भजनलाल सरकार का बड़ा हंटर: 17 अफसरों का रुका सैलरी इंक्रीमेंट, 16 रिटायर अधिकारियों की पेंशन पर चला चाबुक
राजस्थान में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत 30 मामलों में कार्रवाई को मंजूरी मिली है. 17 सेवारत अधिकारियों की वेतन वृद्धि और 16 सेवानिवृत्त अधिकारियों की पेंशन पर फैसला लिया गया है.
राजस्थान में अपराधियों से मिलीभगत, वित्तीय अनियमितताओं और सरकारी कामकाज में लापरवाही के मामलों में राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाया है. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत राज्य सेवा के अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है. वृहद शास्ति से जुड़े 30 मामलों का निस्तारण करते हुए 17 सेवारत अधिकारियों की वार्षिक वेतन वृद्धियां और 16 सेवानिवृत्त अधिकारियों की पेंशन रोकने के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है. सरकार की इस कार्रवाई का उद्देश्य प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और सुशासन को मजबूत करना तथा सरकारी संसाधनों के संरक्षण पर जोर देना है.
अपराधियों से सांठगांठ करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई
राज्य सरकार ने सेवारत अधिकारियों के खिलाफ आरोपों की गंभीरता को देखते हुए दो से चार वार्षिक वेतन वृद्धियां संचयी प्रभाव से रोकने के दंड को मंजूरी दी है. आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों से सांठगांठ रखने और अवैध बजरी खनन से जुड़े माफिया से अनुचित लाभ लेने के मामले में तत्कालीन वृत्ताधिकारी की चार वार्षिक वेतन वृद्धियां संचयी प्रभाव से रोकने का निर्णय लिया गया है.
वहीं, अनुसंधान में लापरवाही बरतने के मामले में तत्कालीन पुलिस निरीक्षक, सहायक उप निरीक्षक और कॉन्स्टेबल सहित संबंधित पुलिस टीम के अधिकारियों की भूमिका की जांच में लापरवाही प्रमाणित हुई. इसके बाद तीन अधिकारियों की वार्षिक वेतन वृद्धियां रोकने की कार्रवाई की गई.
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मादक पदार्थों की तस्करी में शामिल अपराधियों से निकटता रखने, मिलीभगत करने और इनामी अपराधियों को गिरफ्तार नहीं करने के मामलों में भी कार्रवाई हुई है. इन प्रकरणों में तत्कालीन वृत्ताधिकारी और कॉन्स्टेबल की दो-दो वार्षिक वेतन वृद्धियां रोकने को मंजूरी दी गई है.
सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग पर भी सख्ती
राजकीय योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही के मामलों को भी कार्रवाई के दायरे में लिया गया है. राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के कार्यों के निरीक्षण और संधारण में लापरवाही बरतने वाले राजस्थान प्रशासनिक सेवा के एक अधिकारी की वार्षिक वेतन वृद्धियां रोकने का फैसला किया गया है.
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में स्वेच्छा से लंबे समय तक अनुपस्थित रहने के तीन मामलों में संबंधित चिकित्सा अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की गई. इसके अलावा गलत ब्लड इश्यू करने के गंभीर मामले में एक चिकित्सा अधिकारी की दो वार्षिक वेतन वृद्धियां रोकने को मंजूरी मिली है. श्रम, उद्यान और सचिवालय सेवा के अधिकारियों के खिलाफ भी आरोप प्रमाणित होने पर नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई का निर्णय लिया गया.
वित्तीय अनियमितताओं पर सेवानिवृत्त अधिकारियों की पेंशन रोकी
सेवानिवृत्त अधिकारियों से जुड़े मामलों में भी सरकार ने सख्ती दिखाई है. राजस्थान लेखा सेवा के एक सेवानिवृत्त अधिकारी पर निजी कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए सरकारी अभिलेखों में काट-छांट करने और राज्य सरकार को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाने का आरोप प्रमाणित हुआ. इसके बाद उनकी देय पेंशन का 100 प्रतिशत हिस्सा स्थायी रूप से रोकने की कार्रवाई की गई. राजस्थान प्रशासनिक सेवा के दो सेवानिवृत्त अधिकारियों के मामलों में आवासीय और वाणिज्यिक भूखंडों को कृषि भूमि दर्शाकर वित्तीय नुकसान पहुंचाने तथा अवैध भू-रूपांतरण के आरोपों पर पांच साल तक 20 प्रतिशत पेंशन रोकने को मंजूरी दी गई है.
फर्जी भुगतान और अन्य विभागीय मामलों में भी कार्रवाई
पंचायत समिति के कार्यों में बिना काम कराए फर्जी भुगतान करने और राजकोष को नुकसान पहुंचाने के मामले में एक विकास अधिकारी और सहायक अभियंता को दंडित किया गया है. चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता, खनिज, कॉलेज शिक्षा और देवस्थान विभाग से जुड़े मामलों में भी नियमानुसार कार्रवाई की गई है.
आठ मामलों में अधिकारियों को दोषमुक्त करने की मंजूरी
सरकार ने अनुशासनात्मक मामलों में निष्पक्षता का ध्यान रखते हुए राजस्थान सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1958 के नियम 16 के तहत आठ मामलों में अधिकारियों को दोषमुक्त करने के प्रस्तावों को भी मंजूरी दी है. इन मामलों में आरोप प्रमाणित नहीं हुए थे. इससे साफ है कि कार्रवाई आरोपों की पुष्टि और नियमानुसार प्रक्रिया के आधार पर की गई है.