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'यह रोबोट गरीबों की रोटी छीन रहा है': डिलीवरी मशीन के आगे अड़ गईं 78 साल की बुजुर्ग प्रोफेसर; पुलिस ने हथकड़ी लगाकर किया गिरफ्तार

अमेरिका के फिलाडेल्फिया में 78 साल की एक रिटायर्ड प्रोफेसर ने डिलीवरी रोबोट के खिलाफ ऐसा विरोध किया कि पुलिस को बुलाना पड़ गया. प्रोफेसर कैरोलिन मार्विन का आरोप है कि कंपनियां इंसानी डिलीवरी वर्कर्स की जगह मशीनों को ला रही हैं. उन्होंने रोबोट का रास्ता रोक दिया और पुलिस के कहने पर भी वहां से हटने को तैयार नहीं हुईं. अंत में पुलिस ने उन्हें हथकड़ी लगाकर डिसऑर्डरली कंडक्ट का नोटिस दिया.

Written By Santosh Kumar Mishra
Published: Oct 24, 2026, 02:04 PM IST | Updated: Oct 24, 2026, 02:21 PM IST
Image Credit: फुटपाथ पर रोबोट से भिड़ गई 78 वर्षीया रिटायर्ड प्रोफेसर!
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अमेरिका में अब खाना और सामान पहुंचाने के लिए डिलीवरी रोबोट का इस्तेमाल बढ़ रहा है. ये मशीनें फुटपाथ पर चलते हुए लोगों के घर तक ऑर्डर पहुंचाती हैं. लेकिन हर कोई इस बदलाव से खुश नहीं है. फिलाडेल्फिया में रहने वाली 78 साल की रिटायर्ड प्रोफेसर कैरोलिन मार्विन ने इसका विरोध करने का अनोखा तरीका चुना.

द डेली स्टार की रिपोर्ट के अनुसार, कैरोलिन फ्लू का टीका लगवाकर लौट रही थीं. इसी दौरान उनकी नजर उबर ईट्स के लिए काम कर रहे एक ऑटोमैटिक डिलीवरी रोबोट पर पड़ी. यह रोबोट एव्राइड कंपनी की तकनीक से चल रहा था और सड़क किनारे बने फुटपाथ से गुजर रहा था. कैरोलिन ने रोबोट को रास्ता देने के बजाय उसके सामने खड़े होने का फैसला किया. उनका कहना था कि इन मशीनों की वजह से इंसानी डिलीवरी वर्कर्स की नौकरियां खतरे में पड़ रही हैं. उन्होंने रोबोट को आगे बढ़ने से रोक दिया.

'मुझे इसे रोकना ही होगा'

यह घटना फिलाडेल्फिया की फिलबर्ट स्ट्रीट पर हुई, जो रीडिंग टर्मिनल मार्केट के पास है. कैरोलिन के इस विरोध को देखने के लिए आसपास लोग जमा होने लगे. इससे फुटपाथ पर आवाजाही भी प्रभावित हुई. द डेली स्टार की रिपोर्ट में बताया गया है कि पुलिस मौके पर पहुंची और प्रोफेसर से रास्ता छोड़ने को कहा. लेकिन वह अपनी बात पर अड़ी रहीं. उनका तर्क था कि उन्हें पब्लिक फुटपाथ पर खड़े होने और विरोध जताने का संवैधानिक अधिकार है. जब वह बार-बार कहने के बावजूद नहीं हटीं, तो पुलिस ने उन्हें हथकड़ी लगा दी. उनके खिलाफ सार्वजनिक व्यवस्था बिगाड़ने यानी डिसऑर्डरली कंडक्ट का नोटिस जारी किया गया.

