ट्रंप को झटका: ब्राजील में फिर लूला की वापसी, बोलसोनारो को पछाड़ चौथी बार बने राष्ट्रपति
Lula Wins Brazil Presidential Election: ब्राजील ने लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा को चौथी बार अपना राष्ट्रपति चुन लिया गया है. उन्होंने इस कड़े मुकाबले में फ्लावियो बोल्सोनारो को हराया. लूला को 1.8 प्रतिशत वोट मिले.
Brazil Presidential Elections: ब्राजील में लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा ने राष्ट्रपति चुनाव में सीनेटर फ्लेवियो बोल्सोनारो को पीछे छोड़ चौथी बार जीत हासिल कर ली है. सुपीरियर इलेक्टोरल कोर्ट के मुताबिक, लूला को 51.8 प्रतिशत वोट मिले, जबकि बोलसोनारो को 48.2 प्रतिशत वोट प्राप्त हुए.
'रॉयटर्स' की लाइव चुनाव कवरेज के मुताबिक लूला 78 प्रतिशत से ज्यादा वोटों की गिनती के बाद 51.21 प्रतिशत वोटों के साथ आगे चल रहे थे. वहीं, बोलसोनारो को 48.79 प्रतिशत वोट मिले थे. चुनाव प्राधिकरण की ओर से लूला की जीत की पुष्टि करने से पहले ही पोलस्टर डेटाफोलहा ने उनकी जीत का अंदाजा लगा दिया था.
ब्राजील में लूला की जीत
बता दें कि लूला की जीत लैटिन अमेरिका में US राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को समर्थन देने वालों के लिए किसी झटके से कम नहीं है. उनकी जीत से स्पष्ट होता है कि अब मेक्सिको-ब्राजील की सत्ता में वामपंथी विचारधारा वाले नेता फ्रंटफुट पर हैं. बोलसोनारो का झुकाव दक्षिणपंथ की तरफ है. उन्होंने अमेरिका के साथ रिश्ते मजबूत करने को लेकर चुनाव प्रचार किया था. इतना ही नहीं उन्होंने जीतने के बाद ट्रंप प्रशासन के साथ बेहतर समझौते करने का वादा भी किया था.
लूला और बोलसोनारो के बीच टक्कर
लूला ने ब्राजील के प्रति अमेरिकी पॉलिसी की आलोचना की थी, जिनमें ड्रग ट्रैफिकिंग करने वाले समूहों को विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित करने और ब्राजीलियाई एक्सपोर्ट पर लगाए गए शुल्क जैसे विषय शामिल थे.
लूला और बोलसोनारो एक दूसरे के कड़े विरोधी है. ऐसे में दोनों के क्राइम, सामाजिक कल्याण, अमेरिका के साथ संबंधों और जलवायु जैसे मुद्दों पर विपरीत और गहरे मतभेद थे.
ट्रंप के लिए झटका
लूला ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत 1970 के दशक में एक यूनियन लीडर के तौर पर की थी. साल 2018 में उन्हें भ्रष्टाचार के मामले में जेल जाना पड़ा था, लेकिन जज का फैसला पक्षपाती होने के चलते उन्हें 580 दिनों के बाद रिहा कर दिया गया. साल 2022 में लूला ने पूर्व राष्ट्रपति जायर बोलसोनारो को चुनाव में बेहद कम अंतर से हराया था. वहीं, फ्लावियो बोलसोनारो ब्राजील के पूर्व राष्ट्रपति जायर बोलसोनारो के बेटे हैं. उनके परिवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का करीबी माना जाता है. पहले राउंड की वोटिंग में बोलसोनारो लूला से आगे चल रहे थे, लेकिन फिर बाद में बाजी पलट गई.
पहले राउंड में पीछे होने के बावजूद कैसे विजयी हुए लूला?
पहले राउंड में हारने वाले उम्मीदवारों के समर्थकों को अगले राउंड में फ्लावियो या लूला में से किसी एक को मत देना था. यह जीत का पूरा डाइनेमिक बदल सकता था. वहीं, चुनाव से पहले किए गए सर्वे में पाया गया कि 49 प्रतिशत महिलाओं ने लूला को समर्थन दिया, जबकि फ्लावियो को केवल 40 प्रतिशत महिलाओं का ही समर्थन मिला. इसके अलावा 52 प्रतिशत कैथोलिक वोटर्स की ओर से भी लूला को समर्थन दिया गया, जबकि फ्लावियो को सिर्फ 42 प्रतिशत ही सपोर्ट मिला.
लूला ने साफ कहा था कि ब्राजील को खुद के फैसले खुद से ही लेने चाहिए. उन्होंने यह भी कहा था कि अमेरिका की ओर से बनाए जा रहे दबाव के बावजूद ब्राजील की आजादी बनी रहनी चाहिए. यही वजह है कि बहुत से लोग उनसे ज्यादा कनेक्ट हुए.