Masik Shivratri November 2026: कब है कार्तिक माह की मासिक शिवरात्रि, कितने देर का होगा शिव पूजा मुहूर्त?
Masik Shivratri November 2026: कार्तिक माह का मासिक शिवरात्रि व्रत कब रख जाएगा, इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है और इस दिन शिव जी और मां पार्वती की उपासना किस विधि से करें? आइए इस बारे में विस्तार से जानें.
Masik Shivratri November 2026: मासिक शिवरात्रि व्रत का विशेष महत्व बताया गया है. यह पर्व महादेव को समर्पित है, ऐसे में इस दिन जो भक्त व्रत रखकर विधि-विधान से शिव जी और मां पार्वती की पूजा करते हैं उन्हें सुख-समृद्धि और सौभाग्य प्राप्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है. मासिक शिवरात्रि की पूजा निशिता काल में करने का विधान हैं. आइए जानें इस साल कार्तिक माह का मासिक शिवरात्रि व्रत कब रखा जाएगा और इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि क्या है.
कार्तिक मासिक शिवरात्रि कब है?
कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 7 नवंबर को सुबह 10:47 बजे शुरू होकर 8 नवंबर को सुबह 11:27 बजे समाप्त होगी. निशिता काल के अनुसार कार्तिक मास का मासिक शिवरात्रि व्रत 7 नवंबर 2026, शनिवार को रखा जाएगा.
मासिक शिवरात्रि के लिए शुभ मुहूर्त
मासिक शिवरात्रि पर निशिता काल में पूजा की जाती है. ऐसे में पूजा के लिए शुभ मुहूर्त 7 नवंबर की रात 11:39 बजे से लेकर आर्धरात्री 12:31 (8 नवंबर ) तक होगा. इस तरह पूजा करने के लिए केवल 52 मिनट का समय मिलेगा. इस दिन अमृत काल 7 नवंबर की रात 11:09 बजे से लेकर आर्धरात्री 12:49 AM (8 नवंबर ) तक होगा. ध्यान दें किसी भी देवी-देवता की पूजा शुभ मुहूर्त में करने से पूजा का पूरा फल प्राप्त होता है और ऐसी पूजा सीधे भगवान तक पहुंचती है. ऐसे में मासिक शिवरात्रि की पूजा को लेकर भी शुभ मुहूर्त का विशेष ध्यान रखें.
मासिक शिवरात्रि पूजा विधि
- व्रत रखने वाले शिवभक्त इस दिन सुबह उठकर स्नान आदि कर साफ वस्त्र पहन लें.
- शिव जी का ध्यान करें और व्रत का संकल्प करें.
- इसके बाद नियमित पूजा करें और व्रत रखें.
- अब निशिता काल में फिर से स्नान आदि करें और पूजा के लिए बैठ जाए.
- शिवलिंग पर गंगाजल अर्पित करें.
- दूध, दही, शहद व घी से महादेव का अभिषेक करें.
- बेलपत्र, भांग, धतूरा आदि अर्पित करें.
- सफेद पुष्प चढ़ाएं और शिवलिंग पर चंदन लेप लगाएं.
- अब महादेव को उनके प्रिय भोग सफेद बर्फी या मावे की मिठाई अर्पित करें.
- धूप-दीप जलाएं और परिवार के साथ शिव जी की आरती करें.
- अब शिवरात्रि व्रत कथा का पाठ करें और शिव मंत्रों का जाप करें.
- पूजा में हुई किसी भी तरह की भूल के लिए क्षमा मांगे और पूरे परिवार में प्रसाद बांटें.
(डिस्क्लेमर- यह सामग्री धार्मिक मान्यताओं, प्रचलित परंपराओं एवं उपलब्ध धार्मिक स्रोतों पर आधारित है. विभिन्न क्षेत्रों, समुदायों और परंपराओं के अनुसार व्रत-त्योहारों की तिथि, पूजा-विधि एवं मान्यताओं में अंतर संभव है. पाठक इसे सामान्य धार्मिक जानकारी के रूप में देखें.)