DNA: मिड टर्म चुनाव में मस्क ने झोंका खजाना, ट्रंप के राष्ट्रपति बनते ही कैसे चमकी इन दोनों की किस्मत?
एलन मस्क ने ट्रंप के मिडटर्म चुनाव अभियान में रिकॉर्ड 3,500 करोड़ रुपये से अधिक का चंदा दिया है. इसके बदले उनकी कंपनियों (स्पेसएक्स और स्टारलिंक) को भारी सरकारी ठेके मिले और उनकी संपत्ति बढ़कर 1 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंच गई है.
DNA : मिडिल ईस्ट में होने वाली हर जंग इजरायल के लिए मौक़ा है. वहीं, अमेरिका में होने वाला मिड टर्म इलेक्शन. दुनिया के सबसे अमीर कारोबारी एलन मस्क के लिए निवेश का एक मौक़ा है. इस बार के मध्यावधि चुनाव में मस्क अपने दोस्त ट्रंप की जीत के लिए जमकर पैसा बहा रहे हैं और जो पैसा वो लगा रहे हैं. उसका कई गुना वसूल करने का प्लान भी उन्होंने तैयार कर रखा है.
मिड टर्म चुनाव में मस्क ने कितना पैसा लगाया है?
ट्रंप पर पैसा लगाने के बाद मस्क की दौलत में कितनी बढ़ोतरी हुई है? राष्ट्रपति बनने के बाद ट्रंप का परिवार कितना अमीर हुआ है? आपको ये भी जानना चाहिए कि जिस वक़्त ट्रंप और मस्क की दौलत बढ़ रही है, उसी समय अमेरिका कैसे कर्ज के बोझ में दब गया है.
लेकिन, सबसे पहले ट्रंप के चुनावी अभियान में मस्क के निवेश का आंकड़ा देखिए. अमेरिका में मिड टर्म इलेक्शन नवंबर के पहले हफ़्ते में है. इसमें अमेरिकी संसद और राज्यों की सरकार के लिए मतदान होने वाला है. ये चुनाव ट्रंप के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अगर ट्रंप की विरोधी डेमोक्रेटिक पार्टी की जीत हुई तो ट्रंप के लिए नए क़ानून बनाना या बजट पास कराना बेहद मुश्किल हो जाएगा.
यही वजह है कि ट्रंप ने चुनाव के लिए पूरी ताक़त झोंक रखी है. जीत के लिए ट्रंप जहां अलग-अलग राज्यों में चुनाव प्रचार कर रहे हैं. वहीं उनके क़रीबी मस्क ने अपना ख़ज़ाना खोल रखा है. ट्रंप की चुनावी मदद के लिए वो इतना पैसा खर्च कर रहे हैं, जितने में वो कोई नया बिजनेस भी शुरू कर सकते थे.
3 महीने में रिपब्लिकन पार्टी को 2600 करोड़ रुपए से ज्यादा चंदा
मस्क ने जुलाई से सितंबर तक यानी 3 महीने में रिपब्लिकन पार्टी को 276 मिलियन डॉलर यानी करीब 2,600 करोड़ रुपए से ज्यादा चंदा दिया है. इतना पैसा आज तक किसी कारोबारी या कंपनी ने मिडटर्म चुनाव में खर्च नहीं किया था. मस्क ने राष्ट्रपति चुनाव के बाद कुल मिलाकर रिपब्लिकन पार्टी को 366 मिलियन डॉलर यानी क़रीब 3500 करोड़ रुपए दिए हैं. इतना पैसा मस्क ने राष्ट्रपति चुनाव अभियान के दौरान भी रिपब्लिकन पार्टी को नहीं दिया था.
