'मास्टरमाइंड्स को नहीं छोड़ेंगे...' किंग अब्दुल्ला के कड़े तेवर के बीच छावनी में बदला कराक प्रांत, चर्च पर हमले से जॉर्डन में हाहाकार!
जॉर्डन में चर्च पर हुए आतंकी हमले से दुनिया सन्न है. इस मुस्लिम बहुल देश में लंबे वक्त बाद ISIS ने ऐसी जघन्य वारदात को अंजाम दिया है. इस हमले में 7 लोगों की मौत हो चुकी है.
मध्य पूर्व का वो देश, जिसे पूरी दुनिया शांति, स्थिरता और आपसी भाईचारे के लिए जानती है, अब वो आतंकवाद के खूनी प्रहार से कराह रहा है. जॉर्डन के कराक प्रांत में एक चर्च पर आतंकी हमला हुआ, एक मौत के बाद गांव के लोग चर्च में अंतिम विदाई देने के लिए जुटे थे. तभी शोक सभा में घुसे नकाबपोश आतंकियों ने अंधाधुंध गोलियां बरसाकर 7 बेगुनाहों को मौत के घाट उतार दिया, जबकि 34 से ज्यादा लोग अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं. इस कायरतापूर्ण हमले की जिम्मेदारी खूंखार आतंकी संगठन ISIS ने ली है.
जॉर्डन की राजधानी अम्मान से 180 किलोमीटर दूर कराक प्रांत के हमौद गाँव में उस समय हाहाकार मच गया जब हथियारबंद ISIS के आतंकियों ने वहां अचानक हमला कर दिया. कोई कुछ समझ पाता उससे पहले ही आतंकियों ने ताबड़तोड़ गोलियां बरसाना शुरू कर दिया.
जॉर्डन के किस चर्च में हुआ बड़ा हमला
ये हमला वहां सेंट जॉर्ज ग्रीक ऑर्थोडॉक्स चर्च में हुआ, हमले के वक्त वहां ईसाई समुदाय के लोग एक अंतिम संस्कार के लिए जुटे थे. माहौल में शोक था, लोग अंतिम विदाई दे रहे थे. किसी को अंदाज़ा नहीं था कि अगले ही पल ये शोक सभा एक भयावह कत्लेआम में तब्दील होने वाली है.
अचानक, तीन नकाबपोश बंदूकधारी चर्च के बाहर झाड़ियों और एक छोटी दीवार के पीछे से निकले. उनके हाथों में अत्याधुनिक हथियार थे. इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता, उन्होंने चर्च के भीतर गोलियों की बौछार कर दी. हमला होते ही वहां चीख पुकार मच जाती है लोग किसी तरह अपनी जान बचाकर भागने की कोशिश करते हैं, हर तरफ दहशत का माहौल और फर्श पर चारों तरफ बिखरा खून नजर आया.
सीसीटीवी कैमरों से जो तस्वीरें सामने आई हैं, उनमें साफ़ दिख रहा है कि आतंकियों ने इस कायरतापूर्ण हरकत को बेहद सोची समझी साजिश के तहत अंजाम दिया. वो पूरी तरह से हथियारों से लैस थे और उन्हें चर्च के चप्पे चप्पे की जानकारी थी. यही वजह रही की वारदात को अंजाम देने के बाद तीनों आतंकी एक कार में सवार होकर फरार हो गए. जिनकी तलाश के लिए पूरे कराक प्रांत को छावनी में बदल दिया गया. जॉर्डन के सुरक्षा बलों, आतंकवाद विरोधी दस्तों और खुफिया एजेंसियों ने इलाके की पूरी तरह घेराबंदी कर दी.
लगातार ISIS के निशाने पर है जॉर्डन
इस हमले की जिम्मेदारी लेने वाला इस्लामिक स्टेट यानी आईएसआईएस कभी इराक और सीरिया के बड़े हिस्से पर राज करता था लेकिन मौजूदा हालात में ये संगठन भौगोलिक रूप से भले ही खत्म हुआ हो लेकिन इसकी ज़हरीली विचारधारा अब भी ज़िंदा है. जानकारों के मुताबिक आईएसआईएस अब बड़े सैन्य ऑपरेशन्स के बजाय लोन वुल्फ हमलों या छोटे स्लीपर सेल्स के जरिए काम कर रहा है.
