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Sankat Mochan Temple: 16वीं शताब्दी का वह पवित्र धाम, जहां तुलसीदास जी को मिले थे हनुमान जी के साक्षात दर्शन

अस्सी घाट के पास स्थित काशी का ऐतिहासिक संकट मोचन हनुमान मंदिर तुलसीदास जी द्वारा स्थापित वो पावन स्थल है, जहां हनुमान जी के दर्शन पूजन से भक्तों के हर प्रकार के संकट टल जाते हैं.

Written By Harsh Singh
Published: Oct 26, 2026, 07:13 PM IST | Updated: Oct 26, 2026, 08:27 PM IST
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अगर आप कभी बनारस घूमने गए होंगे तो आपने जरूर संकट मोचन मंदिर का नाम सुना होगा. ये मंदिर बनारस के सबसे फेमस मंदिर में से एक है. ये अस्सी घाट के पास स्थित है. संकट मोचन नाम का अर्थ संकटों को हरने वाला है.

कहा जाता है कि जो भी वहां दर्शन करने जाता है, और सच्चे मन से प्रार्थना करता है, उसकी सारी मनोकामना पूरी हो जाती है. आज हम इस मंदिर के बारे में पूरे डिटेल से बताएंगे.

किसने की थी मंदिर की स्थापना?

इस मंदिर को 16वीं शताब्दी में बनवाया गया था. अब मन में सवाल आएगा कि इसकी स्थापना किसने की थी, तो वो प्रसिद्ध संत-कवि गोस्वामी तुलसीदास जी हैं.

इन्होंने रामचरितमानस और हनुमान चालीसा की रचना की थी. मान्यताओं की मानें तो तुलसीदास जी इसी जगह जप और ध्यान किया करते थे.

उनकी भक्ति और तपस्या को देखकर हनुमान जी खुश हुए, और तुलसीदास जी को इसी स्थान पर दर्शन दिया.

सिंदूर और गेंदे के फूलों से सजता है गर्भगृह

संकट मोचन मंदिर के गर्भगृह में रखी हुई हनुमान जी की मूर्ति बहुत मनमोहक है. इस मूर्ति को हमेशा सिंदूर और गेंदे के ताजे फूलों से सजाया जाता है.

हफ्ते के हर मंगलवार और शनिवार को मंदिर परिसर में भक्तों की बहुत भारी भीड़ जुटती है. इन खास दिनों में श्रद्धालु हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करते हैं.

यहां जब लोग दर्शन करने आते हैं तो बजरंगबली को लड्डू, तुलसी के पत्ते, फूल और दीप चढ़ाते हैं.

संकट मोचन संगीत समारोह और 103 वर्षों की परंपरा

इस जगह बस पूजा-पाठ ही नहीं होता है. ये काशी की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान का भी जरूरी हिस्सा है.

हर साल इस मंदिर के परिसर में संकट मोचन संगीत समारोह का आयोजन किया जाता है. ये पूरे 6 दिन चलता है.

इसमें देश भर से लगभग 150 कलाकार भाग लेते हैं. जिसे देखने के लिए भी बहुत लोग आते हैं.

आस्था का प्रतीक है ये धाम

मंदिर के बाहर तो काफी शोर शराबा रहता है. लेकिन अगर आप मंदिर परिसर में जाएंगे तो अंदर आपको पेड़ पौधे और बहुत सारे बंदर मिलेंगे.

वहां लोग हनुमान चालिसा लेकर बैठे रहते हैं. साथ ही अंदर श्री राम जी का भी मंदिर है, तो अगर आप दर्शन करने जाएं, तो उनका चरण स्पर्श करना न भूलें.
डिस्क्लोमर: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक इतिहास और स्थानीय परंपराओं पर आधारित है. हमारा उद्देश्य पाठकों तक सही और प्रामाणिक सूचना पहुंचाना है.

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About the Author

हर्ष सिंह जी न्यूज डिजिटल में एक अनुभवी और धारदार शैली के पत्रकार हैं. उन्होंने मार्च 2024 में जी न्यूज जॉइन किया था. वर्तमान में हर्ष धर्म और ज्योतिष से जुड़ी खबरों की खास कवरेज कर रहे हैं. वे देश-दुनिया के धार्मिक आयोजनों, अध्यात्म और ज्योतिषीय गणनाओं से जुड़े जरूरी अपडेट्स दर्शकों तक पूरी सटीकता के साथ पहुंचाते हैं. हर्ष को उनकी फैक्ट-आधारित और भरोसेमंद लेखन शैली के लिए जाना जाता है.बनारस के महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट-ग्रेजुएशन करने वाले हर्ष अपनी पूरी ऊर्जा और समझ के साथ धर्म-कर्म और ऐस्ट्रो की दुनिया के खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचा रहे हैं.अगर आप हर्ष सिंह से संपर्क करना चाहते हैं या उनसे जुड़ा कोई सुझाव साझा करना चाहते हैं, तो उन्हें इस ईमेल आईडी पर लिख सकते हैं: Harsh.singh@India.com
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