही इकोसिस्टम क्रिएट नहीं हो पा रहा है ? एक के बाद एक एडटेक स्टार्टअप्स के फ्लॉप होने में सबसे बड़ा कॉमन फैक्टर क्या है? आज इसी सेक्टर को डिकोड करने की कोशिश करते हैं...
भारत में एडटेक की शुरुआत, तेजी और बूम का दौर
भारत में पहली बार 1994 में एडटेक स्टार्टअप एडुकंप सॉल्यूशंस (Educomp Solutions) ने स्मार्ट क्लास'और डिजिटल एजुकेशन की शुरुआत की थी. डिजिटल भारत और सस्ते इंटरनेट ने इसे बूस्ट दिया. साल 2015 से 2020 तक ऑनलाइन और डिजिटल एजुकेशन सिस्टम अपने बूम पर था. गावं-गांव तक इंटरनेट पहुंच रहा था और पीछे-पीछे मोबाइल पर पढ़ाने वाले टीचर्स. साल 2015 में भारत में 1000 से अधिक एडटेक कंपनियां पहुंच चुकी थी. हालांकि इस सेक्टर को लोकप्रियता साल 2018 में बायजू (BYJU'S) के आने के बाद मिली है. भारत की पहली एडटेक यूनिकॉर्न (1 अरब डॉलर से अधिक मूल्य वाली कंपनी) बनकर इसने सबका ध्यान खींच लिया. इसके बाद अनएकेडमी, अपग्रेड, फिजिक्स वाला जैसी तमाम कंपनियां सामने आईं.
भारत में डिजिटल लर्निंग का इकोसिस्टम
भारत अमेरिका के बाद दूसरा सबसे बड़ा ई-लर्निंग मार्केट है. साल 2024 में भारत की एडटेक इंडस्ट्री की वैल्यूएशन 12.75 अरब डॉलर तक पहुंच गया. साल 2035 तक ये 61.25 अरब डॉलर पर पहुंचने का अनुमान है. ऐसे में दिमाग में एक सवाल जरूर उठता है कि जब डिमांड और मार्केट इतना बड़ा है, तो एडटेक कंपनियां फ्लॉप क्यों हो रही है ? दरअसल इस मार्केट के सबसे बड़े खिलाड़ी फ्री कंटेंट देने वाले वो एजुकेटर हैं, जो यूट्यूब, फेसबुक और LinkedIn के जरिए एजुकेशन कंटेंट बनाते और शेयर करते हैं. यही फ्री कंटेंट क्रिएटर्स आज एडटेक कंपनियों के लिए बड़ा खतरा बन चुके हैं. इसे समझने से पहले समझते हैं कि कैसे कोरोना इस सेक्टर के लिए वरदान साबित हुआ.
कोरोना बना एडटेक कंपनियों के लिए वरदान
साल 2020-21 को भारत को ‘एडटेक कैपिटल ऑफ दि वर्ल्ड’ के तौर पर देखा जाने लगा. जब कोविड महामारी और लॉकडाउन की वजह से 32 करोड़ से अधिक छात्र घरों में कैद हो गए, तो यही एडटेक कंपनियां उनके लिए संजीवनी बनकर आई. ऑनलाइन क्लास, ई-लर्निंग के सॉफ्टवेयर, वर्चुअल ट्यूटोरियल की बदौलत इन कंपनियों ने 606 फीसदी का ग्रोथ हासिल कर लिया. सेक्टर खूब चमका, लेकिन लॉकडाउन और कोविड का खतरा खत्म होने की इसका ग्रोथ ग्राफ भी फिसलता चला गया.
भारत में फ्लॉप होती एडटेक कंपनियां
पहला कारण: भारत में एडटेक कंपनियां घाटे में हैं, सर्वाइवल के लिए संघर्ष कर रही हैं. बड़े पैमाने पर छंटनी हो रही है. बैलेंसशीट को संभालने की कोशिश हो रही है. इन स्टार्टअप्स के सामने सबसे बड़ा चैलेंज फंडिंग का है. साल 2021 में एडटेक को 4.73 अरब डॉलर की फंडिंग मिली थी, जो साल 2024 में घटकर सिर्फ 0.64 अरब डॉलर रह गई.
दूसरा कारण: लॉकडाउन के बाद स्कूल-कॉलेज खुलते ही एडटेक और ऑनलाइन क्लासेस का मोहभंग होने लगा. छात्र वापस से फिजिकल क्लास पहुंचने लगे.
