बिहार विधान परिषद चुनाव: 8 में से 4 सीटों पर छा गए भूमिहार, सबसे अधिक संख्या वाले यादव समाज के हिस्से में बस एक सीट
जातिगत जनगणना जब हुआ था, तब एक नारा बहुत बुलंद हुआ था- 'जिसकी जितनी हिस्सेदारी, उसकी उतनी भागीदारी'. यह नारा देने वाले राजनीतिक दल ही इसे भूल गए हैं. या तो तब केवल राजनीति हो रही थी या अब हो रही है.
बिहार एमएलसी चुनाव में तस्वीर साफ हो गई है. 8 सीटों पर हुए चुनाव में से 7 के परिणाम जारी हो गए हैं. एक सीट पर काउंटिंग अभी चल रही है. बिहार एमएलसी चुनाव की बात करें तो सवर्णों का दबदबा कायम रहा है. सवर्णों में भी बिहार में राजनीतिक रूप से सबसे संजीदा और हकूक वाली भूमिहार जाति को सबसे अधिक सीटों पर जीत हासिल हुई है. खास बात यह है कि जातिगत जनगणना के बाद हुए विधान परिषद चुनाव में इस तरह का रिजल्ट आया है. बिहार की राजनीति में हमेशा पिछड़े और दलितों के लिए आवाज बुलंद करने की बात होती है, लेकिन विधान परिषद चुनाव में भूमिहारों ने बाजी मार ली है. भूमिहार जाति का न केवल दबदबा दिखा है, बल्कि यह एकतरफा भी दिख रहा है.
बिहार विधान परिषद की 8 सीटों पर चुनाव हुए. इनमें से 4 शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र और 4 स्नातक निर्वाचन क्षेत्र शामिल थे. इनमें से बीजेपी और राजद 2-2 सीटें जीतने में सफल रहीं. जन सुराज को एक सीट हासिल हुई है तो 2 सीटों पर निर्दलीयों ने बाजी मारी है. इनमें से 4 भूमिहारों को जीत हासिल हुई है.
पटना स्नातक सीट से राष्ट्रीय जनता दल के प्रत्याशी डॉ. संजीव कुमार ने भाजपा के नवल किशोर यादव को हराकर अपना दबदबा कायम किया है. जन सुराज पार्टी ने दरभंगा शिक्षक सीट पर काबिज कांग्रेस के मदन मोहन झा को हराकर विधान परिषद में अपना डेब्यू किया है.
8 में से 4 सीटों पर भूमिहारों का कब्जा बिहार विधान परिषद की स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की 8 सीटों पर हुए चुनाव परिणामों में भूमिहार समुदाय का एकतरफा दबदबा देखने को मिला,
भूमिहार समाज से जीत हासिल करने वाले नेताओं में पटना स्नातक सीट से जेडीयू के नीरज कुमार, पटना शिक्षक सीट से राजद के डॉ. संजीव कुमार, दरभंगा से जन सुराज पार्टी के डॉ. सुरेश प्रसाद राय के अलावा तिरहुत शिक्षक सीट से अपनी बादशाहत स्थापित करने वाले डॉ. नरेंद्र सिंह शामिल हैं.
बाकी जातियों की बात करें तो सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय राहुल राज ने जीत हासिल की है. राहुल राज राजपूत बिरादरी से आते हैं. कोसी स्नातक सीट से भाजपा के डॉ. एनके यादव ने जीत हासिल की है, जो यादव समाज से आते हैं. तिरहुत स्नातक सीट से निर्दलीय वंशीधर ब्रजवासी ने जीत हासिल की है, जो मल्लाह समाज से आते हैं.
इस तरह विधान परिषद की 8 में से 4 सीटें भूमिहार प्रत्याशियों ने जीती है तो एक सीट यादव, राजपूत और मल्लाह समाज के खाते में गई है. जबकि, एक सीट ब्राह्मण के खाते में गई है. बिहार की जातीय जनगणना की बात करें तो भूमिहारों की आबाद कुल जनसंख्या का 2.86 प्रतिशत यानी 37,51,000 है. राजपूतों की संख्या 3.45 प्रतिशत यानी 45,10,733 है. सभी जातियों में यादवों की आबादी सबसे अधिक है. उनकी संख्या कुल जनसंख्या का 14.27 प्रतिशत यानी 1,86,50,119 है. मल्लाहों की आबादी 2.60 प्रतिशत यानी 34,10,093 है.