सचिन तेंदुलकर को BCCI ने नहीं दी आजादी: आज भी है इस बात का मलाल, बताया अपने फेवरेट कप्तान का नाम
महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर से जब बतौर कप्तान उनके अनुभव के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उन्हें हमेशा अपनी टीम पूरी तरह से खुद चुनने की आजादी नहीं थी. सचिन ने बताया कि 1990 के दशक की तुलना में आज का BCCI कहीं अधिक पेशेवर संगठन है.
पूर्व भारतीय महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर ने बड़ा राज खोला है. मास्टर ब्लास्टर ने उन दिनों को याद किया जब वो टीम इंडिया के कप्तान थे. हालांकि, उन्हें इया बात का मलाल है कि कप्तानी के दौरान उन्हें टीम चुनने की आजादी नहीं मिलती थी. सचिन ने कहा कि टीम का नेतृत्व करना एक बड़ा सम्मान था, लेकिन उन्हें हमेशा अपनी पसंद की टीम चुनने की आजादी नहीं थी. उन्होंने यह भी कहा कि कप्तान के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान, भारतीय क्रिकेट एक बहुत बुरे दौर से गुजरा.
सचिन तेंदुलकर की पहचान एक महान बल्लेबाज के रूप में होती है, लेकिन बतौर कप्तान उनका सफर अच्छा नहीं रहा था. दो दशक से अधिक लंबे अपने अंतरराष्ट्रीय करियर के दौरान, तेंदुलकर ने 1990 के दशक में दो अलग-अलग मौकों पर भारतीय टीम की कप्तानी की, लेकिन कप्तान के तौर पर उन्हें बहुत अधिक सफलता नहीं मिली.
सचिन को नहीं मिली टीम चुनने की आजादी
मंगलवार को रेडिट पर 'आस्क मी एनीथिंग' (मुझसे कुछ भी पूछें) सत्र के दौरान उन्होंने अपनी कप्तानी के बारे में खुलकर बात की और अपने पसंदीदा भारतीय कप्तानों के नाम भी बताए. इंटरनेशनल क्रिकेट में 100 शतक जड़ने वाले महान खिलाड़ी ने कहा,
''कप्तान के तौर पर टीम का नेतृत्व करना बहुत सम्मान की बात थी. हालांकि, मुझे हमेशा अपनी टीम पूरी तरह से खुद चुनने की आजादी नहीं थी. 1990 के दशक की तुलना में आज का BCCI कहीं अधिक पेशेवर संगठन है. उस दौर में भारतीय क्रिकेट एक बहुत ही बुरे दौर से भी गुजरा था.''
सचिन का फेवरेट कप्तान कौन?
24 साल के लंबे अंतरराष्ट्रीय करियर के दौरान सचिन तेंदुलकर कई कप्तानों के अंदर खेले, जिसमें कृष्णमाचारी श्रीकांत से लेकर एमएस धोनी तक का नाम शामिल है. टेस्ट और वनडे में सबसे ज्यादा मैच खेलने वाले और सबसे अधिक रन बनाने वाले खिलाड़ी ने सौरव गांगुली और एमएस धोनी को अपना पसंदीदा कप्तान बताया.
सचिन तेंदुलकर ने कहा, ''जहां तक मेरे पसंदीदा कप्तानों की बात है, तो सौरव गांगुली और एमएस धोनी निश्चित रूप से मेरी सूची में सबसे ऊपर होंगे.''
धोनी की कप्तानी में सपना हुआ पूरा
अपने 24 सालों के ODI करियर में सचिन तेंदुलकर ने 6 वर्ल्ड कप में हिस्सा लिया. विश्व चैंपियन बनने के लिए उन्हें लंबा इंतजार करना पड़ा. 2011 में एमएस धोनी की कप्तानी में उनका सपना पूरा हुआ था. वहीं, सौरव गांगुली की कैप्टेनसी में टीम इंडिया ने 2003 वर्ल्ड कप में फाइनल तक का सफर तय किया था. सचिन टूर्नामेंट के टॉप स्कोरर थे, लेकिन ट्रॉफी जीतने का ख्वाब पूरा नहीं हुआ था.
सचिन ने की टेम्बा बावुमा की तारीफ
सचिन तेंदुलकर ने टेम्बा बावुमा की कप्तानी की भी तारीफ की और कहा कि इस दाएं हाथ के बल्लेबाज ने आगे बढ़कर टीम का नेतृत्व किया है और शानदार नतीजे दिए हैं. उन्होंने कहा, "मैं सच में टेम्बा बावुमा के जज्बे की तारीफ करता हूं. उन्होंने आगे बढ़कर टीम की कमान संभाली है और दक्षिण अफ्रीकी क्रिकेट के लिए बेहतरीन नतीजे दिए हैं. दक्षिण अफ्रीका का ICC खिताब जीतना विश्व क्रिकेट के लिए बहुत अच्छी बात है.''
सचिन से 15 साल के वैभव सूर्यवंशी को दलीप ट्रॉफी 2026 के लिए ईस्ट जोन का उप-कप्तान बनाए जाने के फैसले पर भी उनकी राय पूछी गई, जिससे वे खुश नहीं थे. सचिन को लगता है कि वैभव सूर्यवंशी को उप-कप्तान बनाना अभी बहुत जल्दबाजी होगी. उन्होंने सुझाव दिया है कि उन्हें लाल गेंद से और अधिक मैच खेलने दिए जाएं और एक बार में एक ही कदम आगे बढ़ाया जाए.
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