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सारण शिक्षक MLC सीट पर 11 प्रत्याशियों को नहीं मिले 10 वोट भी, 4 के खाते में आया जीरो, 10 लोग बने थे प्रस्तावक

सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में 18 प्रत्याशी चुनावी मैदान में थे, जिनमें से 11 को 10 से कम वोट मिले हैं. जबकि, 10 लोग प्रस्तावक होते हैं. मतलब प्रस्तावकों ने भी वोट नहीं दिया गया है. यह चुनावी नतीजा सोशल मीडिया पर खूब चर्चाओं में है.

Written By Shailendra
Published: Oct 29, 2026, 10:22 PM IST | Updated: Oct 29, 2026, 10:34 PM IST
Image Credit: सारण की चुनावी रेस में 11 उम्मीदवारों का निकला दम (Photo-AI)
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बिहार विधान परिषद चुनाव में इस बार कुछ ऐसा हुआ कि हर कोई हैरान है. इतना ही नहीं, सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में कुछ प्रत्याशियों के साथ ऐसा हुआ कि खुद पर ही यकीन नहीं हो पा रहा है. वह सोच रहे होंगे कि आखिर ऐसा कैसे हो सकता है? मेरे साथ के लोगों ने, मेरे चहते ने ही मुझे गच्चा यानी धोखा दे दिया. अब आपके मन में यह ख्याल आ रहा होगा कि हुआ क्या? जो इतनी भूमिका बनाई जा रही है. तो चलिए बिना देरी किए आप पूरा आर्टिकल पढ़िए सारी कहानी आपको नीचे पता चल जाएगी. बस पढ़ते जाइए.  

दरअसल, सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के नतीजे सिर्फ डॉ. राहुल राज की जीत के लिए ही याद नहीं रखे जाएंगे, बल्कि इस चुनाव ने एक ऐसा अनोखा चुनावी किस्सा सामने ला दिया है, जो लंबे समय तक चर्चा में रहेगा. हुआ कुछ यूं कि सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में 18 प्रत्याशियों के इस मुकाबले में 11 ऐसे रहे जो दहाई यानी 10 वोट का आंकड़ा तक भी नहीं छू सके. सबसे दिलचस्प बात यह रही कि 4 उम्मीदवारों के खाते में पहली वरीयता का एक भी वोट नहीं आया यानी सीधे-सीधे शून्य.

इन प्रत्याशियों को सदमा तब लगा, जब इनको पता चला कि प्रस्तावकों ने भी इनको वोट नहीं दिया. अब अब यहीं से गणित थोड़ा पेचीदा और मजेदार हो जाता है. नियम के अनुसार, विधान परिषद के शिक्षक क्षेत्र में पर्चा दाखिल करने के लिए कम से कम 10 मतदाताओं का प्रस्तावक बनना जरूरी है. इसका मतलब हुआ कि नामांकन के वक्त इन 4 प्रत्याशियों के साथ कागजों पर कम से कम 10 लोग खड़े थे. फिर भी जब पेटियां खुलीं, तो पहली वरीयता का एक भी वोट नहीं निकला.

अब सवाल ये कि क्या प्रस्तावकों ने ही गच्चा दे दिया?

जैसा हम समझ रहे हैं सच्चाई इतनी सीधी नहीं है. इसके पीछे का कहानी कुछ और होता है. दरअसल, बैलेट पेपर और गुप्त मतदान का तरीका ही कुछ ऐसा होता है कि पर्दे के पीछे क्या हुआ, यह दावे से नहीं कहा जा सकता. प्रत्याशी का प्रस्तावक बनने का मतलब यह कतई नहीं होता कि वोट भी उसी को जाएगा. मुमकिन है कि कागज पर दस्तखत करने वाले वोटर ने बूथ पर जाकर अपनी पहली पसंद किसी और को चुना हो या फिर दूसरी वरीयता में नाम दर्ज किया हो.

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शैलेंद्र जी न्यूज के रीजनल चैनल, जी बिहार झारखंड की डिजिटल टीम में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम करते हैं. वह बिहार और झारखंड की सियासत और क्राइम समेत कई समसामयिक मुद्दों पर न्यूज लिखते हैं. वह कभी-कभी राष्ट्रीय मुद्दों पर भी लिखते हैं. उनको मीडिया के तीनों प्रारूप प्रिंट, टेलीविजन और डिजिटल में काम करने का अनुभव. जनसंदेश टाइम्स, स्वतंत्र चेतना, टीवी 100, साधना न्यूज, एफएम न्यूज आदि न्यूज चैनलों से होते हुए न्यूज नेशन, इंडिया अहेड, ईटीवी भारत और न्यूज स्ट्रीट मीडिया (NYOOOZ) में अहम जिम्मेदारी निभाई. मीडिया जगत में सफर पिछले 12 सालों से बिना रुके जारी है.
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