ट्रंप की हार से दुनिया के बाजार में दिवाली! 11.5 ट्रिलियन डॉलर का नुकसान हुआ रिकवर, भारत में भी पैसों की बारिश
अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में ट्रंप की हार के बाद दुनिया भर के शेयर बाजार में तेजी आई है. भारतीय बाजार में भी सेंसेक्स और निफ्टी उछले. विदेशी निवेशकों की वापसी से बाजार को मजबूती मिली, जबकि सोना-चांदी भी महंगे हुए.
मिडटर्म टेस्ट में ट्रंप की हार से एलन मस्क और उनकी कंपनी में पैसा लगाने वाले लोगों को नुकसान हो रहा है. लेकिन शेयर बाजार के निवेशकों को इससे फायदा हुआ है. ट्रंप की हार का जश्न केवल अमेरिका के लोगों ने नहीं बल्कि दुनिया भर के शेयर बाजार ने भी मनाया. कल भी और आज भी. भारत समेत दुनिया भर के शेयर बाजार में तेजी का विश्लेषण करने से पहले आपको एक नंबर जानना चाहिए.
ये नंबर देखिए. ये 15 डिजिट का डेटा है और इसमें 11 जीरो हैं. इतना बड़ा नुकसान दुनिया को ईरान युद्ध शुरू होने के बाद पहले एक महीने में हो गया था. हालांकि, युद्ध के शुरुआती झटकों के बाद अगस्त के महीने तक दुनिया का शेयर बाजार काफी हद तक उबर गया था और अब ट्रंप की हार के बाद ट्रिलियन डॉलर की रफ्तार से आगे भी बढ़ रहा है. आज आपको जानना चाहिए कि ट्रंप को चुनावी नुकसान से बाजार फायदे में क्यों है? ट्रंप की हार से कितने पैसे की रिकवरी हुई है? साथ ही भारत के शेयर बाजार ने आज क्या-क्या रिकॉर्ड बनाए?
ट्रंप की हार के बाद दुनिया भर के बाजार में तेजी
ट्रंप की हार के बाद अमेरिकी शेयर बाजार सबसे ज्यादा बढ़े. डाउ जोंस 3 से ज्यादा, S&P करीब 2 प्रतिशत और नैस्डेक डेढ़ प्रतिशत उछला. यूरोपीय बाजार की बात करें तो जर्मनी का डैक्स 2 प्रतिशत से ज्यादा, फ्रांस का बाजार 2 प्रतिशत और ब्रिटेन का भी लगभग 2 प्रतिशत उछला. चीन और हॉन्गकॉन्ग ने भी ऊंची छलांग लगाई. जापान इसका अपवाद रहा क्योंकि जापान को आशंका है कि डेमोक्रेटिक पार्टी के नेतृत्व वाली अमेरिकी संसद AI, डेटा सेंटर और टेक्नोलॉजी में सख्त नियम लागू कर सकती है. इस तेजी के कारण सिर्फ अमेरिकी बाजार की वैल्यू 1 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा बढ़ी है.
ईरान युद्ध से दुनिया के शेयर बाजार को हुआ 11.5 ट्रिलियन डॉलर का नुकसान
युद्ध की वजह से बाजार को कितना नुकसान हुआ था, यह भी जानना जरूरी है. 28 फरवरी को ईरान युद्ध की शुरुआत हुई थी. उसके बाद पहले एक महीने में ही शेयर बाजार के मार्केट कैप में साढ़े 11 ट्रिलियन डॉलर की कमी आई. यानी 1,085 लाख करोड़ रुपये का नुकसान लोगों को उठाना पड़ा. भारत की अर्थव्यवस्था करीब 4 ट्रिलियन डॉलर है. लेकिन युद्ध के असर से शुरुआती 1 महीने में दुनिया भर के शेयर बाजार को भारत की अर्थव्यवस्था का लगभग तीन गुना नुकसान झेलना पड़ा.