उस वक़्त ट्रंप के चुनाव अभियान के दौरान मस्क ने 290 मिलियन डॉलर यानी करीब 2,800 करोड़ रुपये खर्च किए थे यानी राष्ट्रपति चुनाव से भी ज़्यादा पैसा मस्क मिड टर्म चुनाव में ट्रंप की पार्टी को जिताने के लिए खर्च कर रहे हैं. इस पैसे के सहारे उन राज्यों में रिपब्लिकन पार्टी के कैंपेन को मदद मिली है, जहां उसे डेमोक्रेटिक पार्टी से कड़ी टक्कर मिल रही है.
मस्क जैसे कारोबारी ट्रंप से दोस्ती या किसी विचारधारा की वजह से अपना पैसा किसी पार्टी में नहीं लगाते. इस पैसे के बदले भी वो भरपूर मुनाफ़े की उम्मीद करते हैं. मस्क ने इस निवेश की कितनी क़ीमत वसूली है. सबसे बड़ा फायदा ये हुआ है कि मस्क की कंपनी को अमेरिकी सरकार से अरबों डॉलर के ठेके मिले हैं.
2026 में मस्क की कंपनी स्पेस एक्स को अमेरिकी स्पेस फोर्स से क़रीब 8 अरब डॉलर यानी करीब 76,000 करोड़ का डिफेंस कॉन्ट्रैक्ट मिला है. मस्क की सैटेलाइट इंटरनेट कंपनी स्टारलिंक को अमेरिकी सरकार के 42 बिलियन डॉलर के ब्रॉडबैंड फंड के लिए योग्य घोषित किया गया. पहले स्टारलिंक को इससे बाहर रखा गया था.
ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद मस्क की कंपनी के ख़िलाफ प्रदूषण और श्रम क़ानून के उल्लंघन को लेकर जो जांच चल रही थी, उन्हें या तो बंद कर दिया गया या जांच धीमी कर दी गई. इससे मस्क को 2 अरब डॉलर यानी 19,000 करोड़ रुपये के जुर्माने से छुटकारा मिला.
मस्क को मिले सरकारी कॉन्ट्रैक्ट
संक्षेप में कहें तो ट्रंप के राष्ट्रपति बनने से मस्क को सरकारी कॉन्ट्रैक्ट तो मिले ही, साथ ही अमेरिकी सरकार की नीतियों और फैसलों को अपने कारोबार के हिसाब से मोड़ने की अभूतपूर्व ताकत भी हासिल हुई है.अमेरिकी प्रशासन के फैसलों में मस्क का दबदबा बढ़ा है.इसी दबदबे की वजह से मस्क का खज़ाना भी भर गया है. नवंबर 2024 में जब ट्रंप दोबारा अमेरिका के राष्ट्रपति चुने गए. उस वक़्त मस्क की कुल संपत्ति 286 अरब डॉलर के करीब थी.
लेकिन, 2 साल से भी कम समय में मस्क की संपत्ति लगभग 4 गुना हो गई. मस्क दुनिया के पहले ट्रिलियनेयर यानी खरबपति बन गए हैं. जून में स्पेस एक्स के शेयर बाज़ार में लिस्ट होने के बाद मस्क की कुल संपत्ति 1.1 ट्रिलियन डॉलर यानी 1100 अरब डॉलर के पार चली गई. मौजूदा समय में भी मस्क की कुल संपत्ति 1 ट्रिलियन डॉलर के आसपास है. इस तरह ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद मस्क की कुल संपत्ति 700 अरब डॉलर से ज़्यादा बढ़ी है. यानी 65 लाख करोड़ से ज़्यादा.
ये रकम भारत के सालाना बजट से भी ज़्यादा है. भारत का मौजूदा बजट लगभग 53 लाख करोड़ रुपये का है. ये स्वीडन जैसे अमीर देश की अर्थव्यवस्था के लगभग बराबर है. और ये मस्क की कुल संपत्ति नहीं बल्कि कुल संपत्ति में केवल 2 साल के भीतर बढ़ोतरी है. इसी का नतीजा है कि ट्रंप को जिताने के लिए मस्क सिर्फ बेहिसाब पैसा खर्च नहीं कर रहे, बल्कि उनकी टीम के 3000 लोग घर-घर जाकर मतदाताओं से संपर्क भी कर रहे हैं. इस मेहनत की एक और वजह है.
