कोटा का यश बना CA इंटर में टॉपर, पिता फल बेचते, मां घरों में बनाती हैं खाना
घर की आर्थिक तंगी, माता-पिता की दिनभर की मेहनत और परीक्षा के बीच बहन की तबीयत बिगड़ने जैसी मुश्किलें भी कोटा के यश पांचाल के इरादे नहीं डिगा सकीं. यश , CA इंटरमीडिएट परीक्षा में 600 में से 407 अंक हासिल कर सिटी टॉपर बन गये हैं. उनकी इस सफलता के पीछे सिर्फ उनकी मेहनत ही नहीं, बल्कि पिता का संघर्ष, मां का योगदान और नानी का भरोसा भी है.
कॉस्टिंग के पेपर के दिन अस्पताल में भर्ती हुई बहन
यश की परीक्षा के दौरान परिवार पर मुश्किल वक्त आया. कॉस्टिंग का पेपर था, तभी खून की कमी के चलते उनकी बड़ी बहन को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा. परीक्षा की तैयारी और बहन की सेहत की चिंता एक साथ सामने थी। ऐसे समय में भी यश ने हिम्मत बनाए रखी
पिता फल बेचते हैं, मां घरों में करती हैं काम
यश के पिता फल बेचकर परिवार का गुजारा करते हैं, जबकि मां दूसरे लोगों के घरों में खाना बनाने का काम करती हैं. सीमित आमदनी में परिवार की जरूरतें पूरी करने के साथ बेटे की प्रोफेशनल पढ़ाई का खर्च जुटाना आसान नहीं है. ऐसे में यश की नानी ने उनकी पढ़ाई की जिम्मेदारी संभाल रखी है. नानी ने पढ़ाई का खर्च उठाने के साथ तैयारी के लिए लैपटॉप भी दिलाया है.
ऑल इंडिया रैंक से कुछ अंक दूर, अब फाइनल की तैयारी
यश ने CA इंटरमीडिएट परीक्षा में 407 अंक हासिल किए है. उनके मुताबिक, वो ऑल इंडिया रैंक हासिल करने से करीब 15 से 20 अंक पीछे रह गए. हालांकि, कोटा में सिटी टॉपर बनना उनके लिए बड़ी उपलब्धि है. कोटा CA ब्रांच के आंकड़ों के मुताबिक सितंबर में आयोजित परीक्षा में दोनों ग्रुप देने वाले 125 विद्यार्थियों में से 23 विद्यार्थी ही दोनों ग्रुप पास कर सके. दोनों ग्रुप का पास प्रतिशत 18.4 फीसदी रहा.
CA बनने के लिए तीन फेस पास करने होते हैं ?
आपको बता दें कि CA बनने के लिए तीन फेस पास करने होते हैं. पहला CA फाउंडेशन यानी की प्रवेश परीक्षा, CA इंटरमीडिएट (जो यश ने पास की है) और फिर CA फाइनल जो आखिरी और बेहद कठिन चरण माना जाता है. यहां आपको बताते चले कि CA इंटरमीडिएट में टोटल 6 पेपर होते हैं, जिनका सिलेबस बहुत ज्यादा और तकनीकी होता है, इस परीक्षा को पास करना वो भी इन विपरीत हालातों में, यश की ये उपबल्धि काबिलेतारीफ है. पिता की मेहनत, मां का संघर्ष और नानी का भरोसा यश की सबसे बड़ी ताकत है और अब उनकी निगाह CA फाइनल पर टिकी है.
रिपोर्टर - चेतन गुर्जर
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