मौसम की मार या लाइमलाइट छिनने का डर, इंडी गठबंधन ने आखिर क्यों टाल दिया अपना शक्ति प्रदर्शन?
मौसम की मार रही या लाइमलाइट छिनने का डर, इंडी गठबंधन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ होने वाला मॉक पार्लियामेंट टाल दिया. उसने इसकी वजह मौसम को बताया लेकिन सूत्र कुछ ओर वजह बता रहे हैं.
राजनीतिक चर्चा में आपने अक्सर एक शब्द सुना होगा. मौसम वैज्ञानिक. यानी ऐसे नेता जो समय रहते ये भांप लेते हैं, समझ जाते हैं कि आने वाले वक्त में राजनीति का मौसम कैसा रहेगा. पिछले 12 घंटे में प्राकृतिक मौसम और राजनीति का मौसम दोनों ट्रेंड कर रहे हैं. अक्टूबर ने जाते-जाते दिल्ली और आसपास के इलाके में थोड़ी ठंडक बढ़ा दी है. शुक्रवार को सुबह से बारिश हो रही थी. कांग्रेस के मुताबिक, इस बारिश ने शुक्रवार को उसके बहुत बड़े कार्यक्रम पर पानी फेर दिया.
आज कांग्रेस के नेतृत्व वाले इंडिया गठबंधन ने मॉक पार्लियामेंट कराने का ऐलान किया था. अंतिम क्षण में कार्यक्रम को एक दिन के लिए टाल दिया गया. यानी जब कार्यक्रम की शुरुआत होनी थी, उससे ठीक पहले बताया गया, कार्यक्रम आज नहीं होगा. तर्क दिया गया कि दिल्ली का मौसम खराब है.
कांग्रेस को पूर्व घोषित मॉक पार्लियामेंट को क्यों टाल दिया?
सोचिए, जो विपक्ष हर मुद्दे पर हर दिन सरकार को घेरने का अवसर तलाशता रहता है, उसने अचानक ही क्यों अपना कार्यक्रम टाल दिया. क्या इसके पीछे सिर्फ खराब मौसम ही वजह है या कारण कुछ और भी हैं. हम इन्हीं सवालों के जरिए विपक्ष के दो कदम आगे और एक कदम पीछे वाली रणनीति को डिकोड करेंगे.
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन का विचार है कि एक बार जब आप किसी सही उद्देश्य के लिए रास्ता चुन लेते हैं, तो बीच रास्ते में रुकना या पीछे हटना उस संघर्ष को ही व्यर्थ कर देता है. विजय उसी को मिलती है जो अंत तक डटा रहता है.
कांग्रेस ने आज अपने उस पूर्व घोषित मॉक पार्लियामेंट को टाल दिया, जिसकी तैयारी कई दिनों से हो रही थी. सोशल मीडिया से लेकर पार्टी कैडर के रास्ते इस मॉक पार्लियामेंट का जोरदार प्रचार-प्रसार हो रहा था. दिल्ली में मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर ये कार्यक्रम होना था. कार्यक्रम को जन-महाभियोग का नाम दिया गया था. इसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जन महाभियोग चलाया जाना था.
कार्यक्रम टालने की वजह मौसम थी या कुछ ओर?
मॉक पार्लियामेंट की कार्यवाही दोपहर साढ़े तीन बजे शुरू होकर तीन घंटे चलनी थी. लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष मीरा कुमार कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया था. मॉक पार्लियामेंट में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पेश करना था. 21 राजनीतिक दलों के 30 नेताओं को इस दौरान अपनी बात रखनी थी और आखिर में राहुल गांधी को समापन भाषण देना था. लेकिन दोपहर दो बजे राहुल गांधी ये कहने के लिए मीडिया के सामने आए कि कार्यक्रम टाल दिया गया है.
चक्रवात अर्णब के कारण दिल्ली में गुरुवार से बारिश हो रही है. मौसम विभाग ने भी पहले ही बता दिया था कि दिल्ली-NCR में बारिश होगी. इसलिए पहला सवाल ये है कि क्या इंडिया गठबंधन के रणनीतिकारों से मॉक पार्लियामेंट की तारीख तय करने में चूक हुई. दूसरा प्रश्न ये है कि क्या सिर्फ मौसम की वजह से कार्यक्रम को टाला गया है या इसके पीछे कोई और वजह है.
