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कार खुद मारेगी ब्रेक! सरकार ला रही नया ऑटोमैटिक ब्रेक प्लान, जानिए कब आ रहा है ये धांसू नियम

अक्टूबर 2030 से भारत में बिकने वाली सभी नई कारों में ऑटोमैटिक इमरजेंसी ब्रेकिंग सिस्टम यानी एईबीएस अनिवार्य होने जा रहा है. सड़क हादसों को रोकने के लिए सरकार का यह एक बहुत बड़ा कदम है, जिससे अब गाड़ियां खुद खतरा भांपकर ब्रेक लगा सकेंगी.

Written By Mohit Chaturvedi
Published: Oct 22, 2026, 07:17 AM IST | Updated: Oct 22, 2026, 07:20 AM IST
Image Credit: अक्टूबर 2030 से एईबीएस अनिवार्य होने जा रहा है.
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सड़कों पर गाड़ियां भगाना आज के टाइम में जितना क्रेजी लगता है, उतना ही खतरनाक भी बनता जा रहा है. रोज सुबह उठकर न्यूज खोलो तो किसी न किसी भयानक एक्सीडेंट की खबर दिल दहला देती है. रोड एक्सीडेंट्स के इन डरावने आंकड़ों पर लगाम लगाने के लिए सरकार अब फुल एक्शन मोड में आ चुकी है. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में ड्राइविंग को सेफ बनाने के लिए एक ऐसा तगड़ा सिस्टम लाया जा रहा है जो सच में गेम-चेंजर साबित होगा. आने वाले दिनों में गाड़ियां खुद भांप लेंगी कि आगे कोई मुसीबत है या नहीं. अगर ड्राइवर का ध्यान भटका या उसने समय रहते ब्रेक नहीं दबाया, तो गाड़ी खुद-र-खुद अपने ब्रेक खींच लेगी. इस तगड़ी टेक्नोलॉजी का नाम ऑटोमैटिक इमरजेंसी ब्रेकिंग सिस्टम यानी AEBS रखा गया है. सरकार का यह नया फरमान खासकर उन लोगों की जिंदगी पूरी तरह बदल देगा जो दिन-रात सड़कों पर गाड़ियां दौड़ाते हैं.

क्या है यह ऑटोमैटिक इमरजेंसी ब्रेकिंग सिस्टम (AEBS)?
यह कोई आम चीज नहीं बल्कि एडीएएस यानी एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम का ही एक दमदार हिस्सा है. गाड़ी के चारों तरफ ऐसे सेंसर और कैमरे फिट होंगे जो पलक झपकते ही आसपास की हर हलचल पर नजर रखेंगे. मान लो आप गाड़ी चला रहे हो और अचानक सामने कोई ट्रक या इंसान आ गया और आप ब्रेक दबाना भूल गए, तो यह सिस्टम खुद ही समझ जाएगा कि दाल में कुछ काला है. इसके बाद गाड़ी का कंप्यूटर खुद-ब-खुद इमरजेंसी ब्रेक लगा देगा ताकि बड़ी दुर्घटना टल जाए.

कब से लागू होगा नया नियम और क्या है पूरी डेडलाइन?
सरकार के इस नए मास्टरप्लान के तहत हर गाड़ी के लिए अलग-अलग डेडलाइन सेट की गई है. शुरुआत सबसे पहले बड़े और भारी वाहनों से की जा रही है. आने वाले जनवरी 2027 से देश में जितने भी नए ट्रक और बस मॉडल मार्केट में उतरेंगे, उनमें यह AEBS टेक्नोलॉजी होना एकदम कंपलसरी कर दिया जाएगा. इसके बाद बारी आती है  कारों की. जो रिपोर्ट्स सामने आई हैं उनके मुताबिक, अक्टूबर 2030 से देश में बिकने वाली हर नई कार में यह सिस्टम होना जरूरी कर दिया जाएगा. इसके अलावा, जो गाड़ियां साल 2030 से पहले से मार्केट में बिक रही हैं और उस वक्त भी उनका प्रोडक्शन चालू है, उनके लिए यह नियम अक्टूबर 2032 से लागू होगा. बहुत जल्द सरकार इसका ऑफिशियल ड्राफ्ट भी जारी करने वाली है ताकि सबको तैयारी करने का पूरा मौका मिल सके.

