'विदेशी मानसिकता वाले भारतीयता को नहीं समझ सकते', विजय सिन्हा का राहुल गांधी पर तंज
विजय सिन्हा ने लखीसराय की राजनीति, कश्मीर मुद्दे और राष्ट्रवाद पर अपनी बात रखी. उन्होंने फारूक अब्दुल्ला के बयान पर सवाल उठाए और राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए मातृभूमि के सम्मान और भारतीयता को लेकर तीखी टिप्पणी की.
विजय सिन्हा ने कहा कि उन्होंने लखीसराय की धरती से राजनीति की है और वहां कई मोस्ट वांटेड अपराधियों के बीच चुनाव लड़ा है. रंगदारों, ठेकेदारों और दलालों के विरोध के बावजूद जनता उन्हें चुनकर भेजती है. उन्होंने कहा कि उन पर न भय का असर पड़ता है और न लोभ का. वे सभी अच्छे लोगों का सम्मान करते हैं. खासकर संबंधों की मर्यादा और गठबंधन की भावना का सम्मान करते हुए सहयोगी पार्टी के साथ बेहतर संबंध बनाए रखने का प्रयास करते हैं.
फारूक अब्दुल्ला के बयान पर विजय सिन्हा ने उठाए सवाल
कश्मीर मुद्दे पर फारूक अब्दुल्ला के बयान को लेकर विजय सिन्हा ने सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि कश्मीर का मुद्दा अभी भी जीवित है और केंद्र सरकार की मंशा स्पष्ट नहीं होने की बात कही जा रही है. उन्होंने सवाल किया कि क्या फारूक अब्दुल्ला ने पहली बार इस तरह का बयान दिया है? उनके मुताबिक, कश्मीर जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर राजनीतिक बयानों को गंभीरता से समझने की जरूरत है.
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राष्ट्र और मातृभूमि के सम्मान पर विजय सिन्हा का बयान
विजय सिन्हा ने राष्ट्र और मातृभूमि के प्रति सम्मान पर कहा कि जो लोग मौसम के हिसाब से विचारधारा बदलते हैं और अपने राष्ट्र को स्वीकार नहीं कर पाते, वे देश में अराजकता का माहौल बनाने तथा भारत को धर्मशाला बनाने का प्रयास करते हैं. उन्होंने कहा कि ऐसी मानसिकता रखने वालों को आने वाली पीढ़ियां माफ नहीं करेंगी. उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत माता की धरती पर जन्म लेने वाले हर व्यक्ति को अपनी मातृभूमि पर गर्व होना चाहिए. धर्म, जाति, क्षेत्र या भाषा चाहे कुछ भी हो, हर व्यक्ति को देश के मान-सम्मान और स्वाभिमान की रक्षा के लिए बलिदान देने को तैयार रहना चाहिए.
विदेशी मानसिकता को लेकर टिप्पणी
उन्होंने कहा कि देश के साथ गद्दारी करने वालों को इतिहास में कभी सम्मान नहीं मिला है. विजय सिन्हा ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे विदेशी लोगों के इशारे पर अपना विश्वास खो चुके हैं. उन्होंने कहा कि विदेशी संस्कृति की मानसिकता में पले-बढ़े लोग भारतीयता को स्वीकार नहीं कर पाते. उनके मुताबिक, ऐसी मानसिकता रखने वालों को भारत माता की संतान कभी स्वीकार नहीं करेगी. उन्होंने राष्ट्र के प्रति निष्ठा, मातृभूमि के सम्मान और भारतीय संस्कृति को स्वीकार करने की आवश्यकता पर जोर दिया.
रिपोर्ट: सन्नी कुमार