क्या सच में बांग्लादेश से 1 लाख वर्कर लेगा जापान? टोक्यो ने कर दिया 'दूध का दूध पानी का पानी', ढाका की खुल गई पोल
बांग्लादेश से 1 लाख कामगार लेने के दावों पर जापान ने साफ इनकार कर दिया है. टोक्यो ने स्पष्ट किया कि पीएम तारिक रहमान के दौरे में ऐसा कोई एग्रीमेंट नहीं हुआ और सोशल मीडिया पर उड़ रही ये खबरें पूरी तरह झूठी हैं.
क्या सच में बांग्लादेश से हरसाल 1 लाख कामगार जापान जाएंगे? इस सवाल का जवाब खुद जापान की तरफ से मिल गया है. जापान के फॉरेन प्रेस सेक्रेटरी कितामुरा तोशिहिरो ने इसे सिर्फ और सिर्फ एक झूठी खबर बताया. उन्होंने साफ कर दिया कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान के हाल के टोक्यो दौरे पर ऐसा कोई भी एग्रीमेंट या कमिटमेंट नहीं हुआ था.
दरअसल, पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर यह दावा किया गया था कि जापान ने बांग्लादेश से 1 लाख वर्कर लेने के लिए सहमति दे दी है. इस दावे को लेकर कितामुरा तोशिहिरो ने अफवाह बताते हुए एक्स पर एक पोस्ट किया है, जिसमें उन्होंने लिखा, 'हाल के सोशल मीडिया पोस्ट्स में यह गलत दावा किया जा रहा है कि जापान सरकार बांग्लादेश से 1,00,000 कामगारों को लेने पर सहमत हो गई है. 27 अक्टूबर को हुई जापान-बांग्लादेश शिखर बैठक की चर्चाओं सहित ऐसा कोई भी तथ्य मौजूद नहीं है.'
बांग्लादेशी मीडिया में प्रचारित हुई खबर
जिस दावे को जापान ने पूरी तरह से अफवाह बतााय उसका कोई स्पष्ट सोर्स नहीं था फिर भी बांग्लादेशी मीडिया चैनलों ने इसे खूब काफी प्रचारित किया था. इस खबर के बाद सवाल उठाए जा रहे थे कि नई दिल्ली ऐसा कोई समझौता क्यों नहीं कर पाई, लेकिन जापान ने हकीकत दुनिया के सामने रख दी है.
ढाका की मांग पर जापान का रुख
दरअसल, बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान 26 अक्टूबर से 29 अक्टूबर तक जापान की 4 दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर थे. 27 अक्टूबर को उन्होंने टोक्यो में जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची के साथ द्विपक्षीय शिखर वार्ता में हिस्सा लिया था. इस दौरान ढाका ने जापान से इच्छा जाहिर की थी कि वो अपने एसएसडब्ल्यू प्रोग्राम के जरिए उसके कामगारों के लिए रास्ते खोले, लेकिन जापान ने ऐसा कोई वादा नहीं किया था.
जापान में नौकरी पाने के कड़े नियम
जापान में नौकरी पाने का सीधा सा नियम है. आपको भाषा की परीक्षा और टेक्निकल टेस्ट पास करना ही होगा. वहां किसी भी देश को सीधे या फिक्स कोटे के तहत नौकरियां नहीं दी जाती हैं, बल्कि सब कुछ तय मानकों और योग्यता पर ही निर्भर करता है.
शिखर सम्मेलन में असल में क्या हुई बात?
अब सवाल यह है कि इस शिखर सम्मेलन के दौरान जापान और बांग्लादेश के बीच असल में क्या बात हुई? जापान सरकार के आधिकारिक बयान के मुताबिक, 27 अक्टूबर की इस मीटिंग का पूरा फोकस आर्थिक सहयोग, निवेश, बेहतर कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करने पर ही था.
बैठक में उम्मीद जताई गई कि अगले 5 सालों में जापानी कंपनियां बांग्लादेश में करीब 1 ट्रियन येन (लगभग 60,398 करोड़ रुपये) का भारी-भरकम प्राइवेट इन्वेस्टमेंट कर सकती हैं, जिससे करीब 2 लाख नई नौकरियां पैदा होने की संभावना है.
इसके साथ ही दोनों देश 'बे ऑफ बंगाल इंडस्ट्रियल ग्रोथ बेल्ट' को आगे बढ़ाने पर भी सहमत हुए, जिसे 'साझा समृद्धि के लिए बिग-बी' (BIG-B) का नया नाम दिया गया है. इसके अलावा लोकल गवर्नेंस, इंडस्ट्रियल इन्वेस्टमेंट और समुद्री सुरक्षा को लेकर छह द्विपक्षीय समझौतों और दो बड़े लोन के वादों पर दस्तखत किए गए.
17 अक्टूबर का वास्तविक रोजगार समझौता क्या है?
इससे पहले दोनों देशों के बीच 17 अक्टूबर को एक समझौता हुआ था, जो पूरी तरह अलग मसले पर था. उस एग्रीमेंट में दोनों सरकारों ने रोजगार, स्किल डेवलपमेंट और कामगारों की सुरक्षा से जुड़े नियमों का एक खाका तैयार किया था. इस समझौते के आधार पर रिक्रूटमेंट प्रोसेस 1 अप्रैल 2027 से शुरू करने की योजना है. यह डील शुरुआती 5 सालों के लिए प्रभावी होगी, जिसे बाद में अगले 5 साल के लिए बढ़ाया जा सकेगा. हालांकि, इस पूरे एग्रीमेंट में भी कहीं ऐसा कोई जिक्र नहीं है कि जापान हर साल अनिवार्य रूप से बांग्लादेश से 1 लाख कामगार लेगा.
जापान में बांग्लादेशी कामगारों की मौजूदा स्थिति
इमिग्रेशन सर्विसेज एजेंसी के डेटा के मुताबिक, इस समय करीब 45,000 बांग्लादेशी नागरिक जापान में काम कर रहे हैं. इनमें से ज्यादातर लोग छोटे कारोबार, मैन्युफैक्चरिंग (फैक्ट्री वर्क) और केयरगिविंग (बुजुर्गों और मरीजों की देखभाल) जैसे सेक्टर्स से जुड़े हैं.
ये भी पढ़ें: कुत्ते ने प्लेन में किया 'पी' तो मचा बवाल! पैसेंजर्स के पास बचा ये ऑप्शन-लेट उड़ें या सामान छोड़ें? VIDEO Viral