कार में लगवा रहे हैं बाहर से CNG किट? फैसला लेने से पहले जान लें ये फायदे, नुकसान और नियम, नहीं तो पछताना पड़ेगा!
पेट्रोल की बढ़ती कीमतों के बीच कार में बाहर से CNG किट लगवाना बचत का पसंदीदा ऑप्शन बनता जा रहा है. लेकिन, इसे लगवाने से पहले किट के जरूरी पुर्जों, फिटिंग प्रक्रिया, फायदे-नुकसान, मेंटेनेंस और सरकारी नियमों की पूरी जानकारी होना बेहद जरूरी है.
पेट्रोल की बढ़ती कीमतों को लेकर लोग कार में CNG विकल्प पर शिफ्ट कर रहे हैं. जहां बहुत सारे मॉडल्स अपने कार का CNG वेरिएंट भी ला रही हैं, जिसमें कंपनी से ही फैक्ट्री-फिटेड CNG किट लगी होती हैं, तो वहीं कुछ पेट्रोल मॉडल्स में यह ऑप्शन नहीं मिलता है. ऐसे में कम रनिंग कॉस्ट के लिए लोग अपनी कार में आफ्टरमार्केट CNG किट लगवाने का सोचते हैं. हालांकि, कार में CNG किट लगवाने से पहले इसके फायदे और नुकसान के साथ-साथ सुरक्षा से जुड़ी बातों को समझ लेना बहुत जरूरी है. आफ्टरमार्केट CNG किट में कौन-कौन से जरूरी पार्ट्स होते हैं, इसे लगवाने पर किन बातों का ध्यान रखना चाहिए और किन कारों में CNG किट लगवाने से बचना चाहिए? आइए आपको इसके बारे में डिटेल से जानते हैं.
पहले जान लीजिए CNG किट में कौन-कौन से पार्ट्स होते हैं?
सिलेंडर
इसे कार की डिग्गी में फिट किया जाता है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार खाली होने पर इस सिलेंडर का वजह 70 किलो तक होता है और इसमें 60-65 लीटर तक की क्षमता मिलती है. मार्केट में हल्के कार्बन फाइबर सिलेंडर भी मिल जाते हैं, लेकिन वे काफी महंगे होते हैं.
रिड्यूसर
CNG किट में यह हिस्सा इंजन के पास लगता है. सिलेंडर से आने वाले भारी प्रेशर वाली गैस (200 bar) के प्रेशर को कमकर 2-3 bar बार तक कंट्रोल करता है.
इंजेक्टर रेल और नोजल
इनका काम जरूरत के हिसाब से इंजन के अंदर सही मात्रा में गैस की सप्लाई करना है.
MAP सेंसर और फिल्टर
सेंसर गैस के प्रेशर और तापमान पर नजर रखता है, वही फिल्टर गैस की गंदगी को साफ करता है.
CNG ECU
यह किट का दिमाग है. यह कार के मेन कंप्यूटर से जुड़कर तय करता है कि इंजन में गैस कब और कितनी भेजनी है.
चेंज-ओवर स्विच
यह डैशबोर्ड पर लगाया जाता है. इसके जरिए ड्राइवर गाड़ी को पेट्रोल से CNG या CNG से पेट्रोल पर स्विच कर सकता है और गैस का लेवल देख सकता है.
ये है फिटिंग प्रक्रिया
अगर आप किसी अच्छी वर्कशॉप में CNG किट लगवाने जाते हैं, तो इस काम को पूरा होने में करीब 4-5 घंटें का समय लग सकता है.
इस काम में सबसे पहले इंजन और स्पार्क प्लग की चेकिंग की जाती है.
इसके बाद रिड्यूसर, इंजेक्टर और CNG ECU को सही जगह लगाया जाता है.
फिर बारी आती है सिलेंडर कीस जिसे डिग्गी में मजबूत फ्रेम पर बोल्ट से कसा जाता है.
कार के नीचे से सुरक्षित तरीके से हाई-प्रेशर पाइप और वायरिंग फिट की जाती है.
