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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग पर कांग्रेस और बीजेपी आमने सामने हैं. दिल्ली के रामलीला मैदान में विपक्षी दलों की रैली के बाद बीजेपी ने विपक्ष को करारा जवाब देने के लिए हमले और तेज कर दिए हैं तो कांग्रेस के अगले कदम की प्रतीक्षा की जा रही है.
रामलीला मैदान की रैली के बाद बीजेपी का पलटवार
दिल्ली के रामलीला मैदान में 'इंडिया' गठबंधन ने 'वोट बचाओ देश बचाओ' महा रैली कर विपक्षी एकजुटता की तस्वीर दिखाई तो बीजेपी ने रोहतक से लेकर हैदराबाद तक विपक्ष पर हमला बोला. सीएम भजनलाल शर्मा ने कोटा से 'लोकतंत्र बचाओ अराजकता हटाओ अभियान' का आगाज किया. सत्तापक्ष और विपक्ष एक दूसरे पर हमलावर हैं. रैलियां पूरे देश में आयोजित हो रही हैं. एक-दूसरे को एक्सपोज करने की रणनीति पर काम हो रहा है. इस बीच राज्यसभा सांसद घनश्याम तिवाड़ी ने रामलीला मैदान की रैली को सुपर फ्लॉप करार देते हुए कहा कि कांग्रेस विदेशी ताकतों के इशारे पर भारत के लोकतंत्र को कमजोर करने में जुटी है.
वोट चोरी और SIR के मुद्दे पर कांग्रेस का अभियान, ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग तेज
कांग्रेस एक तरफ 'वोट चोर, गद्दी छोड़' के नारे बुलंद कर रही है तो दूसरी तरफ वो मतदाता सूचियों में कथित अनियमितताओं, स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ देशभर में माहौल बनाने में जुटी है. ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए विपक्ष सरकार पर चौतरफा दबाव बनाने में जुटा है लेकिन मोदी सरकार टस से मस भी नहीं हो रही. न तो वो विपक्ष को भाव देती नजर आ रही है और न ही उसके नेता कांग्रेस को गंभीरता से लेते दिखाई दे रहे हैं उल्टे बीजेपी ने कांग्रेस को घेरने के लिए उसके खिलाफ राष्ट्रव्यापी अभियान छेड़ दिया है.
गहलोत के गढ़ में दिखेगी सियासी ताकत
बीजेपी कांग्रेस को हर मोर्चे पर करारा जवाब दे रही है. देश भर में बीजेपी के वरिष्ठ नेता कांग्रेस के खिलाफ सड़कों पर मार्च निकाल रहे हैं. सीएम भजनलाल शर्मा कोटा से 'लोकतंत्र बचाओ अराजकता हटाओ अभियान' की शुरुआत कर चुके हैं. अब मंगलवार यानी 3 नवंबर को सीएम भजनलाल शर्मा पूर्व सीएम गहलेात के गढ़ जोधपुर में सड़क पर उतरेंगे. भजनलाल शर्मा डेढ़ किलोमीटर लंबा मार्च निकालेंगे और मंत्री जोगाराम पटेल समेत कई नेता इस मार्च का हिस्सा होंगे.
राहुल गांधी की रणनीति के सामने बीजेपी का आक्रामक काउंटर
बहरहाल एक तरफ बारह साल से केंद्र की सत्ता पर काबिज मजबूत मोदी सरकार है तो दूसरी तरफ सत्ता को तरसता विपक्ष राहुल गांधी. चाहे विपक्षी एकजुटता के लाख दावें करें लेकिन सच यही है कि कोई भी क्षेत्रीय क्षत्रप अपने हितों की कुर्बानी देकर कांग्रेस को अपने राज्यों में फिर से पनपने का कोई मौका देना नहीं चाहता. जाहिर है वोट चोरी पर राहुल गांधी का अब तक का दांव ज्यादा कामयाब नहीं हो पाया है. उल्टे बीजेपी विपक्ष की रणनीति को आक्रामक तेवरों से धराशाई करने में जुटी है. विपक्ष को मोदी सरकार को घेरने के लिए फिर कोई नया पैंतरा अख्तियार करना होगा.