लाखों यहूदियों के हत्यारे हिटलर ने जिस जगह पर खुद को मारी थी गोली, वहां पर अब क्या बना है?
लाखों लोगों का हत्यारा हिटलर अब इस दुनिया में नहीं है लेकिन उससे जुड़ी दास्तानें अब भी लोगों को डराती हैं. क्या आप जानते हैं कि जिस जगह पर हिटलर ने खुद को गोली मारी थी, वहां पर अब क्या बना है.
जर्मनी के तानाशाह रहे हिटलर को यहूदियों के प्रति अंधी नफरत थी. इसी नफरत की वजह से उसने सेकंड वर्ल्ड वॉर में आदेश जारी कर लाखों यहूदियों को गैस चैंबर्स में डालकर बेरहमी से मरवा डाला था. लेकिन जब सोवियत संघ की सेनाओं ने जर्मनी की राजधानी बर्लिन को घेरा तो पकड़े जाने के डर से हिटलर ने सुसाइड कर लिया था. लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस जगह हिटलर ने खुद को गोली मारी थी, वहां पर अब क्या बना हुआ है?
बचने के लिए 'फ्यूहररबंकर' में छिपा था हिटलर
यह घटना 30 अप्रैल 1945 को हुई थी. जिस जगह पर एडॉल्फ हिटलर छिपा हुआ था, उसे 'फ्यूहररबंकर' कहा जाता था. यह बंकर जर्मनी की राजधानी बर्लिन में रीच चांसलरी (Reich Chancellery) के बगीचे के नीचे स्थित था.
एडॉल्फ हिटलर को पहले ही पता चल गया कि जर्मनी की सेनाएं सेकंड वर्ल्ड वॉर हार चुकी हैं और सोवियत संघ की सेनाएं तेजी से बर्लिन में घुस रही हैं. उसे पता था कि अगर वह सोवियत सेना के हाथ लग गया तो उसे बुरी तरह तड़पाकर मारा जाएगा. इसीलिए उसने अपने सीक्रेट बंकर में 30 अप्रैल 1945 को पहले नई-नवेली पत्नी ईवा ब्रौन को साइनाइड खिलाकर मारा. इसके बाद अपने सिर में गोली मारकर आत्महत्या कर ली.
पकड़े जाने से बचने के लिए खुद को मार ली गोली
जिस वक्त हिटलर ने खुद को गोली मारी, उस वक्त फ्यूहररबंकर में लगभग 30 से अधिक लोग मौजूद थे. उनमें वरिष्ठ नाजी नेता, सैन्य अधिकारी, निजी कर्मचारी, डॉक्टर और सुरक्षाकर्मी शामिल थे.
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हिटलर के मरने के उसके प्रोपेगेंडा मिनिस्टर जोसेफ गोएबल्स ने जर्मनी के चांसलर का पद संभाला और सोवियत सेना को शांति समझौता करने का ऑफर किया. लेकिन सोवियत संघ ने इसे खारिज कर दिया और कहा कि जर्मनी को बिना शर्त सरेंडर करना होगा. इससे गोएबल्स को एहसास हो गया कि अब उसका पकड़ा जाना और दर्दनाक मौत तय हो गई है.
सहयोगी गोएबल्स ने भी किया सुसाइड
सोवियत सेनाओं के हाथों पकड़े जाने से बचने के लिए उसने भी पत्नी-बच्चों समेत आत्महत्या का फैसला किया. उसने 1 मई 1945 को एक डॉक्टर की मदद से अपने 6 मासूम बच्चों को पहले नींद की दवा देकर बेहोश किया. इसके बाद पोटेशियम साइनाइड का कैप्सूल खिलाकर उनकी हत्या कर दी. बच्चों को मारने के बाद जोसेफ और माग्डा गोएबल्स ने बंकर के ऊपर बने बगीचे में जाकर खुद को गोली मार ली.
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गोएबल्स के मरने के बाद हिटलर के प्राइवेट सेक्रेटरी और करीबी सलाहकार मार्टिन बोरमैन ने 1 मई की रात को बाकी लोगों के साथ बंकर से भागने की कोशिश की. वह बर्लिन की सड़कों पर सोवियत सैनिकों से खुद को बचाते हुए भाग रहा था. लेकिन जब उसने देखा कि अब बचना मुश्किल है तो उसने साइनाइड खाकर सुसाइड कर लिया.