इन कामों को पूरा करने के बाद करीब 2 किग्रा तक गैस भरकर सेंसर और साबुन के पानी से गैस लीकेज को चेक किया जाता है.
फिर बारी आती है सॉफ्टवेयर से ट्यूनिंग की और फिर रोड टेस्ट किया जाता है.
फायदे नुकसान भी जान लीजिए
आफ्टरमार्केट CNG किट के फायदे
पैसों की सीधी बचत
शोरूम से फैक्ट्री-फिटेड CNG कार खरीदने के मुकाबले बाहर से किट लगवाना लगभग 25 से 30 प्रतिशत तक सस्ता पड़ता है.
मनपसंद मॉडल का ऑप्शन
अगर आप ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन, टॉप-एंड फीचर्स वाली कार या फिर SUV में CNG का एक्सपीरियंस लेना चाहते हैं, तो मार्केट से किट लगवाना ही सबसे आसान तरीका है.
आफ्टरमार्केट CNG किट के नुकसान
वारंटी कैंसिल होने का खतरा
कार में बाहर से कोई भी बदलाव कराने पर कंपनी की ओर से मिलने वाली इंजन और इलेक्ट्रॉनिक्स की वारंटी पूरी तरह खत्म हो जाती है.
बूट स्पेस की कमी
नई फैक्ट्री-फिटेड कारों में कंपनियां दो छोटे सिलेंडर या अंडर-बॉडी प्लेसमेंट देकर डिग्गी में स्पेस बचा लेती हैं. वहीं आफ्टरमार्केट किट में डिग्गी के बीचों-बीच बड़ा सिलेंडर रखा जाता है, जिससे सामान रखने की करीब-करीब न के बराबर बचती है.
इन गाड़ियों में CNG किट नहीं लगवाना चाहिए
डीजल इंजन वाली कारें
डीजल कारें कम्प्रेशन-इग्निशन तकनीक पर काम करती हैं. इस कारण से इनमें नार्मल पेट्रोल कारों की तरह बाहर से नार्मल CNG किट लगाना संभव नहीं होता.
हाइब्रिड कारें
हाइब्रिड गाड़ियों में चलाते समय पेट्रोल इंजन बार-बार अपने आप ऑन और ऑफ होता रहता है. इस सिस्टम के साथ CNG किट की सेटिंग बिठाना बहुत ही मुश्किल और जोखिम भरा होता है.
खराब या पुरानी स्थिति वाली कारें
जिस गाड़ी का इंजन पहले से ही कमजोर हो या उसमें कोई खराबी हो, उसमें CNG लगवाने से इंजन पर प्रेशर और बढ़ जाता है, जिससे गाड़ी जल्दी खराब हो सकती है.
इन बातों को भी जान लीजिए
3 साल में हाइड्रोटेस्ट
सरकार के नियमों के अनुसार हर 3 साल पर सिलेंडर की सुरक्षा जांच कराना अनिवार्य है, जिसमें लगभग ₹3,000 तक का खर्च आता है.
समय पर फिल्टर बदलना
हर 10,000 किलोमीटर या 3 साल पूरा होने पर CNG फिल्टर जरूर बदलवाएं. इसका खर्च मात्र ₹1,000 के अंदर आ जाता है.
10% सफर पेट्रोल पर करें
इंजन और फ्यूल लाइन को स्वस्थ रखने के लिए अपनी कुल ड्राइविंग का कम से कम 10 प्रतिशत हिस्सा पेट्रोल पर ही चलाएं.
सर्टिफाइड डीलर
CNG किट हमेशा सरकार से मान्यता प्राप्त फिटमेंट सेंटर से ही लगवाएं.
RC और इंश्योरेंस में एंट्री कराएं
किट लगवाने के तुरंत बाद अपनी कार की RC में RTO से CNG एंडोर्समेंट कराएं और अपनी इंश्योरेंस कंपनी को इसकी जानकारी दें, जिससे क्लेम में दिक्कत न आए.