टैक्सियों और कमर्शियल गाड़ियों पर रहेगा सबसे ज्यादा फोकस
इस पूरे प्लान में सबसे ज्यादा जोर टैक्सियों और कमर्शियल गाड़ियों पर दिया जा रहा है. जो लोग दिन-रात कैब चलाते हैं और स्टीयरिंग पकड़कर घंटों तक हाईवे पर बैठे रहते हैं, उनके लिए यह टेक्नोलॉजी किसी वरदान से कम नहीं होगी. टैक्सियों के लिए सिर्फ ब्रेक ही नहीं, बल्कि कई और शानदार फीचर्स भी जबरदस्त तरीके से अनिवार्य किए जा रहे हैं. इसमें ऑटोमैटिक कमांड स्टीयरिंग, इमरजेंसी लेन कीपिंग सिस्टम और ड्राइवर के सुस्त होने या नींद आने पर कान खड़े कर देने वाले सेंसर्स शामिल हैं.

ड्राइवरों की थकान और नींद से होने वाले हादसों पर कसेगी लगाम
अक्सर ऐसा देखा गया है कि लंबी दूरी तय करने के बाद ड्राइवर को नींद या झपकी आने लगती है और वह रास्ते से ध्यान खो बैठता है. इस पंगे से निपटने के लिए नई गाड़ियों में ड्राइवर ड्राउजीनेस डिटेक्शन वाला फीचर भी कंपलसरी किया जा रहा है. जैसे ही ड्राइवर की पलकें भारी होने लगेंगी या उसका ध्यान इधर-उधर भटकेगा, गाड़ी तुरंत तेज अलार्म बजाकर उसे जगा देगी या खुद ही गाड़ी को कंट्रोल करना शुरू कर देगी. इसके अलावा ब्लाइंड स्पॉट इंफॉर्मेशन और लेन डिपार्चर वॉर्निंग जैसे तगड़े फीचर्स भी जोड़े जा रहे हैं, ताकि गाड़ी अपनी लाइन छोड़कर इधर-उधर न भटके और साइड से आ रही गाड़ियों से भिड़ने से बच जाए.

ऑटोमोबाइल एक्सपर्ट्स की इस पूरे मामले पर क्या है राय
ऑटोमोबाइल और मोबिलिटी सेक्टर के जाने-माने एक्सपर्ट रमा पांडे का यह मानना है कि यह नियम उन तमाम कमर्शियल ड्राइवरों के लिए बहुत बड़ा सुकून लेकर आएगा जो रोजाना स्टेरिंग के पीछे अपनी आधी जिंदगी गुजार देते हैं. उनका कहना है कि जब गाड़ी खुद ही सुरक्षा से जुड़े भारी-भरकम फैसले लेने लगेगी और ड्राइवर की थकान कम करेगी, तो ड्राइविंग का पूरा मजा ही बदल जाएगा. जिन गाड़ियों में पहले से ही इस लेवल की टेक्नोलॉजी आ रही है, उनके लिए इंडस्ट्री के नए स्टैंडर्ड्स को फॉलो करना और भी ज्यादा आसान हो जाएगा.

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About the Author

मोहित चतुर्वेदी डिजिटल न्यूज मीडिया में 16 से अधिक वर्षों का एक्सपीरियंस रखने वाले एक वरिष्ठ टेक जर्नलिस्ट हैं, जो वर्तमान में Zee News में असिस्टेंट न्यूज एडिटर के रूप में टेक्नोलॉजी सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं. स्मार्टफोन रिव्यू, गैजेट एनालिसिस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और साइबर सुरक्षा में गहरी विशेषज्ञता रखने वाले मोहित ने Apple, Samsung, OnePlus, Vivo और Xiaomi जैसे टॉप ब्रांड्स के फ्लैगशिप डिवाइसों का गहन और निष्पक्ष इन-डेप्थ रिव्यू किया है. अंतरराष्ट्रीय टेक इवेंट्स की ऑन-ग्राउंड रिपोर्टिंग का लंबा अनुभव रखने वाले मोहित ने लंदन में 'Nothing Phone' और आयरलैंड के बेलफास्ट में 'Realme' के ग्लोबल लॉन्च इवेंट्स को कवर किया है, और इससे पहले वे NDTV, आजतक और दैनिक भास्कर जैसे देश के सबसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में टेक जर्नलिज्म और डिजिटल कंटेंट स्ट्रेटेजी में अहम भूमिकाएं निभा चुके हैं. जटिल तकनीकी बारीकियों को बेहद आसान भाषा में डिकोड करने के लिए पहचाने जाने वाले मोहित से सीधे Mohit.chaturvedi@zeemedia.com पर ईमेल के जरिए या उनके एक्स और इंस्टाग्राम हैंडल्स पर कनेक्ट किया जा सकता है.
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