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सुलगा सऊदी परेशान बांग्लादेश: हूती के हमलों के बाद जान बचाएं या नौकरी? कर्ज के बोझ से दबे हजारों कामगारों की टेंशन

अमेरिका की रहनुमाई में अरब जगत का सबसे सुरक्षित मुल्क माना जाने वाला सऊदी दो महीनों से सुलग रहा है. रियाद एयरपोर्ट से लेकर तमाम फौजी छावनियों तक हूतियों ने मिसाइलें और ड्रोन मार-मारकर एक अच्छे खासे देश को धुआं-धुआं कर दिया है. हमले भले ही सऊदी पर हो रहे हों, लेकिन वहां से हजारों किलोमीटर दूर बांग्लादेश में बैठे लोगों का हलक भी सूख रहा है.

Written By Shwetank Ratnamber
Published: Oct 26, 2026, 08:39 AM IST | Updated: Oct 26, 2026, 09:54 AM IST
Image Credit: फाइल फोटो (रॉयटर्स)
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पश्चिम एशिया में खासकर सऊदी अरब पर हूतियों के हमले से मंडरा रहे सुरक्षा संकट का असर सिर्फ हवाई सफर तक सीमित नहीं रह गया है. सऊदी-हूती संघर्ष के चलते रियाद और दम्माम के लिए उड़ानों पर लगी रोक ने प्रवासी कामगारों की वापसी, वीजा की समयसीमा और रोजगार को लेकर अनिश्चितता बढ़ने से बांग्लादेशी करेंसी नए संकट से घिर गई है. हजारों बांग्लादेशी कामगार सऊदी के सुलगने से परेशान हैं. किसी की नौकरी छूट गई है, तो कोई वापस काम पर नहीं जा पा रहा. किसी का वीजा खत्म हो गया है तो किसी का वर्क परमिट रिन्यू नहीं हुआ है. 

सऊदी अरब में करीब 35 लाख बांग्लादेशी रहते हैं. सऊदी अरब जाने वाली फ्लाइट्स किसी तरह बहाल भी हो जाएं तो भी सबसे बड़ा सवाल ये है कि जान बचाएं कि नौकरी.

बांग्लादेश की इकोनॉमी पर नया संकट

शेख हसीना के तख्तापलट से मची लूट खसोट के बाद से तारिक रहमान की नई सरकार चुने जाने के बीच के दौर में पैदा हुए मुश्किल हालातों ने बांग्लादेशी करेंसी टका की सेहत बिगाड़ दी है. विदेशी कर्ज बढ़ने और विदेशी मुद्रा का भंडार घटने की खबरों के बीच मुल्क की माली हालत खस्ता होने के दावे किए जा रहे हैं.

बांग्लादेश इकोनॉमिक रिव्यू 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक, 2024-25 में विदेश में नौकरी पाने वाले बांग्लादेशी मजदूरों में से 86 फीसदी सऊदी अरब, यूएई, कुवैत, कतर और ओमान गए थे. 

बांग्लादेश की सरकार के लिए भी सऊदी पर हूती के हमलों ने टेंशन बढ़ा दी है, क्योंकि विदेशों में काम करने वाले नागरिकों की भेजी गई रकम देश की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण सहारा है. बांग्लादेश के सालाना करीब 30 अरब डॉलर के रेमिटेंस का लगभग आधा हिस्सा सऊदी समेत अन्य खाड़ी देशों से आता है. 

केस स्टडी: कर्ज, नौकरी और कमाई- तीनों पर एक साथ दबाव

बांग्लादेशी अखबारों में लगातार बताया जा रहा है कि कैसे सऊदी पर हूतियों के हमलों ने बांग्लादेशी कामगारों की मुसीबतों को बढ़ा दिया है. कर्ज लेकर सऊदी में नौकरी करने गए युवाओं की किश्तें जानी हैं और उनकी नौकरी का कुछ अता-पता नहीं है. 

बांग्लादेशी न्यूज़ आउटलेट 'द डेली स्टार' में मोहम्मद रेजाउल करीम समेत कई युवाओं की परेशानियों को बयां करने वाली रिपोर्ट में युवाओं के इमोशंस और आंसू छिपे हैं. 

सऊदी अरब में नौकरी के लिए कर्ज लेने वाले करीम की फ्लाइट कैंसिल हो गई थी. उन्हें 11 अक्टूबर को रियाद के लिए रवाना होना था. उनका वीजा 5 नवंबर को खत्म हो रहा था. उन्होंने अपना दुखड़ा रोते हुए कहा, 'समय रहते पहुंच जाता तो वीजा रिन्यू कराने में आसानी होती, लेकिन हूतियों के चक्कर में बांग्लादेश में ही फंस जाने की वजह से उनकी तमाम ख्वाहिशों और अच्छे भविष्य के सपनों पर पानी फिर गया.'

सऊदी अरब में काम करने गए ऐसे कई और लोग हूती के हमलों की मार का शिकार बने हैं. Prothom Alo की एक रिपोर्ट के मुताबिक बांग्लादेश और सऊदी अरब के बीच कुछ हफ्तों में सीधी और कनेक्टिंग उड़ानों समेत 135 फ्लाइट्स रद्द हो चुकी हैं. जिसका बुरा असर करीब 20 हजार से ज्याजा यात्रियों पर पड़ा है, इनमें वो लोग भी थे जिन्हें अपनी नौकरी पर वापस पहुंचना था.

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About the Author

श्वेतांक रत्नाम्बर वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें टीवी और डिजिटल न्यूज़ मीडिया में 22 वर्षों से ज्यादा का व्यापक अनुभव है. वर्तमान में वे Zee News (Hindi) की डिजिटल टीम में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय (देश-दुनिया) खबरों की डेस्क पर कार्यरत हैं. समसामयिक मुद्दों, वैश्विक राजनीति और कूटनीति पर गहरी समझ रखने वाले श्वेतांक जटिल अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों और राजनीतिक समीकरणों का सटीक विश्लेषण करने के विशेषज्ञ हैं.Zee News डिजिटल से पहले उन्होंने ज़ी मीडिया नेटवर्क के ग्लोबल न्यूज़ चैनल 'WION' के साथ काम किया है. इस दौरान उन्होंने 'Gravitas', 'The West Asia Post' और 'One Africa' जैसे कई प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय प्राइम-टाइम शोज़ के हिंदी प्रोडक्शन और इंटरप्रिटेशन में अहम भूमिका निभाई. 2004 से शुरू हुए अपने पत्रकारिता करियर में श्वेतांक ने रिपोर्टिंग और एंकरिंग के साथ-साथ चार लोकसभा और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की व्यापक ग्राउंड कवरेज की है.जामिया मिल्लिया इस्लामिया (JMI), नई दिल्ली से जर्नलिज्म में पीजी डिप्लोमा के बाद मास कम्युनिकेशन और पॉलिटिकल साइंस में मास्टर्स डिग्री हासिल करने वाले श्वेतांक लंबे समय से 'प्रेस क्लब ऑफ इंडिया' (PCI) के सम्मानित सदस्य हैं.आप श्वेतांक रत्नाम्बर से सीधे shwetank.ratnamber@india.com पर ईमेल के जरिए संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा आप उनसे एक्स (ट्विटर), मेटा (फेसबुक) और लिंक्डइन पर भी कनेक्ट कर सकते हैं.' 
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