करवा चौथ व्रत पूरा हो जाए तो मिट्टी के करवा और उसकी सामग्री का क्या करें? पूजा के बाद के नियम जरूर जान लें
करवा चौथ पूजा के बाद जो मिट्टी का करवा होता है उसे लेकर लोगों में कनफ्यूजन होता है कि आखिर उसका क्या करें और उसके अंदर की सामग्री का क्या करें? आइए इस बारे में विस्तार से जानें.
करवा चौथ का व्रत का बड़ा महत्व है. महिलाएं पूजा कर अपने पति के हाथ से व्रत तोड़ती हैं और पूजा को संपन्न करती हैं. इस पूजा में मिट्टी के करवा का बड़ा महत्व है. मिट्टी के करवा का इस्तेमाल क्या पूजा के बाद भी कर सकते हैं, करवा के भीतर की सामग्री का क्या करें, इसे लेकर लोगों के मन में कभी न कभी जरूर सवाल उठते हैं. कुछ लोग करवा को रख लेते हैं तो कुछ लोग इसे नदी में प्रवाहित कर देते हैं. आइए इस लेख में विस्तार से जानें कि आखिर पूजा के बाद करवा और उसके भीतर की सामग्री का क्या करें.
मिट्टी के करवे का क्या करें?
करवा चौथ में जिस करवा का आपने इस्तेमाल किया था अगर वह टूटा-फूटा नहीं है तो पूजा के बाद उसे सुरक्षित रख दें. इसी करवे का इस्तेमाल दूसरे व्रत-त्योहार पर कर सकती हैं जैसे जल्दी ही अहोई अष्टमी की पूजा की जाएगी तो इसे अच्छे से रख दें. करवा को अगले साल की पूजा के लिए भी रख सकती हैं.
तुलसी या अन्य पौधा लगाएं
अगर करवा टूट-फूट गई हो तो उसे गमले में डाल दें या नदी में प्रवाहित कर दें. ध्यान दें करवा सादी मिट्टी से बना है और पानी निकलने का उसमें छेद है तो उसमें तुलसी या अन्य पौधा लगाना भी सही होगा.
पवित्र पेड़ के नीचे रखें
अगर आप करवे को घर में न रखना चाहें तो इसे किसी पवित्र पेड़ के नीचे रख दें जैसे- बरगद, पीपल, नीम या आम की छांव या जड़ में रख दें या दबा दें. ध्यान रहे फेंकना नहीं है बल्कि सम्मानपूर्वक रखना है.
करवा के अन्न का क्या करें?
पूजा के समय करवा में कुछ अन्न डाले जाते हैं जैसे साबूत चावल, गेहूं और कई दूसरे अन्न. धार्मिक परंपराओं में ऐसा करना समृद्धि का प्रतीक माना जाता है. पूजा के बाद अनाज को या तो दान कर दें या फिर पक्षियों को डाल दें.
पूजा की सींक का क्या करें?
करवा चौथ की पूजा में जो सींक का इस्तेमाल किया था, अगर वे टूटी न हों तो उसे भी अगली पूजा के लिए सुरक्षित रख सकती हैं. अगर टूट गई है तो उसे भी गमले में ही गाड़ दें.
(डिस्क्लेमर- यह सामग्री धार्मिक मान्यताओं, प्रचलित परंपराओं एवं उपलब्ध धार्मिक स्रोतों पर आधारित है. विभिन्न क्षेत्रों, समुदायों और परंपराओं के अनुसार व्रत-त्योहारों की तिथि, पूजा-विधि एवं मान्यताओं में अंतर संभव है. पाठक इसे सामान्य धार्मिक जानकारी के रूप में देखें.)