मुजफ्फरपुर PNG ब्लास्ट मामला: IOCL के CMD समेत 11 पर कोर्ट में परिवाद दर्ज, 20 नवंबर को होगी सुनवाई
गोबरसही PNG ब्लास्ट का मामला न्यायालय पहुंचा गया है. मामले में IOCL के बड़े अधिकारियों समेत 11 को आरोपी बनाया है. कोर्ट ने मामले को दर्ज कर सुनवाई के लिए 20 नवंबर की तारीख मुकर्रर की है.
मुजफ्फरपुर के गोबरसही-डुमरी रोड पर हुए पीएनजी गैस पाइपलाइन ब्लास्ट का मामला अब न्यायालय में पहुंच गया है. मामले में इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (IOCL) के बड़े अधिकारियों समेत 11 लोगों को आरोपी बनाया गया है. कोर्ट ने मामले को दर्ज कर सुनवाई के लिए 20 नवंबर की तारीख मुकर्रर की है. इस मामले के पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए मुजफ्फरपुर सिविल कोर्ट के अधिवक्ता सुशील कुमार सिंह ने न्यायालय में परिवाद दाखिल किया है.
न्यायालय में दाखिल परिवाद में IOCL के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक, बिहार राज्य प्रमुख, पीएनजी प्रोजेक्ट हेड और तकनीकी-सुरक्षा अधिकारियों के अलावा पथ निर्माण विभाग के अभियंताओं, नाला निर्माण एजेंसी के प्रोपराइटर और जेसीबी चालक को आरोपी बनाया गया है. न्यायालय में दर्ज परिवाद में घटना को गंभीर लापरवाही का नतीजा बताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच और आपराधिक कार्रवाई की मांग की गई है.
मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के न्यायालय में दर्ज परिवाद के अनुसार, 2 नवंबर 2026 को दोपहर करीब 12:20 बजे गोबरसही-डुमरी रोड पर नाला निर्माण के दौरान जेसीबी से खुदाई की जा रही थी. इसी दौरान भूमिगत PNG गैस पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो गई और गैस का रिसाव शुरू हो गया.
दर्ज परिवाद पत्र में अधिवक्ता का आरोप है कि करीब 45 मिनट तक गैस रिसाव होता रहा, लेकिन संबंधित अधिकारियों और एजेंसियों की ओर से समय रहते सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए. इसके बाद गैस में आग लगने से भीषण विस्फोट हुआ और इस घटना में एक व्यक्ति की मौत हुई, जबकि एक दर्जन से ऊपर लोग घायल हो गए और आसपास की दुकानों, मकानों, वाहनों और अन्य संपत्तियों को भी भारी नुकसान पहुंचा.
अधिवक्ता सुशील कुमार ने कहा कि पाइपलाइन के आसपास खुदाई से पहले गैस कंपनी से नक्शा, पाइपलाइन की वास्तविक स्थिति, गहराई और सुरक्षा संबंधी निर्देश की जानकारी नहीं ली गई थी, साथ ही निर्माण एजेंसी और पथ निर्माण विभाग के अधिकारियों ने भी आवश्यक अनुमति और सुरक्षा प्रक्रिया सुनिश्चित नहीं की.
उन्होंने कहा कि मुसहरी के प्रखंड विकास पदाधिकारी की ओर से सदर थाने में प्राथमिकी दर्ज है, जिसमें एक ठेकेदार और एक जेसीबी चालक को आरोपी बनाया गया है, जिससे आशंका है कि जांच केवल मौके पर काम करने वाले कर्मचारियों और निर्माण एजेंसी तक सीमित रह सकती है, लेकिन उनकी मांग है कि इसमें निर्णय लेने और निगरानी की जिम्मेदारी निभाने वाले बड़े अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कराई जाए.
इसके साथ ही अधिवक्ता ने न्यायालय से सदर थाने में दर्ज प्राथमिकी की जांच की स्थिति रिपोर्ट तलब करने, IOCL से पाइपलाइन का नक्शा, गहराई, सुरक्षा ऑडिट, रखरखाव और निरीक्षण से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग की है. वहीं, पथ निर्माण विभाग से नाला निर्माण की प्रशासनिक और तकनीकी स्वीकृति, कार्यादेश, खुदाई की अनुमति और गैस कंपनी से मिली एनओसी की जानकारी मांगे जाने का अनुरोध किया है, ताकि इस घटना में शामिल कोई भी आरोपी बच न सके.
इसके अलावा उन्होंने मृतक के आश्रितों और घायलों को पीड़ित प्रतिकर योजना के तहत मुआवजा एवं पुनर्वास दिलाने की भी मांग की है. साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए घनी आबादी वाले इलाकों से गुजरने वाली भूमिगत PNG पाइपलाइनों का तकनीकी सुरक्षा ऑडिट कराने और निर्माण कार्य के दौरान अनिवार्य सुरक्षा प्रक्रिया लागू करने की मांग की गई है.
रिपोर्ट: मणितोष कुमार
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