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70 साल पुराना हुनर...देशभर में भारी डिमांड, फिर भी छुईखदान के बुनकरों से दूर क्यों हो रही नई पीढ़ी?

छत्तीसगढ़ के खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के छुईखदान की बुनकर सोसाइटी में आज भी हाथों से कपड़ा बुना जाता है. इसकी डिमांड देश के कोने-कोने में है. लेकिन अब इस परंपरा को संजोय रखने के लिए बड़ी चुनौती भी है.

Written By Manish Kushawah
Published: Oct 24, 2026, 03:48 PM IST | Updated: Oct 24, 2026, 03:54 PM IST
Image Credit: ZEE NEWS
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आज के दौर में जहां बड़ी मशीनें मिनटों में कपड़ों से लेकर सब कुछ तैयार कर देती हैं. वहीं छत्तीसगढ़ के छुईखदान में आज भी लकड़ी के चरखे और हाथों की मदद से कपड़े बनाए जा रहे हैं. करीब 70 साल पुरानी चली आ रही परंपरा आज भी लोगों को हैरान करती है.

सबसे खास बात यह है कि बिना आधुनिक मशीनों के तैयार होने वाले इन कपड़ों की मांग देश के कई राज्यों में है. लेकिन इस हुनर को जिंदा रखने वाले हाथ अब उम्रदराज हो रहे हैं.  ऐसे में सवाल खड़े हो रहे हैं कि छुईखदान की यह अनमोल विरासत अगली पीढ़ी तक कैसे पहुंचेगी?

दरअसल, छत्तीसगढ़ के छुईखदान की बुनकर सोसाइटी में लकड़ी के चरखे की आवाज और धागों से कपड़ा तैयार करते बुनकरों की मेहनत आज भी इस परंपरा की गवाही देती है. यहां पर कपड़ा सिर्फ बुना नहीं जाता है, बल्कि हर धागे के साथ अनुभव, धैर्य और वर्षों का हुनर भी जुड़ता है.

इसकी दुनिया में पहचान

इनकी खासियत ऐसी है कि बिना आधुनिक मशीनों के बजाय हाथों से तैयार होने वाले इन कपड़ों ने छुईखदान को दुनिया में अलग पहचान दी है. यही वजह है कि यहां का बना कपड़ा जिले की सीमाओं को पार कर देश के कई राज्यों तक पहुंच रहा है. लेकिन इस हुनर की चमक के पीछे एक बड़ी चुनौती भी है.

इस पारंपरिक काम को आज भी मुख्य रूप से 50 साल से अधिक उम्र के बुनकर संभाल रहे हैं. इसकी वजह यह है कि नई पीढ़ी का इस पेशे से जुड़ाव कम होने के कारण इस कला के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ रही है. जिन हाथों ने दशकों तक धागों से कपड़े बुने, उनके बाद इस विरासत को आगे बढ़ाने वाले हाथ कहां से आएंगे?

उद्योग को बढ़ाने का प्रयास

हालांकि, प्रशासन की तरफ से इस पारंपरिक उद्योग को बढ़ावा देने के प्रयास किए जा रहे हैं. जरूरत है कि बुनकरों को बेहतर बाजार, उनके उत्पादों का उचित मूल्य और युवाओं को प्रशिक्षण के अवसर मिलें, ताकि यह पुराना हुनर रोजगार का नया रास्ता भी बन सके.

जिला सीईओ प्रेम कुमार पटेल का कहना है कि छुईखदान की बुनकर सोसायटी में पहले अच्छा काम होता था, लेकिन आज कम कमाई के कारण युवा इससे जुड़ने में कम रुचि दिखा रहे हैं. इसे देखते हुए जिला प्रशासन ने आधुनिक आउटलेट और मशीनों के लिए भवन उपलब्ध कराया है. साथ ही, युवाओं को फैशन डिजाइनिंग का प्रशिक्षण देकर बेहतर कपड़े बनाने और अधिक कमाई के अवसर देने का प्रयास किया जा रहा है.

भारत के कोने-कोने में मांग

आधुनिक मशीनों के इस दौर में छुईखदान के बुनकरों की मेहनत एक मिसाल है. यहां पर कपड़े के पीछे घंटों का परिश्रम और सात दशकों की परंपरा छिपी है. अब जरूरत है कि इस हुनर को सिर्फ पहचान दिलाने की नहीं, बल्कि इसे अगली पीढ़ी के हाथों में सौंपने की है. ताकि छुईखदान के हाथों से बुने कपड़ं की पहचान आने वाले सालों में भी देशभर में कायम रहे.

भागवत राम देवांगन नाम के बुनकर ने ZEE NEWS टीम को बताया कि 45 सालों से काम कर रहे हैं. यहां पर सभी प्रकार का कपड़ा बनता है. गमछा, सलती, लुंगी, चादर समेत कई तरह के कपड़े बनाए जाते हैं. यहां बनने वाला कपड़ा गर्मियों के दिन में बहुत ही सुखदायक माना जाता है. सबसे खास बात यह है कि यह कपड़ा भारत के कोने-कोने में जाता है.

(रिपोर्टः हेमंत कुमार पाल, खैरागढ़)
 

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About the Author

मनीष कुशवाह डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें टीवी और डिजिटल मीडिया में 5 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वे Zee News (MP-CG) की डिजिटल टीम में सब-एडिटर के रूप में काम कर रहे हैं. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की राजनीति, क्राइम, कृषि व्यवस्था और ग्रामीण (हाइपरलोकल) सरोकारों से जुड़ी खबरों की गहराई से कवरेज करना उनकी एक्सपर्टीज है.नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन (NIMC) से पत्रकारिता में डिप्लोमा पूरा करने के बाद मनीष ने मीडिया जगत में अपना सफर शुरू किया. ज़ी न्यूज़ से पहले उन्होंने News18 Hindi (Local18), इंडिया न्यूज़ और जनता टीवी जैसे प्रमुख समाचार चैनलों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स में काम किया है. इस दौरान उन्होंने न्यूज़ प्लानिंग, कंटेंट आइडिएशन और डेस्क मैनेजमेंट की अहम जिम्मेदारियां संभाली हैं. वे खबरों की प्रामाणिकता और ग्राउंड रियलिटी को प्राथमिकता देते हैं, ताकि पाठकों तक सटीक और भरोसेमंद जानकारी पहुंचे.मनीष कुशवाह से आप Manish2.Kumar@india.com पर ईमेल के माध्यम से संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा, एक्स (ट्विटर) और फेसबुक के जरिए भी उनसे सीधा संवाद कर सकते हैं.
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