जबरन धर्मांतरण, नाबालिग बेटियों की शादी और भेदभाव! पाकिस्तान में हिंदुओं की बदहाली पर ब्रिटिश संसद में रिपोर्ट
पाकिस्तान में हिंदुओं की आबादी के साथ किस तरह का बर्ताव किया जाता है, यह तो सारी दुनिया जानती है. पड़ोसी मुल्क की पोल खोलने वाली एक रिपोर्ट ब्रिटिश संसद में पेश की गई है.
पाकिस्तान दुनियाभर में आतंकवाद और अल्पसंख्यकों पर जुल्म के लिए पहचाना जाता रहा है. यह बात अब इंटरनेशनल लेवल पर भी चर्चा का विषय बन गई है. हाल ही में ब्रिटेन की संसद में एक रिपोर्ट पेश की गई है, जिसमें पाकिस्तान के अंदर अल्पसंख्यकों के ऊपर हो रहे अत्याचार को लेकर चिंता जाहिर की गई है. रिपोर्ट में खास तौर पर नाबालिग हिंदू लड़कियों के कथित अपहरण, जबरन धर्मांतरण और शादी का मुद्दा उठाया गया है. संगठन का कहना है कि इन मामलों में पीड़ितों को पर्याप्त सुरक्षा और न्याय नहीं मिल पाता.
INSIGHT UK नाम के एक संगठन ने यह रिपोर्ट पेश की है. रिपोर्ट में कहा गया है कि 1941 में उस क्षेत्र की आबादी में हिंदुओं की हिस्सेदारी 14.6% थी, जो आज पाकिस्तान का हिस्सा है. वहीं, आज पाकिस्तान की कुल आबादी में हिंदुओं की हिस्सेदारी 2% से भी कम है. संगठन ने ब्रिटेन सरकार से पाकिस्तान पर दबाव बनाने और अल्पसंख्यकों के अधिकारों की हिफाजत को लेकर ठोस कदम उठाने की मांग की है.
रिपोर्ट में क्या-क्या मुद्दे उठाए?
रिपोर्ट में दावा किया गया कि हिंदू, ईसाई और सिख समुदायों की नाबालिग लड़कियों को अगवा करके धर्म परिवर्तन और शादी के लिए मजबूर किया जाता है. इसमें हर साल करीब 1000 लड़कियों के जबरन धर्मांतरण का अनुमान भी दिया गया है.
इसके अलावा हिंदुओं के धार्मिक स्थलों को भी निशाना बनाए जाने की बात कही गई है. पाकिस्तान पर आरोप हैं कि वो अल्पसंख्यकों के धार्मिक स्थलों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए जा रहे हैं.
- हिंदुओं और दूसरे अल्पसंख्यकों के साथ सामाजिक और धार्मिक स्तर पर भेदभाव किए जाने के आरोप लगाए गए हैं.
- पाकिस्तान छोड़कर जाने वाले हिंदू परिवारों की संपत्ति और आजीविका पर पड़े प्रभाव का जिक्र किया गया है.
- पाकिस्तान के संविधान में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के पदों के लिए मुस्लिम होने की अनिवार्यता को धार्मिक असमानता के उदाहरण के रूप में उठाया गया है.
- रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि उत्पीड़न के मामलों में पीड़ितों को पर्याप्त सुरक्षा और इंसाफ नहीं मिल पाता.
- संगठन का कहना है कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की समस्याओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पर्याप्त तवज्जो नहीं मिलती.
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ब्रिटेन की संसद में मुद्दा उठाने से क्या होगा?
अब किसी के भी जेहन में यह सवाल आना स्वाभाविक है कि पाकिस्तान में हिंदुओं समेत तमाम अल्पसंख्यकों पर अत्याचार हो रहा है, तो इसमें ब्रिटेन क्या कर सकता है? तो इसका जवाब कि रिपोर्ट में संसद से मांग की गई है कि वो इस मुद्दे पर चर्चा करे और ब्रिटिश सरकार पाकिस्तान से कहे वो अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को तवज्जो दे. अगर ब्रिटिश सरकार ऐसा करती है, तो पाकिस्तान पर एक दबाव बनेगा और उसे डर रहेगा कि एक विकसित देश ने उसके अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाई है. उसे यह डर रहेगा कि ब्रिटेन और पाकिस्तान के रिश्ते खराब हो सकते हैं, वो किस हद तक जा सकते हैं, यह स्थिति पर निर्भर रहता है.
- रिपोर्ट में ब्रिटिश सरकार से मांग की गई है कि ब्रिटेन पाकिस्तान के साथ अपने संबंधों और आर्थिक सहायता को मानवाधिकारों में सुधार से जोड़े.
- ब्रिटेन सरकार से पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति की हर छह महीने में समीक्षा करने की मांग करे.
- धार्मिक उत्पीड़न का सामना करने वाले लोगों के लिए ब्रिटेन में सुरक्षित शरण के रास्ते बनाने का सुझाव दिया गया है.