'चांदी वर्क' में कितने प्रतिशत होनी चाहिए चांदी? असली की आड़ में बिक रहा एल्युमिनियम और चर्बी का जहर, टेस्ट ने खोले राज
त्योहारी सीजन में मिठाइयों की खरीद तेज हो जाती है. इसे भुनाते हुए मिलावटखोर भी इस सीजन में सक्रिय हो जाते हैं. मिठाइयों में मिलावट के साथ ही चांदी वर्क में भी मिलावट करके लोगों की सेहत से खिलवाड़ किया जाता है.
त्योहारी सीजन में मिठाइयों पर लगने वाले चांदी वर्क के नाम पर चमकता जहर इन दिनों बड़े पैमाने पर बाजार में बेचा जा रहा है. वही जहर लगी दूषित और अशुद्ध मिठाइयां दुकानों पर सजाई जा रही हैं. डीएनए में हमारे नकली चांदी के वर्क वाले विश्लेषण के बाद ऐसे नीच काम के खिलाफ कार्रवाई हो रही है.
DNA इन्वेस्टिगेशन में हमने नकली चांदी के वर्क के सैंपल को एक लैब में टेस्ट करने के लिए दिया था. उसकी रिपोर्ट आ चुकी है. इस रिपोर्ट में साफ-साफ लिखा हुआ है कि नकली चांदी के वर्क में 71 प्रतिशत से भी कम चांदी है. बहुत ध्यान से जानिएगा, चांदी के वर्क में 71 प्रतिशत से भी कम चांदी है.
चांदी वर्क में कितने प्रतिशत होनी चाहिए चांदी?
FSSAI के मुताबिक, चांदी के वर्क में 99.99 प्रतिशत चांदी होनी चाहिए. ऐसा ही वर्क खाने योग्य होता है. लेकिन जो सैंपल मिला है, उसमें 29 प्रतिशत से ज्यादा अन्य धातुएं मिली हुई हैं. अब सवाल है कि इसमें क्या मिलाया गया है? जिस तरह कल कैमरे पर दावा किया गया था कि एल्युमिनियम की मिलावट होती है तो क्या बाकी 29 प्रतिशत धातु वही हानिकारक एल्युमिनियम है या कुछ और है?
सोचिए, आपके-हमारे साथ कितना बड़ा छल किया जा रहा है. इसलिए फूड सेफ्टी विभाग के अधिकारियों ने मेरठ, आगरा से लेकर पटना और भोपाल तक शहर-शहर छापेमारी की है. कहीं चांदी का वर्क बनाने वालों पर एक्शन हुआ है, कहीं मिठाई की दुकानों पर छापेमारी करके यह पता लगाने का प्रयास किया गया कि कहां मिठाइयों पर असली चांदी का वर्क लगा है और कहां चांदी के वर्क के नाम पर एल्यूमिनियम फॉयल या फिर जानवरों की चर्बी लगाई गई है.
डीएनए विश्लेषण के बाद सक्रिय हुआ फूड सेफ्टी डिपार्टमेंट
स्वामी दयानंद सरस्वती का मानना था कि, जो मनुष्य अपने थोड़े से स्वार्थ के लिए अन्न, घी, दूध और औषधियों में मिलावट करके लोगों के स्वास्थ्य को बिगाड़ते हैं, वे साक्षात कसाई के समान हैं. नैतिक रूप से ऐसे ही कसाइयों की पहचान के लिए आज छापेमारी हुई है.
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डीएनए में विश्लेषण के बाद आज मेरठ में फूड सेफ्टी विभाग की टीम सक्रिय हुई. खाद्य विभाग की टीम ने उन जगहों पर छापेमारी की, जहां चांदी का वर्क बनाया जाता है. सबसे पहले खाद्य विभाग की टीम उस मेहंदी हसन के घर पर पहुंची, जिसके यहां मिला चांदी वर्क का सेम्पल फेल हो चुका है. वहां खुद मेहंदी हसन नहीं मिला.
जगह-जगह बनाया जा रहा चांदी वर्क
खाद्य विभाग की टीम वहां से सैंपल कलेक्ट करने के बाद एक गांव पहुंची, जहां एक बेसमेंट में दो मंजिल नीचे चांदी का वर्क बनाने का काम चल रहा था. वहां से भी खाद्य विभाग की टीम ने सैंपल कलेक्ट किए हैं. ये सबकुछ ज़ी न्यूज़ के कैमरे पर हुआ है.
आपसे आग्रह है कि चांदी के वर्क वाली मिठाई खरीदते समय आप खुद उसे हाथ पर रगड़कर उसका टेस्ट अवश्य करिएगा. महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन के कमिश्नर तुकाराम मुढे ने भी लोगों को यही सलाह दी है.