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Indian Economy : भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और हाल ही में सामने आए वैश्विक आर्थिक दस्तावेजों से देश की अर्थव्यवस्था को लेकर बेहद उत्साहजनक और सकारात्मक खबर सामने आई है. वैश्विक स्तर पर जारी अनिश्चितताओं के बीच भी भारतीय अर्थव्यवस्था ने अपनी असाधारण मजबूती का लोहा मनवाया है.
भारत की अर्थव्यवस्था ने मजबूत प्रदर्शन करते हुए 2025-26 में 7.8% की दमदार ग्रोथ रेट दर्ज की है. RBI और वैश्विक मंचों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अर्थव्यवस्था की ग्रोथ रेट 7% रहने का अनुमान लगाया गया है. अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी IMF ने भी भारत के 2026-27 के ग्रोथ प्रोजेक्शन को 0.6% बढ़ाकर 7.0% कर दिया है.
देश के शेड्यूल्ड कमर्शियल बैंकों के ग्रॉस एनपीए (Gross NPAs) मार्च 2026 तक घटकर मात्र 1.8% रह गए हैं, ये पिछले कई दशकों में सबसे निचला स्तर है. केंद्रीय बैंक ने देश के मजबूत आर्थिक लचीलेपन (Economic Resilience), घटते सरकारी कर्ज और अत्यधिक मजबूत बैंकिंग परिस्थितियों की सराहना की है.
RBI ने बताया कि 2025-26 में भारत की अर्थव्यवस्था 7.8% की दर से बढ़ी और 2026-27 के लिए 7% की ग्रोथ का अनुमान जताया है. केंद्रीय बैंक ने अर्थव्यवस्था की मजबूती, सरकारी कर्ज में कमी और बैंकिंग की बेहतर स्थिति का जिक्र किया है. RBI के मुताबिक, मार्च 2026 में कमर्शियल बैंकों के सकल NPA यानी की ग्रॉस NPA घटकर 1.8% रह गए हैं. ये कई दशकों में इनका सबसे निचला स्तर है.
IMF की वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट (अक्टूबर 2026) के मुताबिक, वैश्विक अर्थव्यवस्था के 2026 में 3.1% और 2027 में 3.4% की गति से बढ़ने की संभावना है. इन वैश्विक आंकड़ों के बीच, उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में भारत की स्थिति सबसे मजबूत बनी हुई है, जहां 2026 के लिए इमर्जिंग मार्केट्स की कुल औसत ग्रोथ 3.7% आंकी गई है.

ये रिपोर्ट इस बात का प्रमाण है कि सही नीतिगत फैसलों, नियंत्रित महंगाई और मजबूत बैंकिंग व्यवस्था के बल पर भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया के बड़े देशों के मुकाबले तेजी से आगे बढ़ रही है.
आर्थिक मोर्चे पर भारत ने पिछले 12 वर्षों में बड़ी कामयाबी हासिल की है. विश्व बैंक के मुताबिक, भारत में अत्यधिक गरीबी यानी एक्सट्रीम पावर्टी की दर 2011 के 27.1% से घटकर 2023 में 2.6% रह गई है. 49.6 करोड़ लोग 'लोअर-मिडिल-इनकम' गरीबी रेखा से ऊपर आ गए हैं. लेकिन सबसे अमीर 10% लोगों की कमाई, सबसे गरीब 10% लोगों की तुलना में लगभग 13 गुना अधिक है. पावर्टी में भारी कमी के बावजूद देश में सबसे ज्यादा कमाने वाले और सबसे कम कमाने वाले लोगों के बीच का अंतर अभी भी काफी बड़ा है.