जॉर्डन हमेशा से आतंकवाद के खिलाफ अमेरिकी और पश्चिमी देशों के गठबंधन का एक मजबूत और वफादार साथी रहा है. यही वजह है कि जॉर्डन की सरकार और उसके नागरिक हमेशा से आईएसआईएस के निशाने पर रहे हैं. सीरिया और इराक की सीमाओं से सटे होने के कारण, जॉर्डन को हमेशा से घुसपैठ का खतरा रहता है. ये हमला भी इस बात का सबूत है कि खतरा टला नहीं है.
सवाल ये भी उठता है कि आखिर आतंकियों ने एक चर्च और वो भी अंतिम संस्कार के मौके को ही क्यों चुना. जानकारों के मुताबिक, जॉर्डन एक मुस्लिम बहुल देश है. यहां की कुल आबादी का एक छोटा हिस्सा ईसाई समुदाय का है. जो सदियों से यहां बेहद शांति और आपसी भाईचारे के साथ रहता आया है. लेकिन ISIS इसी सामाजिक ताने बाने को छिन्न भिन्न करना चाहता है. ISIS ने इस कत्लेआम के ज़रिए जॉर्डन में एक धार्मिक और सांप्रदायिक विभाजन पैदा करने की कोशिश की, ताकि देश में अस्थिरता का माहौल बने और वो अपने स्लीपर सेल्स को दोबारा सक्रिय कर सकें.
किंग अब्दुल्ला द्वितीय ने घायलों से की मुलाकात
इस आतंकी हमले के बाद किंग अब्दुल्ला द्वितीय अस्पताल पहुंचे और घायलों से मुलाकात की. उन्होंने जॉर्डन की जनता को ये भरोसा दिया कि देश की सुरक्षा और संप्रभुता से समझौता नहीं होगा, आतंकी हमले के मास्टरमाइंड्स को उनके अंजाम तक पहुंचाया जाएगा. जब तक ऐसा नहीं होगा तब तक सुरक्षा एजेंसियां चैन से नहीं बैठेंगी.
जॉर्डन भले ही आज मध्य पूर्व के सबसे सुरक्षित देशों में गिना जाता हो, लेकिन इसका इतिहास आतंकवाद के गहरे घावों से भरा हुआ है. अगर पन्नों को पलटें, तो सितंबर 1970 में फिलिस्तीनी अलगाववादियों और जॉर्डन की सेना के बीच खूनी संघर्ष हुआ था. इसके बाद, साल 2005 में जॉर्डन के इतिहास का सबसे भयानक आतंकी हमला हुआ था. जिसमें अल कायदा के आतंकी अबू मुसाब अल जरकावी के नेटवर्क ने राजधानी अम्मान में हमला किया था.
कई बार झेल चुका है बड़े आतंकी हमले
इस हमले में तीन प्रमुख होटलों को आत्मघाती बम धमाकों से उड़ा दिया था. जिसमें 63 बेगुनाह की जान गई थी और सैकड़ों लोग घायल हुए थे. साल 2016 में कराक के ऐतिहासिक किले पर आईएसआईएस के आतंकियों ने हमला किया था. जिसमें सुरक्षाकर्मियों के साथ साथ एक कनाडाई पर्यटक की भी मौत हुई थी. लेकिन जॉर्डन ने हर बार इन जख्मों से उबरकर आतंकवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई को और मजबूत किया है.
फिलहाल कराक के अस्पतालों में जिंदगी और मौत की जंग जारी है. 34 से ज्यादा घायलों में से कई की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है. डॉक्टरों की टीमें लगातार उनके इलाज में जुटी हैं. लेकिन बेगुनाहों की मौत का ये दर्द जॉर्डन के इतिहास में हमेशा के लिए दर्ज हो गया है.
(ब्यूरो रिपोर्ट, ज़ी मीडिया)