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बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन गुरुवार को पार्टी महासचिवों की एक बैठक कर रहे हैं. इस बैठक में मौजूदा राजनीतिक हालात और एसआईआर को लेकर विपक्ष के विरोध-प्रदर्शन और पांच राज्यों में होने वाले आगामी चुनावों की तैयारियों पर चर्चा की जाएगी. बीजेपी हेडक्वार्टर में हो रही इसी मीटिंग में पार्टी नेताओं के बीच एसआईआर और चुनाव आयोग के खिलाफ इंडिया ब्लॉक के विरोध-प्रदर्शनों को काउंटर करने और इन मुद्दों से जुड़े सियासी घटनाक्रमों पर चर्चा होने की उम्मीद है.
माना जा रहा है कि गुरुवार की इसी बैठक में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, मणिपुर और गोवा में आगामी चुनाव से जुड़े कार्यक्रमों के लिए रणनीति बनाने और तैयारियों की समीक्षा करने पर भी ध्यान दिया जाएगा. इन राज्यों में राजनीतिक गतिविधियों की तैयारी के तहत पार्टी अपनी संगठनात्मक कार्ययोजना और रणनीतियों पर चर्चा करेगी.
इस बीच बुधवार को नितिन नवीन ने बीजेपी के 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' अभियान के तहत दिल्ली के चांदनी चौक में एक मार्च का नेतृत्व किया. ये मार्च ऐसे समय में निकाला गया, जब एसआईआर को लेकर राजनीतिक तनाव बढ़ रहा है और कांग्रेस तथा अन्य विपक्षी दलों ने 'वोट चोरी' के आरोप लगाए हैं. उन्होंने कांग्रेस की चुनावी हार को नागरिकों द्वारा किया गया शुद्धिकरण करार दिया. इस तरह सत्ताधारी पार्टी ने अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं को एकजुट करके विपक्ष के अभियान का जवाब देने की कोशिश की है.
इसी दौरान उन्होंने गांधी परिवार पर निशाना साधते हुए कहा कि 'कांग्रेस-आई' (जिसे पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी ने जनवरी 1978 में बनाया था) का मतलब 'कांग्रेस-इंदिरा' नहीं, बल्कि 'इटैलियन कांग्रेस' है.
एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट में हुए कथित खुलासे पर चुनाव आयोग कई बार सफाई दे चुका है. इसके बावजूद विपक्ष कथित 'वोटचोरी' के नाम पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक आर-पार की लड़ाई करने का ऐलान कर चुका है. बीजेपी विपक्ष के इस आक्रामक रुख को सत्ता पाने के लिए संवैधानिक संस्थाओं पर विपक्ष का सामूहिक हमला बता रही है. इस बीच मामले की गूंज सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची तो वहां चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच इस केस की सुनवाई कर रही है.
चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में दायर एफिडेविट में कहा है कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेसिव रिवीजन (SIR) से जुड़े सभी फैसले आयोग ने सर्वसम्मति से लिए थे.