AMU में 8 साल बाद 'लोकतंत्र का महापर्व': आज तय होगी कैंपस की नई सरकार, जानिए क्यों खास है यह छात्रसंघ?
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में आज छात्रसंघ चुनाव हो रहे हैं. छात्रसंघ चुनाव के लिए सुबह से मतदान शुरू हो गए हैं. शाम 6:00 बजे से वोटो की गिनती शुरू हो होगी. ऐसे में जानिए AMU यूनियन की कहानी
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) में आज यानी 5 नवंबर को 8 साल की लंबी खामोशी के बाद आखिरकार छात्रसंघ चुनाव के लिए वोट डाले जा रहे हैं. सुबह से ही कैंपस के पोलिंग बूथों पर वोटिंग शुरू हो गई है. वोटिंग पूरी होने के बाद देर शाम तक मतगणना होगी और इसके नतीजे भी घोषित कर दिए जाएंगे.
करीब 8 साल बाद हो रहे चुनाव को लेकर पूरे कैंपस में जबरदस्त उत्साह है. आइए जानते हैं कि आखिर एएमयू यूनियन का देश की राजनीति के लिए इतना महत्वपूर्ण क्यों माना जाता है?
1920 से शुरू हुआ सफर
एएमयू का इतिहास सिर्फ शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए ही नहीं, बल्कि भारतीय राजनीति को नई दिशा देने वाले दिग्गज नेताओं के निर्माण के लिए भी जाना जाता है. 1905 में एएमयू की नींव 'मोहम्मडन एंग्लो-ओरिएंटल कॉलेज' के रूप में पड़ी थी, जिसे 1920 में केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा मिला.इसी दौरान 1920-21 में एएमयू यूनियन (AMUSU) का पहला चुनाव हुआ.
1920 में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एएमयू यूनियन के पहले लाइफटाइम मेंबर बने थे. इसके बाद जवाहरलाल नेहरू, डॉ. राजेंद्र प्रसाद और मो. अली जिन्ना जैसी हस्तियां भी इस यूनियन की लाइफ मेंबरशिप ली.
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AMU छात्रसंघ की नर्सरी से संसद तक
एएमयू यूनियन इलेक्शन सिर्फ कैंपस का चुनाव नहीं, बल्कि देश की मुख्यधारा की राजनीति में प्रवेश करने की एक बड़ी सीढ़ी रहा है. इस यूनियन ने देश को राज्यपाल, केंद्रीय मंत्री, सांसद और विधायक दिए हैं. एएमयू यूनियन के अध्यक्ष रहे आरिफ मोहम्मद खान देश की राजनीति का बड़ा चेहरा बने. वे केंद्र में मंत्री रहे और मौजूदा वक्त में केरल के राज्यपाल का पद संभाल रहे हैं.
संसद तक पहुंचे ये दिग्गज
वहीं, समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान एएमयू यूनियन के सचिव रहे. वे कई बार यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री और रामपुर से सांसद-विधायक चुने गए. जबकि, नफीस अहमद छात्र राजनीति से निकलकर उत्तर प्रदेश विधानसभा में विधायक बने और प्रमुख राजनीतिक पदों पर रहे. इनके अलावा रशीद मसूद, सुल्तान सलाहुद्दीन ओवैसी, मोहसिना किदवई जैसे कई सांसद और दिग्गज नेता इसी कैंपस की लोकतांत्रिक बहस से तपकर संसद के गलियारों तक पहुंचे.
कब-कब थमी छात्रसंघ चुनाव की रफ्तार?
एएमयू में छात्रसंघ चुनाव का इतिहास जितना गौरवशाली रहा है, उतना ही यह अस्थायी निलंबन और विवादों से भी जूझा है. कभी देश में आपातकाल तो कभी कैंपस में हुए विवादों और अनुशासनहीनता के चलते चुनाव पर रोक लगाई गई. एएमयू छात्रसंघ चुनाव वर्ष 1965-66, 1973-74, 1988-1989, 1996, 2000-2003, 2007-2010, 2013-14, 2015-16, 2019-2025 में नहीं हुआ.
साल 2018 में आखिरी बार यूनियन इलेक्शन हुआ था. इसके बाद प्रशासनिक कारणों, सुरक्षा चिंताओं और कोरोना महामारी के चलते 8 सालों तक चुनाव स्थगित रहे.
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चुनावी मैदान में कितने महारथी?
लंबी मांग और छात्र आंदोलनों के बाद अब 2026 में फिर से लोकतंत्र की बहाली हो रही है. जानकारी के मुताबिक, इस बार मुख्य पदों के साथ-साथ विभिन्न संकायों के लिए जोरदार मुकाबला है. छात्रसंघ अध्यक्ष के लिए 9 उम्मीदवार, उपाध्यक्ष के लिए 7, सचिव के लिए 3 प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं. इसके अलावा कैबिनेट सदस्य के लिए 46 उम्मीदवार योग्य पाए गए.
ये उम्मीदवार भी आजमा रहे हैं किस्मत
महिला कॉलेज छात्रसंघ चुनाव के लिए अध्यक्ष पद पर 6, उपाध्यक्ष पद पर 4 और सचिव पद पर 5 उम्मीदवार मैदान में हैं, जबकि कैबिनेट सदस्य पद के लिए 18 प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. इसके अलावा यूनिवर्सिटी कोर्ट की सदस्यता के लिए विभिन्न संकायों से उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं. इसमें सबसे ज्यादा 13 उम्मीदवार सामाजिक विज्ञान संकाय से हैं, जबकि कला संकाय से 8 और इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी संकाय से 7 प्रत्याशी मैदान में उतरे हैं.
इतना ही नहीं वाणिज्य संकाय से 6 और प्रबंधन अध्ययन, अनुसंधान एवं अंतरराष्ट्रीय अध्ययन संकाय से भी 6 उम्मीदवार किस्मत आजमा रहे हैं. जबकि, चिकित्सा संकाय और विज्ञान संकाय से 5-5 प्रत्याशी दावेदारी पेश कर रहे हैं.
AMU छात्रसंघ चुनाव पर सबकी नजर
विधि (Law) संकाय से 4 और कृषि विज्ञान एवं धर्मशास्त्र संकायों से 4 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं. जबकि, जीव विज्ञान संकाय और यूनानी चिकित्सा संकाय से 3-3 प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं. बहरहाल, आज शाम को आने वाले नतीजों पर न सिर्फ अलीगढ़, बल्कि पूरे देश की राजनीतिक गलियारों की निगाहें टिकी हुई हैं.