तीसरा कारण:एडटेक कंपनियों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा के चलते कंपनियों ने मार्केटिंग पर खर्च बढ़ाया.बायजू टीम इंडिया की जर्सी पर मौजूद थी. भारी मार्केटिंग खर्च और लगातार बढ़ता घाटा कंपनियां संभाल नहीं पा रही. कंपनियों ने रेवेन्यू का 80% से अधिक खर्च ग्राहकों को लुभाने में कर दिया.
Byju का घाटा 8000 करोड़
Unacademy 1600 करोड़
Vedantu का घाटा 700 करोड़
PW का घाटा 100 करोड़
कमजोर बिजनेस मॉडल: मुफ्त या कम कीमत वाले ऑनलाइन कोर्सों में छात्रों की रुचि कम होने लगी. कंपनियों ने हाइब्रिड मोड अपनाया. ऑनलाइन के साथ-साथ ऑफलाइन क्लासेस शुरू किए गए, लेकिन कमजोर बिजनेस मॉडल को सफल नहीं बना सकी.
सरकारी सख्ती: सरकार ने ऑनलाइन कोचिंग सेंटर्स के भ्रामक विज्ञापनों और अनुचित बिजनेस प्रैक्टिस पर सख्ती दिखाई.
लोगों का सेंटीमेंट: माता-पिता के बीच ये सेंटीमेंट बनने लगा कि बच्चे ऑनलाइन क्लासेस में सीरियस नहीं होते. भारत में पारंपरिक शिक्षा ही फोकस में रहा है. लॉकडाउन के समय इस सेक्टर में बूम आया, क्योंकि लोगों के पास ऑफलाइन क्लास के ऑप्शन नहीं थे.
फ्री ऑनलाइन क्रंटेंट क्रिएटर: भारत में 35 करोड़ से अधिक छात्र है और बड़ा एजुकेशन हब है, बावजूद इसके एडटेक स्टार्टअप्स हांफ रही है. जब यूट्यूब पर फ्री ऑनलाइन कंटेंट से वहीं चीज सीखने को मिल रही है, तो कोई भी ऐप डाउनलोड और कोर्स पर पैसे खर्च कर ऑनलाइन पढ़ना नहीं चाहता है. फिजिक्स वाला आज भी इसलिए टिके हैं, क्योंकि उन्होंने अपने यूट्यूब मॉडल को खत्म नहीं किया है. यूट्यूब पर फ्री में पढ़ाने वाले चैनलों के पास मिलियन्स में सब्सक्राइबर्स हैं.
Byju, FIITJEE, अनएकेडमी क्यों हुई बर्बाद ?
Byju's पर उसकी गलतियां भारी पड़ी. 22 अरब डॉलर की कंपनी बन चुकी कंपनी के फाउंडर रविंद्रन बायजू के गलत फैसले भी उसकी बर्बादी के लिए जिम्मेदार है. आगे बढ़ने की जल्दीबादी में कंपनी ने आकाश, व्हाइटहाउस एचआर जैसी कंपनियां का अधिग्रहण किया. देशभर में कोचिंग सेंटर्स और ऑफिस खोलकर लागत बढ़ा ली.आज कंपनी दिवालिया होने के कगार पर पहुंच चुकी है.
FIITJEE के बर्बाद होने की सबसे बड़ी वजह खराब फाइनेंशियल मैनेंजमेंट है. शिक्षकों को सैलरी न देना. कोचिंग सेंटर्स के पैसों को दूसरे व्यवसाय में लगाने के चलते जनवरी 2025 में देश भर के फिटजी के कई कोचिंग सेंटर्स का अचानक बंद हो गए.
Unacademy के पिछने के पीछे खराब मैनेजमेंट अंधाधुंध अधिग्रहण सबसे बड़ी वजह रहा. कोविड के दौरान मिली फंडिंग का अधिकांश हिस्सा कंपनी ने कई छोटी-बड़ी कंपनियों (जैसे WiFiStudy) के अधिग्रहण पर खर्च कर दिया. जिससे उसका फोकस कोर प्रोडक्ट से भटक गया. साल 2022 में कंपनी ने IPL की स्पॉन्सरशिप की, मार्केटिंग पर करोड़ों रुपये खर्च कर दिए. कंपनी ने भारी-भरकम खर्चे पर ऑफलाइन कोचिंग सेंटर खोले, जो घाटे का सौदा साबित हुआ. आज कंपनी 1900 करोड़ में अपग्रेड के हाथों बिक गई.