मिड टर्म चुनाव सिर्फ ट्रंप की अग्निपरीक्षा नहीं है. बल्कि दांव पर मस्क का कारोबार भी लगा हुआ है. डेमोक्रेटिक पार्टी मस्क को मिले सरकारी ठेकों की जांच कराने की बात कह रही है. ऐसे में अगर ट्रंप की पार्टी हारी तो मस्क को भी अपने खज़ाने से हाथ धोना पड़ेगा. यही वजह है कि वो जी-जान से जुटे हुए हैं. हालांकि राष्ट्रपति चुनाव से लेकर अब तक मस्क के प्रचार करने के तरीक़ों में थोड़ा बदलाव आया है.
खुलकर ट्रम्प के समर्थन में प्रचार करते थे मस्क
2024 के राष्ट्रपति चुनाव के दौरान मस्क खुलकर ट्रम्प के समर्थन में प्रचार करते थे. लेकिन, मिड टर्म चुनाव में उनका तरीक़ा बदल गया है. इस बार वो ख़ुद सामने आकर प्रचार करने के बजाय पर्दे के पीछे से काम कर रहे हैं. 2024 में मस्क चुनावी रैलियों में शामिल होते थे. लेकिन अब उन्होंने प्रचार की ज़िम्मेदारी अपने संगठन और सलाहकारों को सौंप दी है.
राष्ट्रपति चुनाव के समय वो सोशल मीडिया पर लगातार पोस्ट करते थे. लेकिन, मिड टर्म चुनाव में वो 2024 की तरह एक्टिव नहीं हैं. मस्क अब एक एक्टिविस्ट की भूमिका से बाहर निकलकर फाइनेंसर की तरह काम कर रहे हैं, जहां उनका पैसा बोल रहा है.
कमाई और संपत्ति बढ़ाने के मामले में ट्रंप और उनका परिवार भी पीछे नहीं है. ट्रंप ने अपने बेटों और दामाद को फायदा पहुंचाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी है. ईरान युद्ध के असर से जब अमेरिका समेत पूरी दुनिया को आर्थिक नुक़सान हो रहा है, उस वक़्त ट्रंप ने कई बार युद्ध को लेकर बयान देकर अपने परिवार को फायदा पहुंचाया.
युद्ध का इस्तेमाल अपने बेटे की कंपनी को हथियारों का ठेका दिलवाने में किया. दूसरे देशों से कूटनीतिक संबंध इस आधार पर तय किए जा रहे हैं कि उनके बेटे की कंपनी को कितना फायदा होगा. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक़ ट्रंप और उनके बेटों ने क्रिप्टो के कारोबार से परिवार की संपत्ति में 2 अरब डॉलर से ज़्यादा यानी 22,000 करोड़ रुपये जोड़े. डॉनल्ड ट्रंप जूनियर और एरिक ट्रंप से जुड़ी कंपनियों को 3 अरब डॉलर यानी 28,000 करोड़ रुपये के सरकारी कॉन्ट्रैक्ट मिले.
पाकिस्तान से ड्रोन की सप्लाई का ठेका
ट्रंप के बेटों से जुड़ी कंपनी पावरअस को पाकिस्तान से ड्रोन की सप्लाई का ठेका मिला है, साथ ही ट्रंप के परिवार से जुड़ी क्रिप्टो कंपनी वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल ने भी पाकिस्तान के साथ एक वित्तीय समझौता किया. वहीं, ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर को एफिनिटी पार्टनर में सऊदी अरब, UAE और क़तर समेत दूसरे देशों की कंपनियों ने क़रीब 6 अरब डॉलर यानी 57,000 करोड़ रुपये लगाए हैं.