डर से आर्मी चीफ ने भी दे दी अपनी जान
हिटलर के आर्मी चीफ जनरल हंस क्रेब्स और उनके सहयोगी जनरल विल्हेम बर्गडोर्फ भी उसी बंकर में छिपे थे. सोवियत सेनाओं के साथ जब उनकी बातचीत विफल हो गई तो पकड़े जाने के डर से उन्होंने भी 2 मई 1945 की सुबह बंकर के अंदर ही गोली मारकर आत्महत्या कर ली.
हिटलर ने बर्लिन की रक्षा की जिम्मेदारी जनरल हेल्मुथ वीडलिंग को दे रखी थी. जब उसे हिटलर के मारे जाने की खबर मिली तो उसने सोवियत सेना के सामने बर्लिन शहर का औपचारिक सरेंडर कर दिया. इसके बाद सोवियत सेनाओं ने उसे बंदी बनाकर रूस भेज दिया. जहां पर 1952 में व्लादिमीर सेंट्रल जेल में उसकी मौत हो गई.
पूछताछ के बाद रिहा हुई हिटलर की सेक्रेटरी
जर्मनी के तानाशाह हिटलर ने सुसाइड से कुछ घंटे पहले अपने प्राइवेट स्टाफ ट्रौडल जुंगे और प्राइवेट सेक्रेटरी गेर्डा क्रिश्चियन से अपनी वसीयत नोट करवाई थी. मरने से पहले हिटलर ने उन दोनों को भी साइनाइड कैप्सूल दिए थे. लेकिन दोनों ने सुसाइड के बजाय बंकर से भाग जाने का विकल्प चुना. दोनों महिलाएं चुपके से 1 मई की रात को बंकर से बाहर भाग जाने में कामयाब रहीं लेकिन सोवियत सेनाओं ने उन्हें पकड़ लिया. इसके बाद सोवियत और अमेरिकी सेना ने उनसे लंबी पूछताछ की और बाद में रिहा कर दिया.
जब सेकंड वर्ल्ड वॉर खत्म हुआ तो सोवियत संघ और उसके समर्थन से बनी पूर्वी जर्मन सरकार ने विस्फोटक लगाकर उस बंकर को नष्ट कर दिया. बाद में उसे मलबे और मिट्टी से भर दिया गया. नई जर्मन सरकार ने जानबूझकर उस जगह को कोई ऐतिहासिक रूप नहीं दिया, जिससे वह नव-नाजियों के लिए कोई प्रेरणा स्थल न बन सके.
जिस जगह हिटलर मरा, वहां पर अब क्या बना है?
जिस जगह पर हिटलर मरा था, वहां पर वर्ष 2006 तक कोई सूचना बोर्ड भी नहीं था. लेकिन उसी साल जर्मनी में फीफा वर्ल्ड कप का आयोजन भी हुआ. मैच देखने के लिए बर्लिन आने वाले पर्यटकों की एक बड़ी उत्सुकता हिटलर के सुसाइड स्पॉट को देखने की भी थी. इसी उत्सुकता को देखते हुए जर्मन सरकार ने उस जगह के कोने पर एक छोटा सा सूचना बोर्ड लगा दिया. जिसमें वहां से जुड़े इतिहास को अंग्रेजी और जर्मन भाषा में लिखा गया है.
बाद में वहां पर रेजिडेंशल अपार्टमेंट और लोगों को गाड़ी खड़ी करने की सुविधा देने के लिए पार्किंग लॉट बना दिया गया. आज की तारीख में अगर कोई आदमी उस जगह जाए, जहां पर हिटलर ने खुद को गोली मारकर आत्महत्या की थी तो वहां पर उसे केवल एक सामान्य पार्किंग स्थल, घास का मैदान और आसपास रिहायशी इमारतें ही दिखाई देंगी. लाखों लोगों के हत्यारे हिटलर का वजूद जर्मनी से हमेशा के लिए मिटा दिया गया है.