मशीनों से नौकरियां छिनने का डर

कैरोलिन मार्विन यूनिवर्सिटी ऑफ पेनसिल्वेनिया के एनेनबर्ग स्कूल ऑफ कम्युनिकेशन में प्रोफेसर एमेरिटस रह चुकी हैं. वह अभिव्यक्ति की आजादी के इतिहास और सिद्धांत जैसे विषय भी पढ़ा चुकी हैं. ऐसे में उनका मानना है कि डिलीवरी रोबोट के खिलाफ खड़ा होना उनके विरोध जताने के अधिकार का हिस्सा है. उन्होंने कहा कि वह जब भी इन रोबोट को देखती हैं, उनके सामने खड़ी होकर उन्हें आगे बढ़ने से रोकने की कोशिश करती हैं. उनका आरोप है कि बड़ी कंपनियां अपना मुनाफा बढ़ाने के लिए इंसानी कर्मचारियों की जगह मशीनों को ला रही हैं. कैरोलिन के मुताबिक, इसका सबसे ज्यादा असर उन डिलीवरी वर्कर्स पर पड़ सकता है, जो घर-घर जाकर लोगों का खाना और सामान पहुंचाते हैं. इन लोगों के लिए यह काम कमाई का जरिया है. अगर कंपनियां धीरे-धीरे उनकी जगह रोबोट का इस्तेमाल करने लगेंगी, तो उनकी नौकरी पर संकट खड़ा हो सकता है.

रोबोट की छोटी-छोटी बातें भी खटकती हैं

प्रोफेसर ने केवल नौकरियों को लेकर ही सवाल नहीं उठाए, बल्कि इन मशीनों से जुड़ी प्राइवेसी की चिंता भी जताई. उनका मानना है कि पब्लिक प्लेस पर घूमने वाले ऐसे रोबोट आसपास के माहौल से जुड़ा डेटा जुटा सकते हैं. इसलिए इनके इस्तेमाल को सिर्फ सुविधा के नजरिए से नहीं देखना चाहिए. उन्होंने रोबोट के डिजाइन पर भी तंज कसा. उनके अनुसार, मशीनों पर दिखने वाले प्यारे चेहरे और डिजिटल दिल जैसे निशान लोगों को आकर्षित करने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं. इससे रोबोट का इस्तेमाल सामान्य और मजेदार लग सकता है, लेकिन उनके पीछे काम करने वाले लोगों की नौकरी का सवाल नजरों से दूर हो जाता है.

कंपनियों के मुनाफे पर उठाए सवाल

कैरोलिन का कहना है कि उनका विरोध उन बड़ी कंपनियों के खिलाफ है, जो अपने फायदे के लिए इंसानी कर्मचारियों को पीछे छोड़ रही हैं. वह खास तौर पर डिलीवरी का काम करने वाले लोगों की चिंता करती हैं. उनके अनुसार, टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल लोगों की मदद के लिए होना चाहिए, न कि सिर्फ कंपनियों का खर्च कम करने और मुनाफा बढ़ाने के लिए. यही वजह है कि वह डिलीवरी रोबोट को रोककर अपना विरोध दर्ज कराती हैं.

आगे भी जारी रखेंगी विरोध

हथकड़ी लगाए जाने के बाद भी कैरोलिन ने अपने विरोध को जारी रखने की बात कही. उन्होंने कहा कि पब्लिक फुटपाथ पर खड़े होकर डिलीवरी रोबोट के खिलाफ प्रदर्शन करना उनका अधिकार है और वह आगे भी ऐसा करना जारी रखेंगी. इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि टेक्नोलॉजी के बढ़ते इस्तेमाल के बीच इंसानी नौकरियों का भविष्य क्या होगा. रोबोट से डिलीवरी तेज और आसान हो सकती है, लेकिन इससे उन लोगों की रोजी-रोटी पर क्या असर पड़ेगा, जो इसी काम से अपना घर चलाते हैं?

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About the Author

संतोष मिश्रा जी न्यूज में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. वह पिछले 4.5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं. ट्रैवल, फीचर, ऑफबीट, ट्रेंडिंग और वायरल खबरों के साथ-साथ टेक और साइंस से जुड़ी खबरों में भी उनकी विशेष विशेषज्ञता है. उनकी खबरें अपनी विश्वसनीयता और सटीक जानकारी के लिए जानी जाती हैं. आसान और सहज भाषा में लिखे गए उनके कंटेंट को पाठक काफी पसंद करते हैं. सोशल मीडिया की दुनिया (Instagram, X, Reddit, Threads और Facebook) पर उनकी अच्छी पकड़ है. वह ट्रेंडिंग विषयों पर लगातार नजर रखते हैं और फ्रेश व यूनिक खबरें पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं. संतोष मिश्रा इससे पहले News Nation और India Ahead जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी काम कर चुके हैं. उन्होंने बुंदेलखंड विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन (PG) किया है.
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