तबले की थाप...कीर्तन, 7 गांवों के लोगों को खाने का न्योता, नन्हे 'काशी' के जन्मदिन पर मनाया जश्न
कोरबा के साजापानी गांव में नन्हे हाथी का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया. ग्रामीणों ने चंदा इकट्ठा कर 7 गांवों के लोगों को आमंत्रितक भोज कराया. आइए इस कहानी को विस्तार से जानते हैं.
छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में एक इंसानियत और वन्यजीव प्रेमियों की अनोखी तस्वीर सामने आई है. यहां ग्रामीणों ने जंगल में जन्मे एक नन्हे हाथी का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया है. सबसे खास बात यह है कि इस दौरान तबले की थाप, कीर्तन और बधाइयों के बीच पूरा इलाका उत्सव में डूबा नजर आया. इस कार्यक्रम के लिए ग्रामीणों ने घर-घर जाकर चंदा जुटाया. साथ ही 7 गांवों के लोगों को आमंत्रित कर वन भोज का आयोजन किया. यह जश्न किसी इंसानी बच्चे के जन्मदिन का नहीं, बल्कि जंगल में आए एक नन्हें मेहमान के स्वागत में मनाया गया.
यह अनोखा नजारा कोरबा वनमंडल की करतला रेंज के साजापानी गांव का बताया जा रहा है. अक्सर गांवों के लोगों में जंगली जानवरों से डर का माहौल बना रहता है. हाथियों की आहट सुनते ही सायरन बजने लगते हैं और ग्रामीण अपनी सुरक्षा को लेकर सतर्क हो जाते हैं. लेकिन साजापानी में नजारा कुछ अलग देखने को मिलता है. यहां पर हाथियों की मौजूदगी के बीच डर की जगह खुशी और दहशत की जगह उत्सव का माहौल देखने को मिला.
7 गावों के लोग आमंत्रित
मिली जानकारी के मुताबिक, 20 अक्टूबर को साजापानी गांव के जंगल में एक मादा हाथी ने नन्हे हाथी को जन्म दिया था. इसके बाद ग्रामीणों ने इस नन्हे हाथी के स्वागत को यादगार बनाने के लिए लोगों ने हर घर जाकर चंदा जुटाया और सात गांवों के ग्रामीणों को आमंत्रित किया. इसके बाद वन भोज का कार्यक्रम रखा. इस कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया.
नन्हें हाथी का क्या नाम?
इस कार्यक्रम की सबसे खास बात यह रही कि जब नन्हे हाथी का नाम रखा गया. उस मौके पर वन विभाग के एसडीओ मणिकांत वर्मा ने ग्रामीणों की मांग पर उसका नाम काशी रखा. नाम की घोषणा होते ही वहां मौजूद लोगों ने तालियां बजाकर खुशी जाहिर की. साथ ही एक-दूसरे को बधाइयां भी दी. जंगल के इस नन्हे मेहमान को नाम मिलने के साथ ही ग्रामीणों के लिए यह आयोजन और भी खास बन गया.
हर तरफ हो रही चर्चाएं
जानकारी दी गई है कि कोरबा वनमंडल में इस समय अलग-अलग झुंडों में कुल 49 हाथियों के विचरण कर रहे हैं. इस इलाके में आए दिन हाथियों और इंसानों के बीच टकराव की खबरें भी सामने आती रहती हैं. ऐसे में साजापानी के लोगों की इस पहले एक संदेश जाता है, कि हाथियों के प्रति सिर्फ खतरा के रूप में देखने के बजाय उनके प्रति संवेदना का भाव दिखाया.
साजापानी के लोगों ने नन्हे हाथी 'काशी' के स्वागत के लिए जिस तरह से इकट्ठा होकर कार्यक्रम किया है. उसकी चारों तरफ चर्चाएं हो रही हैं. तबले की थाप, कीर्तन, चंदा इकट्ठा करना वहां के लोगों के लिए काफी यादगार बन गया है.
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(रिपोर्टः नीलम दास, कोरबा)