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यहां समंदर निगल जाता है शिव मंदिर, पानी उतरने पर होते हैं भोलेनाथ के दर्शन, पांडवों से जुड़ा है रहस्य

Nishkalank Mahadev Temple: गुजरात के भावनगर में महादेव का एक ऐसा मंदिर स्थित है जो आश्चर्यों से भरा है. ऐसी मान्यता है कि समुद्र के बीच स्थित इस मंदिर का महाभारत काल से भी संबंध हैं. आइए इसके बारे में विस्तार से जानें.

यहां समंदर निगल जाता है शिव मंदिर, पानी उतरने पर होते हैं भोलेनाथ के दर्शन, पांडवों से जुड़ा है रहस्य

Nishkalank Mahadev Temple: भारत में महादेव के अनेक ऐसे मंदिर हैं जिनकी खूबियां हर किसी को आश्चर्य से भर देती हैं. इसी तरह भगवान शिव को ही समर्पित एक मंदिर गुजरात के भावनगर में स्थित है जहां के शिवलिंग के दर्शन पाते ही व्यक्ति धन्य हो जाता है. इस मंदिर की मान्यताएं और यहां की अनोखी परंपराएं जानकर किसी को भी हैरानी हो सकती है. इस मंदिर का नाम है निष्कलंक महादेव मंदिर जहां की सबसे खास बात यह है कि यहां पर अपनी मर्जी से किसी भी समय दर्शन नहीं किया जा सकता है. इसके लिए इंतजार भी करना पड़ सकता है. हालांकि अगर यहां जो भी भक्त महादेव के दर्शन करता है उसके जीवन का पाप कट जाता है. आइए जानें निष्कलंक महादेव मंदिर का पांडवों से क्या संबंध है और इसकी पौराणिक कथा क्या है.

कहां स्थित है निष्कलंक महादेव मंदिर?

निष्कलंक महादेव मंदिर भावनगर शहर से करीब 25 से 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है जिसकी विशेष बात ये है कि यह समुद्र के बीच में है. मंदिर तक जाने के लिए समुद्र की लहरों और ज्वार-भाटा का आंकलन करना पड़ता है. जब समुद्र का पानी पीछे हटता है या उतरता है तब जाकर कहीं महादेव भक्तों को दर्शन देते हैं. समुद्र में पानी का स्तर बढ़ते ही ऐसा लगता है जैसे मंदिर को समुद्र ने निगल लिया है. ऐसी स्थिति में मंदिर तक जाने का रास्ता भी डूब जाता है. मंदिर तक पहुंचने के लिए समुद्र के पानी के उतरने का इंतजार करना पड़ता है क्योंकि पानी उतरने पर ही मंदिर का रास्ता दिख पाता है. जिस पर पैदल चलकर मंदिर पहुंचा जाता हैं. यही कारण है कि श्रद्धालु मानते हैं कि जब तक महादेव नहीं चाहते हैं तब तक भक्त उनके दर्शन नहीं पा सकते हैं.  हालांकि दूर से देखने पर मंदिर की ध्वजा और पूजा स्थल को समुद्र के बीच देखा जा सकता है. ध्यान दें, दर्शन करने के बाद यहां से समय रहते और रात होने से पहले लौटना जरूरी होता है.

निष्कलंक महादेव मंदिर पांडवों से संबंध

धार्मिक मान्यता है कि निष्कलंक महादेव मंदिर का संबंध महाभारत काल से है. कथा है कि युद्ध समाप्त होने के बाद पांडव अपने गुरु और रिश्तेदारों की मृत्यु से दुखी थे. युद्ध में हुए विनाश से पांडव अपराधबोध से ग्रसित थे. पांडव इस बोझ से मुक्ति होना चाहते थे. ऐसे में वे सुझाव लेने के लिए भगवान श्रीकृष्ण के पास गए. भगवान ने पांडवों को सुझाव दिया कि शिव जी की उपासना करो. तब पांडवों ने शिव जी की यहां आकर उपासना की.

निष्कलंक महादेव के पांच शिवलिंग

समुद्र के किनारे बैठकर भगवान शिव की पांडवों ने घोर तपस्या की. पांडवों की भक्ति से महादेव प्रसन्न हुए और पांच शिवलिंग के रूप में उन्हें दर्शन दिए. ऐसी मान्यता है कि शिव जी की कृपा से ही पांडवों को अपने अपराधबोध और पापों से मुक्ति मिली. शिव जी के दर्शन पाकर पांडव अपने मन के बोझ से भी मुक्त हो गए. शिव जी ने पांडवों के कलंक को दूर किया जिसके कारण ही इस मंदिर के महादेव को निष्कलंक महादेव के रूप में पूजा की जाती है. हालांकि, ये केवल पौराणिक और लोक कथाओं से जुड़ी मान्यताएं हैं. निष्कलंक महादेव मंदिर में पांच शिवलिंग हैं जिसके कारण ही इसे पांडवों से संबंधित माना जाता है.

निष्कलंक महादेव मंदिर में दर्शन के लिए बरतें ये सावधानियां

निष्कलंक महादेव मंदिर जाने का पैदल रास्ता गीला और फिसलन वाला हो सकता है तो ध्यान से चलें.
आरामदायक और अच्छी पकड़ की चप्पल या जूते पहनें.
मौसम का विशेष ध्यान रखें. तेज हवा चले या ऊंची लहरें हों तो सावधानी बरतें.
स्थानीय लोगों की सलाह जरूर लें. सुरक्षा संबंधी निर्देशों का पालन करें. समय से मंदिर से लौट आएं.

(डिस्क्लेमर: यह लेख धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक कथाओं और लोक परंपराओं पर आधारित है. इसकी सत्यता की हम पुष्टि नहीं करते. मंदिर से जुड़ी जानकारी सामान्य जानकारी हेतु है, यात्रा से पहले स्थानीय प्रशासन से सलाह लें.)

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About the Author

Padma Shree Shubham

Padma Shree Shubham

पद्मा श्री शुभम् को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव. मॉस कम्‍युनिकेशन ग्रेजुएट और हिंदी लिटरेचर से पोस्‍ट ग्रेजुएट. मीडिया में डिजिटल प्लेटफॉर्म से करियर शुरू करने के बाद कई संस्थाओं में काम किया. Nedrick News, TFI Post जैसी संस्थाओं में कार्यरत रहीं. इसके बाद Zee News जॉइन किया. समाचार और वर्तमान घटनाओं पर लिखने पढ़ने में रुचि. धर्म और ज्योतिष में अधिक रुचि. वर्तमान में धर्म और ज्योतिष संबंधी लेख लिखने में कार्यरत. पद्मा से आप padma.shubham@India.com मेल के जरिए सीधे संपर्क कर सकते हैं.
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