भारतीय शेयर बाजार में भी जबरदस्त तेजी, सेंसेक्स 80 हजार के करीब
छलांग लगाने के मामले में भारत का बाजार भी इस बार पीछे नहीं है और ये अमेरिका के नतीजों से कुछ दिन पहले से ही शुरू हो गया था. जो सेंसेक्स कुछ दिन पहले तक 70 हजार की तरफ बढ़ रहा था, वो अब 80 हजार के करीब पहुंच गया है.
आज सेंसेक्स 2,009 प्वाइंट की बढ़त के साथ 79,310 पर बंद हुआ. पिछले 7 महीनों में ये सबसे बड़ी छलांग है. वहीं निफ्टी 576 प्वाइंट की उछाल के साथ 24,537 पर पहुंच गया. 28 अक्टूबर को यही सेंसेक्स 73,246 पर बंद हुआ था और अब 79 हजार के पार है. यानी 6 कारोबारी सेशन में सेंसेक्स 6 हजार प्वाइंट से ज्यादा बढ़ गया. वहीं 28 अक्टूबर को निफ्टी 22,699 पर था. जबकि आज 24 हजार 500 के पार. इस तरह निफ्टी में 1,838 प्वाइंट का उछाल आया है.
आज की उछाल से निवेशकों की संपत्ति में करीब 8 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई है. जबकि पिछले 6 दिनों को जोड़ दें तो 27 लाख 52 हजार करोड़ रुपये का इजाफा हुआ है.
28 फरवरी को युद्ध शुरू होने से पहले सेंसेक्स 81,287 पर बंद हुआ था. उसके बाद बाजार लगातार गिरता रहा. 5 मार्च को सेंसेक्स 80,016 पर था. उसके बाद आज सेंसेक्स अपने सर्वोच्च स्तर पर पहुंचा है. यानी 8 महीने में ये सबसे ऊंचाई पर है.
इस तेजी के कारण भारतीय बाजार ने फिर से 5 ट्रिलियन डॉलर का मुकाम हासिल कर लिया है. मार्केट में लगातार 6 दिनों की तेजी के बाद BSE मार्केट कैप 5 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंचा है.
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से बाजार को राहत
बाजार में ये तेजी क्यों आई है, इसका सबसे बड़ा कारण है कच्चे तेल की कीमत में कमी. आज अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 95 डॉलर प्रति बैरल के नीचे चला गया. 2 दिन पहले कच्चे तेल का भाव 114 डॉलर के करीब था. यानी लगभग 20 डॉलर की गिरावट आई है. तेल के आयात पर निर्भर भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए ये बड़ी राहत है.
अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में ट्रंप की हार से बाजार के सेंटिमेंट में सुधार आया है. उम्मीद की जा रही है कि अब अमेरिकी संसद ट्रंप की टैरिफ, युद्ध और खर्च से जुड़ी नीतियों पर अंकुश लगाएगी.
इसके अलावा एक और बड़ा कारण है. वो है भारतीय बाजार में निवेशकों की फिर से वापसी. नवंबर के शुरुआती 4 कारोबारी दिनों में विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार में 32,211 करोड़ रुपये लगाए हैं. आज ही विदेशी निवेशकों ने 14,975 करोड़ रुपये की खरीदारी की जो पिछले 6 साल का रिकॉर्ड है. जबकि अक्टूबर में विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से करीब 45 हजार करोड़ रुपये निकाले थे.
विदेशी निवेशकों का लौटना, ऐसा फैक्टर है जिसकी वजह से भारतीय बाजार में दिवाली ट्रंप की हार से पहले ही शुरू हो गई थी. बाजार की इस तेजी के बाद बहुत से लोगों के मन में ये सवाल होगा कि क्या अब पैसा लगाने का वक्त फिर से आ गया है. इस सवाल का जवाब बहुत ही मुश्किल है क्योंकि सेंटिमेंट पर चलने वाले बाजार की भावना कब आहत हो जाए, कोई नहीं जानता.
