Sankat Mochan Temple: 16वीं शताब्दी का वह पवित्र धाम, जहां तुलसीदास जी को मिले थे हनुमान जी के साक्षात दर्शन
अस्सी घाट के पास स्थित काशी का ऐतिहासिक संकट मोचन हनुमान मंदिर तुलसीदास जी द्वारा स्थापित वो पावन स्थल है, जहां हनुमान जी के दर्शन पूजन से भक्तों के हर प्रकार के संकट टल जाते हैं.
अगर आप कभी बनारस घूमने गए होंगे तो आपने जरूर संकट मोचन मंदिर का नाम सुना होगा. ये मंदिर बनारस के सबसे फेमस मंदिर में से एक है. ये अस्सी घाट के पास स्थित है. संकट मोचन नाम का अर्थ संकटों को हरने वाला है.
कहा जाता है कि जो भी वहां दर्शन करने जाता है, और सच्चे मन से प्रार्थना करता है, उसकी सारी मनोकामना पूरी हो जाती है. आज हम इस मंदिर के बारे में पूरे डिटेल से बताएंगे.
किसने की थी मंदिर की स्थापना?
इस मंदिर को 16वीं शताब्दी में बनवाया गया था. अब मन में सवाल आएगा कि इसकी स्थापना किसने की थी, तो वो प्रसिद्ध संत-कवि गोस्वामी तुलसीदास जी हैं.
इन्होंने रामचरितमानस और हनुमान चालीसा की रचना की थी. मान्यताओं की मानें तो तुलसीदास जी इसी जगह जप और ध्यान किया करते थे.
उनकी भक्ति और तपस्या को देखकर हनुमान जी खुश हुए, और तुलसीदास जी को इसी स्थान पर दर्शन दिया.
सिंदूर और गेंदे के फूलों से सजता है गर्भगृह
संकट मोचन मंदिर के गर्भगृह में रखी हुई हनुमान जी की मूर्ति बहुत मनमोहक है. इस मूर्ति को हमेशा सिंदूर और गेंदे के ताजे फूलों से सजाया जाता है.
हफ्ते के हर मंगलवार और शनिवार को मंदिर परिसर में भक्तों की बहुत भारी भीड़ जुटती है. इन खास दिनों में श्रद्धालु हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करते हैं.
यहां जब लोग दर्शन करने आते हैं तो बजरंगबली को लड्डू, तुलसी के पत्ते, फूल और दीप चढ़ाते हैं.
संकट मोचन संगीत समारोह और 103 वर्षों की परंपरा
इस जगह बस पूजा-पाठ ही नहीं होता है. ये काशी की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान का भी जरूरी हिस्सा है.
हर साल इस मंदिर के परिसर में संकट मोचन संगीत समारोह का आयोजन किया जाता है. ये पूरे 6 दिन चलता है.
इसमें देश भर से लगभग 150 कलाकार भाग लेते हैं. जिसे देखने के लिए भी बहुत लोग आते हैं.
आस्था का प्रतीक है ये धाम
मंदिर के बाहर तो काफी शोर शराबा रहता है. लेकिन अगर आप मंदिर परिसर में जाएंगे तो अंदर आपको पेड़ पौधे और बहुत सारे बंदर मिलेंगे.
वहां लोग हनुमान चालिसा लेकर बैठे रहते हैं. साथ ही अंदर श्री राम जी का भी मंदिर है, तो अगर आप दर्शन करने जाएं, तो उनका चरण स्पर्श करना न भूलें.
डिस्क्लोमर: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक इतिहास और स्थानीय परंपराओं पर आधारित है. हमारा उद्देश्य पाठकों तक सही और प्रामाणिक सूचना पहुंचाना है.