ये प्रश्न अनायास नहीं है. जो विपक्ष आज छोटे-छोटे मुद्दों पर सड़क पर उतर जाता है. विपक्षी नेता हर दिन सरकार के खिलाफ नए-नए मुद्दे तलाशते रहते हैं. वैसे समय में CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ होनेवाली मॉक पार्लियामेंट सिर्फ और सिर्फ मौसम की वजह से टल गई. ये सामान्य तर्क कुछ असमान्य नहीं लग रहा है.
बड़े विपक्षी नेता क्यों नहीं दिखे राहुल के साथ?
जब राहुल गांधी होने वाले कार्यक्रम को टालने की जानकारी देने आए थे. तब उनके साथ समाजवादी पार्टी के धर्मेंद्र यादव, हरेंद्र मलिक, ममता बनर्जी वाली टीएमसी से डेरेक-ओ-ब्रायन, महुआ मोइत्रा, उद्धव गुट वाली शिवसेना के अरविंद सांवत, झारखंड मुक्ति मोर्चा की महुआ मांझी, लेफ्ट से जॉन ब्रीटॉस और पी संतोष कुमार, आरजेडी के संजय यादव और निर्दलीय कपिल सिब्बल मौजूद रहे. यानी कागज पर गठबंधन में शामिल सभी दलों की मौजूद थे. लेकिन उनके साथ कोई बड़ा विपक्षी चेहरा नहीं दिख रहा था.
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सोचिए, वोट चोरी वाले नैरेटिव को मजबूत करने के लिए मॉक पार्लियामेंट जैसा महत्वपूर्ण आयोजन था. फिर ममता बनर्जी, तेजस्वी यादव, लेफ्ट के डी राजा जैसे नेता फ्रेम में राहुल गांधी के साथ क्यों नहीं दिखे. और तो और शरद पवार वाली NCP की नेता सुप्रिया सुले भी आज राहुल के साथ नहीं दिखीं.
इन नेताओं की गैरमौजूदगी ने ही ये प्रश्न खड़ा किया है कि मॉक पार्लियामेंट को टालने की वजह खराब मौसम है या कुछ और. असल में तेजस्वी यादव शुक्रवार को पटना में थे. ममता बनर्जी और उद्धव ठाकरे जैसे नेता भी अपनी पार्टी के कार्यक्रम में मौजूद रहे. CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जिस तरह का आक्रोश और जैसी एकजुटता विपक्ष अब तक दिखाता रहा है, उसे देखते हुए मॉक पार्लियामेंट के घोषित कार्यक्रम से विपक्षी दिग्गजों की दूरी से सवाल उठते हैं.
इंडी गठबंधन में क्या सब कुछ ठीक चल रहा?
संशय खड़ा होता है कि क्या गठबंधन में इस कार्यक्रम को लेकर एकराय नहीं थी. क्या इंडिया गठबंधन में सबकुछ ठीक है. विपक्ष के जिस मॉक पार्लियामेंट को लेकर बीजेपी भी कई दिनों से अलर्ट थी, उसे आज मौका मिल गया. सुनिए, बीजेपी नेताओं ने किन शब्दों में मॉक पार्लियामेंट को लेकर सवाल खड़े किए.
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बीजेपी के सियासी सवाल अपनी जगह है लेकिन महत्वपूर्ण अवसर पर राहुल गांधी के साथ इंडिया गठबंधन के दिग्गजों की गैर मौजूदगी खटकती है. समझिए आज का कार्यक्रम अचानक नहीं हो रहा था. पहले से तय था. इंडिया गठबंधन के दिग्गजों के पास दिल्ली पहुंचने का पर्याप्त समय था. लेकिन विपक्षी दलों का कोई बड़ा नेता दिल्ली नहीं पहुंचा.
कांग्रेस को छोड़कर दूसरे विपक्षी नेताओं की प्राथमिकता में 1 नवंबर की रैली क्या पहले नंबर पर है? ये सवाल इसलिए भी उठ रहा है क्योंकि आज दोपहर बाद तेजस्वी यादव दिल्ली रवाना हुए. पटना में उन्होंने जो कुछ कहा, उसका सार यही था कि उनके पॉलिटिकल एजेंडे में मॉक पार्टियामेंट नहीं, सिर्फ 1 नवंबर की रैली है.