जेरेड कुशनर यूरोपीय देश अल्बानिया में एक आलीशान रिजॉर्ट बनवा रहे हैं जिसकी लागत डेढ़ अरब डॉलर यानी 14,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा हैn यानी ट्रंप सिर्फ मस्क का ख्याल ही नहीं रख रहे, बल्कि अपना और अपने परिवार की दौलत बढ़ाने में भी लगे हैं. इसी का नतीजा है कि राष्ट्रपति चुनाव जीतने के बाद ट्रंप की संपत्ति में 61% की बढ़ोतरी हुई है.
चुनाव जीतने के समय ट्रंप की कुल संपत्ति 4.3 अरब डॉलर यानी 41 हज़ार करोड़ रुपये के आसपास थी. ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक़ ट्रंप की संपत्ति बढ़कर 7 अरब डॉलर यानी 66,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा हो गई है.यूनान के महान दार्शनिक सुकरात ने कहा था- एक सच्चा शासक कभी भी अपने निजी लाभ के लिए शासन नहीं करता, बल्कि वो हमेशा अपनी प्रजा के हित और कल्याण के लिए नीतियां बनाता है. लेकिन, ट्रंप के लिए इस सिद्धांत का कोई मतलब नहीं है. अमेरिका के लोग भले ही महंगाई से परेशान हों लेकिन ट्रंप की नीतियों का मक़सद अपने परिवार और अपने क़रीबी मस्क की जेब भरना है.
अमेरिका कर्ज में डूबता जा रहा है!
ट्रंप और मस्क की जोड़ी जितनी अमीर होती जा रही है, अमेरिका..उतना ही कर्ज में डूबता जा रहा है. ट्रंप के शासनकाल में अमेरिका कैसे कर्ज का नया रिकॉर्ड बना रहा है. ये अब आपको जानना चाहिए. अमेरिका पर इस समय सबसे ज़्यादा कर्ज है. इतिहास में पहली बार अगस्त के महीने में अमेरिका का कर्ज 40 ट्रिलियन डॉलर के पार चला गया था.
हर हफ़्ते इसमें बढ़ोतरी का सिलसिला भी जारी है. अगर इस कर्ज को अमेरिका के सभी नागरिकों में बराबर बांटा जाए तो हर अमेरिकी पर लगभग 1 लाख 20 हज़ार डॉलर यानी 1 करोड़ रुपये से ज़्यादा का कर्ज़ बैठता है. अब इस कर्ज में ट्रंप के कार्यकाल का योगदान भी जानना चाहिए. ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान कर्ज करीब 8 ट्रिलियन डॉलर बढ़ा. जनवरी 2025 में दोबारा अमेरिका का राष्ट्रपति बनने के बाद अमेरिका का कर्ज करीब 4 ट्रिलियन डॉलर बढ़ा है.
इस तरह ट्रंप के राष्ट्रपति रहने के दौरान ही अमेरिका का कर्ज लगभग 12 ट्रिलियन डॉलर बढ़ गया. अमेरिका के कुल कर्ज में 30% योगदान अकेले ट्रंप के कार्यकाल का है यानी ट्रंप ने अमेरिका को कर्ज के जाल में फंसा रखा है. दूसरी तरफ ट्रंप और उनको चंदा देने वाले मस्क की दौलत में लगातार इज़ाफ़ा हो रहा है. लेकिन मस्क का करोड़ों डॉलर का चंदा भी ट्रंप को जिता पाएगा, इस पर सवाल है. अमेरिकी मीडिया की रिपोर्ट्स के मुताबिक, चुनाव में ट्रंप की विरोधी पार्टी यानी डेमोक्रेट्स के जीतने की संभावना 90% से ज़्यादा है और ये न सिर्फ ट्रंप बल्कि मस्क के लिए भी बुरी खबर है.