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ब्यूटी पेजेंट बैन के बाद अब फांसी का कानून बहाल, इस अफ्रीकी देश के फैसले पर मचा बवाल

बुर्किना फासो में मौत की सजा को फिर लागू कर दिया गया है. इससे पहले जून में ब्यूटी पेजेंट को बैन कर दिया गया था. 20 अक्टूबर को अंतरिम संसद ने नई दंड संहिता को मंजूरी दी थी.

Written By Rachit Kumar
Published: Oct 24, 2026, 12:38 PM IST | Updated: Oct 24, 2026, 12:40 PM IST
Image Credit: बुर्किना फासो के फैसले से मानवाधिकार संगठनों की त्योरियां चढ़ गई हैं.
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 ब्यूटी पेजेंट पर बैन के बाद मुल्क में मौत की सजा फिर से लागू करने के ऐलान के बाद दुनिया की नजरें बुर्किना फासो की तरफ मुड़ गई हैं. इस मुल्क में कैप्टन इब्राहिम ट्राओरे की अगुआई वाली आर्मी सरकार का राज है.  20 अक्टूबर 2026 को देश की अंतरिम संसद ने सबकी सहमति के बाद नई दंड संहिता को मंजूरी दी. इसके तहत आतंकवाद, देशद्रोह और जासूसी जैसे गंभीर अपराधों के लिए मौत की सजा दी जा सकेगी.

सभी 71 सांसदों ने इस कानून का समर्थन किया, जिससे 2018 में मौत की सजा को खत्म करने का फैसला पलट गया. देश में आखिरी बार 1988 में किसी को फांसी दी गई थी.

न्याय मंत्री एडसो रोड्रिग बायला ने इस फैसले का बचाव करते हुए कहा कि आतंकवाद से निपटने और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सख्त सजा की जरूरत थी.

पूरे देश में ब्यूटी पेजेंट पर रोक

8 जून 2026 को घोषित एक अलग फैसले में, बुर्किना फासो के कम्युनिकेशन, कल्चर, आर्ट और टूरिज्म मिनिस्ट्री ने पूरे देश में ब्यूटी पेजेंट पर रोक लगा दी थी.अधिकारियों ने कहा कि ये बैन तब तक लागू रहेंगे, जब तक कि नए नियम नहीं बन जाते. सरकार ने इस दौरान ब्यूटी पेजेंट के लिए इजाजत देना भी बंद कर दिया है.

हालांकि, यह रोक मौत की सजा को फिर से लागू करने से कई महीने पहले ही घोषित कर दी गई थी.

युवा महिलाओं के लिए साइंस कॉम्पिटिशन

अगस्त में, सरकार ने 'हाकिली मौसो'नाम का एक नेशनल साइंस कॉम्पिटिशन शुरू किया, जिसका मकसद युवा महिलाओं को मैथ्स, फिजिक्स और केमिस्ट्री में पढ़ाई करने को बढ़ावा देना है.

इस कार्यक्रम में 84 लोगों ने हिस्सा लिया, जिनमें से बेहतरीन परफॉर्म करने वाले स्टूडेंट्स को अवॉर्ड और पढ़ाई में मदद दी गई.

बाद में राष्ट्रपति ट्राओरे ने विजेताओं से मुलाकात की और उन्हें साइंस एंड टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में अपना करियर बनाने के लिए कहा.

मानवाधिकारों को लेकर टेंशन

सरकार के इन फैसलों ने व्यक्तिगत आजादी और मानवाधिकारों को लेकर बहस छेड़ दी है. 'ह्यूमन राइट्स वॉच' ने मौत की सजा की वापसी की आलोचना करते हुए चेतावनी दी है कि इसका इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ किया जा सकता है और इससे नागरिक स्वतंत्रता पर पहले से मौजूद प्रतिबंध और भी सख्त हो सकते हैं.

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी मौत की सजा का विरोध किया है और इसे जीवन के अधिकार का एक ऐसा उल्लंघन बताया है जिसे सुधारा नहीं जा सकता.

वहीं, ब्यूटी पेजेंट पर लगाई गई रोक को लेकर लोगों की राय बंटी हुई है. इसके समर्थक महिलाओं की शैक्षणिक उपलब्धियों को ज्यादा मान्यता मिलने का स्वागत कर रहे हैं, जबकि आलोचकों का तर्क है कि महिलाओं को अपनी रुचि की चीजें चुनने के लिए आजाद होना चाहिए. सितंबर 2022 में ट्राओरे के सत्ता पर कब्जा करने के बाद से बुर्किना फासो में सैन्य शासन है.

हाल की ये घटनाएं सुरक्षा, संस्कृति और निजी आजादी के प्रति सरकार के बदलते नजरिए की तस्वीर पेश करती हैं.

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About the Author

रचित कुमार जी न्यूज डिजिटल में असिस्टेंट एडिटर हैं. देश, दुनिया और डिफेंस की खबरों को आसान भाषा में बताने में महारत हासिल है. जी न्यूज से मई 2022 में जुड़े और शिफ्ट देखने का 12 साल से ज्यादा का अनुभव है. जी न्यूज में Best Performer अवॉर्ड भी मिल चुका है. जी न्यूज, आजतक और एबीपी न्यूज में शिफ्ट देखते हुए महामहिम, बिहार के बाहुबली सीरीज शुरू की और कई एक्सप्लेनर खबरों पर काम किया.  इंडिया न्यूज और जनसत्ता में शिफ्ट देखने के साथ-साथ ट्रैफिक लाने वाली खबरों को तवज्जो दी. नवभारत टाइम्स से करियर की शुरुआत हुई और वहां तकरीबन ढाई साल तक फ्रंट पेज 2 और देश-विदेश के पन्नों की जिम्मेदारी संभाली. जर्नलिज्म में पोस्टग्रेजुएट और IIMC से डिप्लोमा करने  वाले रचित कुमार 13 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रहे हैं. आप Rachit.kumar@India.com पर सीधे ईमेल कर इनसे जुड़ सकते हैं. 
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