भागलपुर के शिक्षा विभाग में सरकारी खजाने से 98 लाख रुपये से अधिक के कथित फर्जी भुगतान का मामला सामने आने के बाद अब अधिकारियों पर कार्रवाई शुरू हो गई है. जिला शिक्षा पदाधिकारी चंदन कुमार और डीपीओ स्थापना शशि चंद चौधरी को निलंबित कर दिया गया है. डीडीसी की जांच रिपोर्ट के बाद डीएम अलंकृता पांडे ने कार्रवाई की है.
दरअसल, यह पूरा मामला एक कथित फर्जी शिक्षिका के नाम पर वेतन भुगतान से जुड़ा है. जांच में सामने आया कि एचआरएमएस (HRMS) पोर्टल पर आईडी तैयार कर सुल्तानगंज प्रखंड की विशिष्ट शिक्षिका बताई जा रही तनुश्री के नाम पर 98 लाख 12 हजार 773 रुपये का भुगतान किया गया. इस मामले में संविदा पर कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटर अविनाश की भूमिका भी जांच के घेरे में आई है.
मामला उजागर होने के बाद पुलिस ने कंप्यूटर ऑपरेटर अविनाश, डीईओ चंदन कुमार और डीपीओ स्थापना शशि चंद चौधरी समेत छह लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी. इसके बाद डीडीसी ने पूरे मामले की जांच की और रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपी. जांच रिपोर्ट के आधार पर दोनों अधिकारियों को निलंबित करने की कार्रवाई की गई है.
निलंबन के साथ ही दोनों अधिकारियों के खिलाफ आरोप-पत्र गठित कर विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की तैयारी भी की जा रही है. निलंबन अवधि में डीईओ चंदन कुमार का मुख्यालय पूर्णिया प्रमंडल के क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक कार्यालय और डीपीओ स्थापना शशि चंद चौधरी का मुख्यालय दरभंगा प्रमंडल के क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक कार्यालय निर्धारित किया गया है, लेकिन इस पूरे प्रकरण ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
आखिर फर्जी आईडी के जरिए लाखों रुपये का भुगतान होता रहा और इसकी भनक समय रहते क्यों नहीं लगी? भुगतान की प्रक्रिया में दस्तावेजों के सत्यापन और निगरानी की जिम्मेदारी किसकी थी? क्या इस गड़बड़ी को पहले ही रोका जा सकता था?
फिलहाल, दो अधिकारियों के निलंबन के बाद अब पुलिस जांच और विभागीय कार्रवाई पर नजर है. जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि इस कथित घोटाले में किन लोगों की क्या भूमिका रही और सरकारी राशि के भुगतान में हुई गड़बड़ी के लिए कौन जिम्मेदार है? सवाल यह है कि आखिर शिक्षा विभाग में फर्जी आईडी के जरिए इतनी बड़ी रकम का भुगतान कैसे हो गया और इस पूरे मामले में किसकी कितनी जिम्मेदारी है?
रिपोर्ट: अश्वनी कुमार