इटली के प्रसिद्ध राजनीतिक विद्वान निकोलो मैकियावेली का विचार है कि राजनीति में एक बार कदम आगे बढ़ाने के बाद, बिना किसी विकल्प या स्पष्ट जीत के पीछे हटना आत्मघाती है.
आधी-अधूरी तैयारी से कांग्रेस को लगा झटका
विपक्ष के रणनीतिकार भी जानते हैं कि मॉक पार्लियामेंट को टालने से उनके आंदोलन के मोमेंटम और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ उनकी मुहिम को थोड़ा झटका लगा है. कार्यक्रम टलने से संदेश यही गया कि विपक्ष की तैयारी आधी-अधूरी है.
आमतौर पर जब मौसम खराब होता है तो ऐसे कार्यक्रम किसी हॉल या इंडोर स्टेडियम में कराए जाते हैं. वैसे भी ये कार्यक्रम किसी दौड़ का नहीं था. इसमें कोई रेस का आयोजन नहीं होना था. बैठकर बात करनी थी. अपने विचार रखने थे. रणनीति पर मंथन करना था.
आज ही दिल्ली में एक मॉक पार्लियामेंट हुई. NDMC कन्वेंशन सेंटर में सिटिजन्स फॉर डेमोक्रेसी ने मॉक पार्लियामेंट का आयोजन किया. फिर इंडिया गठबंधन ने अपना कार्यक्रम क्यों टाला. क्या इसके पीछे दूसरी रणनीतिक चूक भी थी. क्या इंडिया गठबंधन के नेताओं को ऐसा लगा कि आज उनकी मॉक पार्लियामेंट हुई तो उसे उतनी चर्चा नहीं मिलेगी, जितनी वो उम्मीद कर रहे हैं. ऐसा क्यों है पहले इसे समझते हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज गुजरात के बनासकांठा में किसानों के बीच थे. इस सभा की चर्चा इसलिए भी हो रही है कि क्योंकि य़हां किसानों के बैठने के लिए कुर्सियों की जगह चारपाइयां बिछाई गई थीं. पीएम ने इसे खासतौर पर रेखांकित भी किया. आज बनासकांठा से पीएम ने किसान सम्मान निधि की 24वीं किस्त जारी की.
इसके तहत करीब साढ़े नौ करोड़ से ज्यादा किसान परिवारों को 18 हजार 690 करोड़ से अधिक की रकम मिलेगी. पीएम मोदी ने 14 हजार करोड़ से ज्यादा की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन भी किया. साथ ही दो नई ट्रेन सर्विस को हरी झंडी दिखाई.
कहीं 'कवरेज' की वजह से नहीं टाला प्रोग्राम
प्रधानमंत्री गुजरात में थे, किसानों के बीच थे. इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम की राष्ट्रव्यापी चर्चा तय थी. अगर आज विपक्ष मॉक पार्लियामेंट करता तो उसे कम स्पेस और अटेंसन मिलती. तो क्या इसी आशंका से विपक्षी नेताओं ने अपने कार्यक्रम को एक दिन के लिए टाल दिया. विपक्ष ने अपना कार्यक्रम टाल दिया लेकिन विपक्ष पर प्रधानमंत्री का तंज नहीं टला.
बनासकांठा में मौसम साफ था. लेकिन लखनऊ में भी मौसम कमोबेश दिल्ली जैसा ही था. जहां बीजेपी का आज का दूसरा बड़ा राजनीतिक कार्यक्रम हुआ. गृहमंत्री अमित शाह लखनऊ में BJP प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में शामिल हुए. उत्तर प्रदेश में चार महीने बाद विधानसभा चुनाव होने हैं.
राजनीतिक तौर पर अति महत्वपूर्ण यूपी की हर सियासी हलचल पर पूरे देश की नज़र होती है. जब अमित शाह लखनऊ पहुंचे तो ये राजनीतिक अवसर और महत्वपूर्ण हो जाता है. शायद इसलिए इंडिया गठबंधन के रणनीतिकारों को अंदेशा रहा हो कि लखनऊ में बड़ी राजनीतिक बैठक के सामने उनका कार्यक्रम छोटा हो जाएगा.
