बिजली गुल, सप्लाई ठप… फिर भी 90 दिन नहीं रुकेगी अमेरिकी सेना, क्या है पेंटागन का FORTRESS प्लान?
अमेरिकी रक्षा विभाग यानी पेंटागन 'FORTRESS प्लान' पर काम कर रहा है. जहां युद्ध के समय पावर ग्रिड्स फेल हो जाने की स्थिति में भी अमेरिकी सैन्य ठिकानों को बिजली की किल्लत का सामना न करना पड़े और वह 90 दिन तक आसानी से चलते रहें.
Pentagon Fortress Plan: अमेरिका इस समय ईरान के साथ जंग में फंसा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल में ही एक नया ऐलान करते हुए कहा कि वह फिर से ईरान पर बड़ा हमला करेंगे. इस बीच अमेरिका का रक्षा विभाग यानी पेंटागन से जुड़ी एक नई और अहम जानकारी सामने आई है. पेंटागन एक खास प्लान पर काम कर रहा है, जिसका उद्देश्य अमेरिकी सैन्य ठिकानों को पूरी तरह से आत्मनिर्भर बनाना है.
दरअसल, युद्ध के दौरान सबसे अधिक संभावना पावर ग्रिड्स के फेल होने, सप्लाई चेन बाधित होने, कई जरूरी बुनियादी ढांचे नष्ट होने की होती है. इन परिस्थितियों से पार पाने के लिए पेंटागन 'FORTRESS प्लान' पर काम कर रहा है. इसका उद्देश्य है कि युद्ध की परिस्थिति में सभी सैन्य ठिकाने बिना किसी बाहरी मदद के कम से कम 90 दिनों तक अपना काम आसानी से कर सकें.
पेंटागन का 'फोर्ट्रेस' प्लान
हाल में ही फॉक्स न्यूज की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि इस पहल को फोर्ट्रेस नाम दिया गया. फोर्ट्रेस का मुख्य लक्ष्य अमेरिकी सेना को युद्ध के लिए सदैव तैयार रखना है. ऐसे में अगर किसी हमले के कारण नागरिक सुविधाएं ठप भी हो जाएं, तो युद्ध में अमेरिकी सेना का अभियान नहीं रुकना चाहिए. पेंटागन के मुख्य प्रवक्ता सीन पार्नेल ने इस संबंध में पूरी जानकारी दी.
उनकी ओर से कहा गया कि हम अपनी राष्ट्रीय रक्षा के लिए आम नागरिक ढांचे पर निर्भर नहीं रह सकते. यह एक बड़ा खतरा है. आम कारखानों को युद्ध के समय में रक्षा उपकरणों के उत्पादन के लिए तैयार किया जा रहा है. दावा किया जा रहा है कि पेंटागन इस प्लान के अलावा नई और वैकल्पिक सप्ला चेन बनाने पर भी काम कर रहा है. ईंधन, हथियार और अन्य जरूरी चीजों के सुरक्षित भंडार बनाए जा रहे हैं.
'बिजली ही युद्ध है'
पेंटागन के मुख्य प्रवक्ता ने दावा किया कि आज के समय में बिजली ही युद्ध है. उन्होंने बताया कि बिजली के बिना संचार, पानी, रसद और बुनियादी सैन्य ढांचा काम करना बंद कर देता है. पेंटागन का दावा है कि फोर्ट्रेस योजना का असर पूरे अमेरिका में दिखाई देगा. मुख्य सैन्य ठिकानों को कम से कम 90 दिनों तक काम करने लायक बनाया जाएगा. इस खास प्लान के साथ अमेरिकी सुरक्षा रणनीति में एक अहम बदलाव भी किया जा रहा है. इसके तहत एक बड़े युद्ध में अमेरिका की जमीन पर मौजूद बुनियादी ढांचों को निशाना बनाया जा सकता है.
ट्रंप प्रशासन को किस बात की चिंता?
पेंटागन के प्रवक्ता ने बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आज के समय में बदलती हुई दुनिया को समझते हैं. राष्ट्रपति ट्रंप ने नई सोच के लिए हमेशा रास्ता तैयार कर दिया है. इसमें पश्चिमी गोलार्ध, ग्रीनलैंड 'गोल्डन डोम' और पनामा पर नया ध्यान देना शामिल है. माना जाता है कि ट्रंप प्रशासन की एक मुख्य चिंता सेना की निर्भरता को लेकर भी रही है.
सोना, संचार, रसद और हथियारों के लिए आम पावर ग्रिड्स पर हम काफी निर्भर हैं, जिसे बदलने की आवश्यकता है. नए प्लान के तहत सैन्य ठिकानों पर लगातार और निर्बाध बिजली देने के लिए पोर्टेबल परमाणु रिएक्टर्स का इस्तेमाल किया जाना चाहिए. बड़े स्तर पर बैटरी स्टोरेज लगाया जाना चाहिए. इन तकनीकों के इस्तेमाल के बाद से सैन्य ठिकाने आम पावर ग्रिड से अलग हो जाएंगी. लंबी कटौती के दौरान भी सैन्य ठिकाने आसानी से काम कर सकेंगे.
90 दिन की आत्मनिर्भरता की कोशिश
गौर करने वाली बात है कि पेंटागन की ओर से पहले ही कहा जा चुका है कि आम बिजली ढांचे पर अपनी निर्भरता कम करेगा. यह 90 दिनों तक आत्मिर्भरता की योजना इसके एक कदम आगे लेकर जाती है. पेंटागन का दावा है कि इसमें न केवल बिजली, बल्क सैन्य अभियान चलाने के लिए जरूरी वह अहम सेवा को शामिल किया गया है. ये खबर ऐसे समय समय सामने आई है, जब अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध के 8 महीने पूरे होने वाले हैं.
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