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केंद्र सरकार ने देश की बहुप्रतीक्षित राष्ट्रीय जनगणना (Census 2027) की तारीखों का ऐलान कर दिया है. समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, यह राष्ट्रीय अभियान 25 जनवरी से 28 फरवरी 2027 के बीच पूरे देश में आयोजित किया जाएगा. हालांकि, बर्फीले इलाकों की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और आगामी चुनावी राज्यों में प्रशासनिक व्यस्तताओं को देखते हुए उन्हें इस समयावधि से बाहर रखा गया है.
भारत में जनगणना का आयोजन ‘जनगणना अधिनियम, 1948’ और ‘जनगणना नियम, 1990’ के कानूनी प्रावधानों के तहत किया जाता है. नागरिकों से कौन-कौन से प्रश्न पूछे जाएंगे, इसकी आधिकारिक सूची सरकार पहले ही जारी कर चुकी है.
गृह मंत्रालय की तरफ से हाल ही में एक नया गजट नोटिफिकेशन जारी किया गया है. इसके जरिए देश में जनगणना (Census) की प्रक्रिया से जुड़े कुछ जरूरी निर्देश सामने आए हैं. आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं. इस गजट नोटिफिकेशन के अनुसार, केंद्र सरकार ने जनगणना अधिनियम, 1948 की धारा 3 और जनगणना नियम, 1990 के नियमों का इस्तेमाल करते हुए पूरे देश में जनगणना की घोषणा की है. हालांकि, इसमें कुछ खास राज्यों और इलाकों को फिलहाल अलग रखा गया है.
इस नोटिफिकेशन के मुताबिक, देश के बाकी सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में प्रक्रिया शुरू होगी, लेकिन नीचे दी गई जगहों पर यह लागू नहीं होगी:
मणिपुर: इस राज्य में यह प्रक्रिया अगले आदेश (अगली घोषणा) तक स्थगित रहेगी.
चुनिंदा राज्य और क्षेत्र: गोवा, उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड और लद्दाख.
विशेष भौगोलिक क्षेत्र: हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के वे बर्फ से ढके इलाके (snow-bound areas) जो गैर-समकालिक (non-synchronous) हैं.
साधारण शब्दों में कहें तो, केंद्र सरकार ने देश के अधिकांश हिस्सों में जनगणना कराने के लिए कानूनी रूप से कदम बढ़ा दिए हैं. जिन राज्यों और इलाकों के नाम अपवाद के तौर पर लिए गए हैं, वहां की भौगोलिक स्थिति या विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए फिलहाल इस नियम से छूट दी गई है. जैसे ही हालात सामान्य होंगे या नए आदेश आएंगे, उन क्षेत्रों के लिए भी आगे की घोषणा की जाएगी.
देश में इससे पहले आखिरी जनगणना साल 2011 में दो चरणों में कराई गई थी. नियम के मुताबिक, अगली जनगणना 2021 में होनी थी. इसकी पूरी योजना तैयार थी, जिसके तहत:
पहला चरण: अप्रैल से सितंबर 2020 के बीच निर्धारित था.
दूसरा चरण: फरवरी 2021 में पूरा होना था.
1 अप्रैल 2020 से जमीनी स्तर पर काम शुरू करने की सभी तैयारियां हो चुकी थीं. लेकिन तभी अचानक देश भर में कोविड-19 महामारी का प्रकोप फैल गया, जिसके चलते इस पूरी प्रक्रिया को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करना पड़ा. अब महामारी के दौर से उबरने के बाद सरकार ने 2027 में इसे कराने का औपचारिक खाका पेश किया है.