समझिए, दिल्ली में इंडिया गठबंधन का कार्यक्रम भले की मौसम की वजह से टल गया. लेकिन दिल्ली से 860 किलोमीटर दूर बनासकांठा में पीएम मोदी का और दिल्ली से 520 किलोमीटर दूर लखनऊ में गृहमंत्री अमित शाह का कार्यक्रम नहीं टला. क्यों नहीं टला. इसकी वजह ये है कि बीजेपी की प्लानिंग और तैयारी ऐसी होती है कि उसके कार्यक्रमों पर मौसम की मार नहीं पड़ती. बीजेपी के लिए मौसम का मतलब, गर्मी-सर्दी या बरसात नहीं चुनाव है. बीजेपी के दिग्गज नेता इसी चुनावी मौसम को अपने अनुकूल बनाने के लिए पूरे साल 365 दिन सक्रिय रहते हैं.
अब इंडिया गठबंधन की मॉक पार्लियामेंट कल दोपहर 2 बजे से तीन बजे के बीच मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर होगी. और उसके अगले दिन यानी एक नवंबर को 'वोट बचाओ-देश बचाओ' रैली होगी. फिलहाल विपक्ष का पूरा फोकस इसी रैली को कामयाब बनाने पर है. लेकिन इस रैली को लेकर भी विपक्ष की एकजुटता अब संदेह के दायरे में है.
AAP रैली से दूर CJP को नो 'एंट्री'
आम आदमी पार्टी इंडिया गठबंधन से अलग हो चुकी है. इसलिए वो 1 नवंबर की रैली में शामिल नहीं होगी. दूसरी तरफ कॉकरोच जनता पार्टी ने 1 नवंबर की रैली का समर्थन किया है. लेकिन समर्थन के बाद भी रामलीला मैदान में मंच पर सीजेपी के बड़े नेताओं के लिए नो एंट्री है.
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने साफ कहा है कि रामलीला मैदान के मंच पर सीजेपी को जगह नहीं दी जाएगी. यानी सीजेपी का समर्थन तो मंजूर है, लेकिन उसे मंच पर जगह नहीं दी जाएगी. हमारी एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक, CJP 1 नवंबर की रैली के लिए इंडिया गठबंधन का सहयोग कर रही है, लेकिन इस रैली में अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका हिस्सा नहीं लेंगे.
मतलब सहयोग तो रहेगा, लेकिन मंच शेयर नहीं करेंगे. इंडिया गठबंधन के नेता तो कह रहे हैं कि रैली में कोई भी शामिल हो सकता है, लेकिन मंच साझा करने को लेकर चुप्पी है.
समझिए, वोट चोरी और SIR में गड़बड़ी को राहुल गांधी ने कांग्रेस का मुख्य एजेंडा बनाया है. इस मुद्दे पर दिल्ली में अब तक जो भी आंदोलन हुए हैं, उसका चेहरा राहुल गांधी रहे हैं. इसलिए कांग्रेस इस नैरेटिव पर अपना पूरा कंट्रोल चाहती है. कांग्रेस अपने मुख्य राजनीतिक मुद्दे को सीजेपी, किसी सिविल सोसाइटी ग्रुप या किसी दूसरी पार्टी के साथ साझा नहीं करना चाहती है.
सीजेपी नेताओं को मंच से दूर रखेगी कांग्रेस
इसलिए कांग्रेस ने समर्थन के बाद भी कॉकरोच जनता पार्टी को मंच से दूर रखा है. दूसरी वजह ये है कि अभिजीत दीपके और आशुतोष रांका जैसे नेता पहले आम आदमी पार्टी से जुड़े थे. हो सकता है कि इसलिए उनपर कांग्रेस को पूरा भरोसा नहीं हो.
चंद महीने बाद पंजाब में विधानसभा चुनाव हैं और इस त्रिकोणीय चुनावी मुकाबले के दो कोण कांग्रेस और आम आदमी पार्टी हैं. शायद इसलिए आम आदमी पार्टी रामलीला मैदान से दूर है और CJP को मंच से दूर रखा गया है.