वैसे भी ट्रंप एक बार फिर कब ईरान के खिलाफ तनाव बढ़ा दें, इसकी जानकारी किसी को नहीं है. ईरान युद्ध में दागी गई एक भी मिसाइल कच्चे तेल की कीमत में फिर आग लगा देगी और उसके बाद बाजार फिर लुढ़क जाएगा. ऐसे में दिवाली के मौके पर आपको अपना पैसा संभाल कर रखना चाहिए. ईरान युद्ध को लेकर किसी ठोस फैसले का इंतजार करना चाहिए.
धनतेरस से पहले सोना-चांदी की कीमतों में उछाल
तेजी सिर्फ शेयर बाजार में नहीं आ रही है. जो सोना-चांदी अमेरिका के मिडटर्म नतीजों से पहले तक नीचे गिर रहे थे, उनकी कीमत में धनतेरस से पहले उछाल आया है. जो लोग ये मानकर चल रहे थे कि इस बार धनतेरस पर सोने-चांदी सस्ते दाम पर मिलेंगे, उन्हें इस अचानक तेजी से झटका लगा है. पिछले 2 दिनों से सोना-चांदी की कीमत में बढ़ोतरी हो रही है.
इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के मुताबिक, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना आज 2,507 रुपये चढ़कर करीब 1 लाख 44 हजार रुपये के पार चला गया. वहीं एक किलो चांदी के दाम में 1,167 रुपये की बढ़ोतरी हुई है और अब चांदी 1 लाख 87 हजार 300 रुपये पर पहुंच गई है.
अब 2 दिन पहले के सोने-चांदी के भाव से इसकी तुलना कीजिए. 3 नवंबर को 10 ग्राम सोने का भाव 1 लाख 37 हजार 576 रुपये था. इस तरह 2 दिनों में सोना करीब साढ़े 6 हजार रुपये महंगा हो गया है. इसी तरह 2 दिन पहले 1 किलो चांदी का भाव 1 लाख 76 हजार 425 रुपये था. इस तरह चांदी केवल 2 दिनों में 11 हजार रुपये के करीब महंगी हो गई है.
यानी धनतेरस पर सस्ते सोने-चांदी की उम्मीद खत्म हो गई है. लोग सिर्फ इस बात से संतोष कर सकते हैं कि सोने-चांदी की रिकॉर्ड कीमत की तुलना में मौजूदा दाम अभी भी सस्ता है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोना महंगा हुआ है.
अमेरिकी चुनाव के बाद 24 घंटे में सोने की कीमत 6 फीसदी बढ़ी
अमेरिकी चुनाव के नतीजों के बाद 24 घंटे में सोने का दाम करीब 6% बढ़ गया है. ट्रंप की हार से पहले जो सोना 3,914 डॉलर प्रति औंस था, वो आज 4,136 डॉलर पर पहुंच गया. इसी का असर भारतीय बाजार पर भी हो रहा है. सोना-चांदी के दाम बढ़ने का सबसे बड़ा कारण है अमेरिकी चुनाव के बाद डॉलर का कमजोर होना. दुनिया भर में सोने का कारोबार आम तौर पर डॉलर में होता है. जब डॉलर कमजोर होता है तो दूसरी करेंसी में सोना खरीदने वालों के लिए ये सस्ता हो जाता है. इससे सोने की मांग बढ़ती है.
दूसरा कारण कच्चा तेल का सस्ता होना है. इससे महंगाई की चिंता घटी है. महंगाई कम होने पर सेंट्रल बैंक के लिए ऊंची ब्याज दर का दबाव कम होता है. ब्याज कम होने से सोने की मांग बढ़ जाती है. ये सोने में निवेश करने वालों के लिए तो अच्छी खबर है लेकिन जो लोग धनतेरस या शादियों के लिए सोना खरीद रहे हैं, उनके लिए बढ़ती कीमत जेब पर भारी पड़ेगी.