महंगे तेल से परेशान जनता के लिए राहत भरी खबर, 6 महीने के रिकॉर्ड लेवल से नीचे आया दाम
सऊदी अरब पर हमलों के बावजूद क्रूड ऑयल के दाम में आज गिरावट देखी जा रही है. दुनियाभर में मची हलचल के बीच तेल के दाम को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है, पिछले कुछ दिनों से लगातार उछाल मार रहा क्रूड अब अचानक नीचे आ गया है.
मिडिल ईस्ट में जंग और तनाव के चलते क्रूड ऑयल के दाम रिकॉर्ड लेवल पर चल रहे हैं. दुनियाभर में पिछले दिनों हलचल मचाने वाले क्रूड ऑयल के दाम को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है. पिछले कुछ दिन से रिकॉर्ड लेवल पर चल रहा क्रूड अचानक नीचे आ गया है. एक हफ्ते पहले बीते सोमवार को कच्चे तेल की कीमत में जोरदार उछाल के बाद अचानक गिरावट देखने को मिली है. पिछले हफ्ते चढ़कर क्रूड ऑयल का दाम छह महीने के सबसे ऊपरी लेवल पर पहुंच गया था, लेकिन इस हफ्ते इसमें नरमी देखने को मिल रही है.
ब्रेंट और WTI क्रूड में आई गिरावट
हफ्ते के पहले दिन सोमवार को अमेरिकी क्रूड फ्यूचर्स और ब्रेंट क्रूड दोनों के भाव नीचे आ गए. ब्रेंट क्रूड 1.35 डॉलर गिरकर 115 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया. इसके अलावा WTI क्रूड भी गिरावट के बाद 101 डॉलर प्रति बैरल पर कारेाबार करते देखा गया. सऊदी अरब पर हुए ड्रोन और मिसाइल अटैक के बाद ग्लोबल एनर्जी सप्लाई को लेकर चिंताएं लगातार बनी हुई थीं. इसके बावजूद निवेशकों की बिकवाली के चलते तेल के दाम नीचे आ गए. हालांकि, सऊदी अरब ने हमलों के बाद अपने एयरपोर्ट और ऑयल फैसिलिटीज के कामकाज को फिर से शुरू कर दिया है.
एक हफ्ते में 8 फीसदी बढ़ा रेट
क्रूड ऑयल के दाम में पिछले दिनों आई तेजी हूतियों के हमले के बाद देखी गई थी. एक हफ्ते के दौरान ही कच्चे तेल का दाम 8 फीसदी से ज्यादा बढ़ गया. क्रूड ऑयल के दाम में चल रही उठापटक भारत के लिए चिंताजनक है. दरअसल, भारत अपनी जरूरत का 85 से 90 फीसदी तेल इम्पोर्ट करता है. कच्चे तेल के दाम 1 डॉलर चढ़ने पर भी देश का आयात बिल 18,000 करोड़ बढ़ जाता है. अमेरिका और ईरान के बीच जारी जंग और लगातार बढ़ रहे तनाव के बीच धहरान स्थित अहम हेडक्वार्टर को खाली कराने का आदेश दिया गया है.
तेल टैंकरों की आवाजाही पर खतरा बना
इससे पहले लाल सागर के एंट्री प्वाइंट बाब अल-मंदेब के पास लड़ाई होने से तेल के समुद्री व्यापार और तेल टैंकरों की आवाजाही पर खतरा बना हुआ था. ग्लोबल मार्केट में तेल की सप्लाई मिडिल ईस्ट क्राइसिस के अलावा दूसरे कारणों से भी प्रभावित हो रही है. लीबिया में हमदा और ताहारा ऑयल सेक्टर से जाविया पोर्ट तक जाने वाली पाइपलाइन को बंद किये जाने के बाद लीबिया का क्रूड ऑयल प्रोडक्शन नीचे आ गया है. इसका असर भी ग्लोबल मार्केट में देखा जा रहा है.
इन सभी हालातों के बीच तीसरे सबसे बड़े तेल उत्पादक रूस से राहत मिलने की उम्मीद की जा रही है. रूस ने कहा कि अमेरिका की मध्यस्थता में यूक्रेन से बातचीत के लिए तैयार है. नवंबर की शुरुआत में होने वाली बातचीत से जियो-पॉलिटिकल टेंशन कम होने के आसार हैं.