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पिघलती बर्फ का डर, नेपाल ने कसी कमर: त्रासदी के बाद बड़ा फैसला, छह नदी बेसिनों में लगेगा वार्निंग सिस्टम; कैसे करता है काम?

नेपाल ने अचानक आने वाली बाढ़ को रोकने और उसके अलर्ट पहले पाने की दिशा में अहम कदम उठाने जा रहा है. नेपाल छह प्रमुख नदी बेसिनों में फ्लड अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाने की तैयारी में है, जिससे जोखिमों किया जा सके और नुकसान कम से कम हो.

Written By abhinav tripathi
Published: Oct 26, 2026, 07:51 AM IST | Updated: Oct 26, 2026, 07:58 AM IST
Image Credit: नेपाल ने आपदा से बचाव के लिए बनाया खास प्लान. (फोटो- रॉयटर्स)
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नेपाल में इसी साल अगस्त के महीने में विनाशकारी बाढ़ आई थी, जिसने देश के एक हिस्से में बहुत तबाही मचाई. विनाशकारी बाढ़ के बाद नेपाल आपदा प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए छह प्रमुख नदी बेसिनों में बाढ़ पूर्व चेतावनी प्रणाली (फ्लड अर्ली वार्निंग सिस्टम) का विस्तार करने की तैयारी कर रहा है. इसके अलावा चार सबसे अधिक जोखिम वाली हिमनदीय झीलों के जलस्तर को कम करने की योजना पर भी विचार कर रहा है.

दरअसल, इसी साल 26 अगस्त को भोटेकोशी और त्रिशूली नदी बेसिन में भीषण बाढ़ आई, जिसमें करीब 1,500 लोगों की मौत हुई और 5,000 से अधिक लोग अभी भी लापता हैं. नेपाल सरकार की प्रारंभिक रैपिड डैमेज एंड नीड्स असेसमेंट की रिपोर्ट बताती है कि इस आपदा में काठमांडू को 1.81 अरब डॉलर की संपत्ति का नुकसान पहुंचा है, जिसको कवर करने में काफी वक्त लग सकता है.

बाढ़ ने इन्फ्रास्ट्रक्चर को पहुंचाया नुकसान

नेपाल के भोटेकोशी और त्रिशूली नदी बेसिन में आई बाढ़ के कारण सौर ऊर्जा संयंत्रों, जलविद्युत परियोजनाओं, बिजली ट्रांसमिशन नेटवर्क और परिवहन ढांचे को सबसे अधिक नुकसान पहुंचा है. इस नुकसान के कारण जलविद्युत परियोजनाएं, सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में शामिल रहीं.

नेपाल ने एक पत्र के माध्यम से दावा किया कि साल 2022 से साल 2028 के तक चलने वाली प्रायोरिटी रिवर बेसिन फ्लड रिस्क मैनेजमेंट परियोजना के तहत छह नदी बेसिन में बाढ़ पूर्व चेतावनी प्रणाली स्थापित करने की तैयारी है. बताया जाता है कि इस परियोजना पर कुल 75.4 लाख डॉलर खर्च किए जाने हैं. परियोजनाओं के दायरे में मावा-रतुवा, बक्राहा, लखनदेही, ईस्ट राप्ता और मोहना-खुटिया नदी बेसिन शामिल है.

क्या है नेपाल की सरकार का प्लान?

इसके अलावा सरकार की ओर से यह घोषणा भी की गई है कि मिड मई से मिड अक्टूबर 24 घंटे बाढ़ पूर्वानुमान और चेतावनी सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी. बता दें कि यही समय नेपाल में मानसून का मुख्य मौसम होता है. चूंकि, हिमालयी क्षेत्रों में तापमान बढ़ने के कारण ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं. इसमें हिमनदीय झीलों की स्थिरता, हिमस्खलन और निचले इलाकों में विनाशकारी बाढ़ का खतरा बढ़ गया है. इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए नेपाल सरकार ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (जीएलओएफ) संजीवनी परियोजना शुरू करेगी.

बाढ़ के खतरे को कम करने की तैयारी

नए प्लान के अनुसार, चार अधिक जोखिम वाली झीलों थुलागी, ओअर बरुण, लुमडिंग त्शो और होंगू-2 के जलस्तर को कम किया जाएगा. बताया जाता है कि ये परियोजना 2026 से 2033 तक चलेगी और इसकी अनुमानित लागत 4.99 करोड़ डॉलर के करीब है. बता दें कि नेपाल पहले भी त्सो रोल्पा और इम्जा झील का जलस्तर कम कर चुका है, ताकि हिमनदीय झील फटने से होने वाली बाढ़ के खतरे के कम किया जा सके.

गौरतलब है कि नेपाल के जल विज्ञान और मौसम विज्ञान विभाग मौसम और बाढ़ संबंधी पूर्वानुमान को अधिक सटीक और विश्वसनीय बनाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमता, मशीन लर्निंग और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग तकनीकों को प्राथमिकता देने की योजना बना रहा है. (इनपुट-आईएएनएस)

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About the Author

अभिनव त्रिपाठी जी न्यूज हिंदी में बतौर सब एडिटर कार्यरत हैं।  पत्रकारिता के क्षेत्र में 3 साल से अधिक समय का अनुभव रखते हैं। डेस्क पर रियल टाइम की देश-विदेश की खबरों को कवर करते हैं। राष्ट्रीय राजनीति और अंतरराष्ट्रीय खबरों को लिखना पसंद है। वैश्विक घटनाक्रम के किसी भी जटिल मुद्दे को आसान भाषा में समझाना अच्छी तरीके से आता है। इससे पहले जागरण डॉट कॉम के साथ सब एडिटर के तौर पर काम कर चुके हैं।  करियर की शुरुआत एक सैटेलाइट चैनल से की थी। पत्रकारिता की पढ़ाई काशी विद्यापीठ वाराणसी से की है। 
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