तीन पीढ़ियों तक सत्ता भोगने के बाद भी 'दिल्ली से इंसाफ नहीं' की रट क्यों? PoK का 'विलेन' फारूक अब्दुल्ला का 'हीरो' कैसे बना
जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने एक बार फिर भारत विरोधी भड़काऊ बयान दिया है. पाकिस्तान की तारीफ करते हुए फारूक ने कहा कि वह कश्मीर को बचा रहा है वरना भारत से तो इंसाफ की कोई उम्मीद नहीं है.
ईरान के लोग अपने मुल्क, अपनी मिट्टी की हिफाजत के लिए तैयार हैं. ईरान की आवाम एकजुट होकर कहती है कि अमेरिका उसका दुश्मन है. लेकिन हमारे देश में ऐसे भी नेता हैं जो दुश्मन देश को ही अपना गॉडफादर मानते हैं. जो कहते हैं कि उनका वजूद पाकिस्तान की वजह से है. जो उस पाकिस्तान को कश्मीरियों का रक्षक बताते हैं, जो अपने कब्जे वाले हमारे कश्मीर में आमलोगों पर जुल्म ढाता है. उन पर हर दिन अत्याचार करता है. PoK में रोटी मांगने पर कश्मीरियों को पाकिस्तानी फौज गोली मारती है. सोचिए, ऐसे अत्याचारी मुल्क को जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला कश्मीरियों का रक्षक बताते हैं.
फारूक अब्दुल्ला ने फिर दिया भारत विरोधी बयान
फारूक अब्दुल्ला का ये बयान भड़काऊ होने के साथ ही भारत विरोधी भी है. ये एक तरह की वैचारिक साजिश है. बारामूला से दिल्ली तक कश्मीर के नाम पर भावनाओं को भड़काने की व्यापक साजिश फिर से हो रही है. दिल्ली में जामिया मिल्लिया इस्लामिया की दीवारों पर कश्मीर से जुड़े विवादित नारे लिखे गए थे. अभी ये विवाद थमा भी नहीं है कि अब कश्मीरियों की भावनाओं को शब्दों की आंच पर उबालने का प्रपंच हो रहा है.
इस प्रपंच का चेहरा बने हैं जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला. उन्होंने एक ऐसा बयान दिया है जिससे सवाल उठने लगे हैं कि क्या वो जम्मू-कश्मीर में शांति और अमन चैन से बेचैन हैं. फारूक अब्दुल्ला बारामूला में अपनी पार्टी के कार्यक्रम में पहुंचे थे. सूबे में उनकी पार्टी की सरकार है. उनके बेटे उमर अब्दुल्ला खुद जम्मू-कश्मीर के सीएम हैं.
कश्मीरियों की भावनाओं को भड़काने का पुराना नुस्खा
फारूक अब्दुल्ला जब बारामूला पहुंचे तो सामने कार्यकर्ता बैठे थे. चर्चा विकास कार्यों और सरकार के कामकाज पर होनी चाहिए थी. लेकिन इस मोर्चे पर बताने के लिए शायद फारूक अब्दुल्ला के पास कुछ नहीं था. तो उन्होंने फिर वही कश्मीरियों की भावनाओं को भड़काने का पुराना नुस्खा पकड़ लिया.
फारूक अब्दुल्ला के शब्द-शब्द में भारत विरोधी विद्वेष भरा है. सोचिए जिस भारत में चुनाव जीतकर वो तीन बार सीएम बने. पिता शेख अब्दुल्ला दो बार मुख्यमंत्री बने और बेटे उमर अब्दुल्ला दो बार मुख्यमंत्री बने हैं. वे फारूक अब्दुल्ला कह रहे हैं उस भारत में इंसाफ की उम्मीद नहीं है.
परिवारवाद पर जनता की बेरुखी से बढ़ी बौखलाहट
एक परिवार की तीन पीढ़िया सत्ता के शीर्ष पर रहीं. लेकिन फारूक साहब कह रहे हैं दिल्ली से इंसाफ की उम्मीद नहीं. शायद फारूक अब्दुल्ला के शब्दकोष में इंसाफ का अर्थ अपनी मनमानी, निर्बाध पारिवारिक सत्ता और अपना अधिकतम हित है. इसलिए अब उन्हें परिवारवाद पर जनता की बेरुखी काफी खल रही है, जो उनके बयानों में बार-बार नजर आ रही है.