सिवान में दुकान का शटर बाहर से बंद कर दुकानदार को पेट्रोल से जिंदा फूंका, सड़क जाम कर लोगों ने काटा बवाल
सिवान में एक जनरल स्टोर दुकानदार की मौत के बाद इलाके में भारी तनाव व्याप्त हो गया. मृतक के परिजनों ने दुकान में पेट्रोल डालकर जिंदा जलाकर हत्या करने का गंभीर आरोप लगाया है. घटना से आक्रोशित स्थानीय लोगों और परिजनों ने शव को सड़क पर रखकर सिवान-तरवारा मुख्य मार्ग को पूरी तरह से जाम कर दिया.
सिवान जिला में जनरल स्टोर दुकानदार की संदिग्ध परिस्थिति में मौत हो गई है. युवक के परिजनों ने दुकान में पेट्रोल डालकर हत्या किए जाने का आरोप लगाया गया है. आक्रोशित लोगों ने शव को सड़क पर रखकर जमकर बवाल काटा है. वहीं, मौके पर पहुंचे सदर एसडीओ और एसडीपीओ ने कार्रवाई का आश्वासन देकर जाम को हटवा दिया. मामले की गंभीरता को देखते हुए FSL की टीम मौके पर पहुंचकर घटना की जांच कर रही है. घटना जीबी नगर तरवारा थाना क्षेत्र के तरवारा बाजार की है. मृतक की पहचान नदीम हुसैन के रूप में हुई है.
बताया जा रहा है कि बुधवार की रात नदीम हुसैन की दुकान के अंदर ही पेट्रोल डालकर हत्या कर दी गई. वहीं, वारदात को अंजाम देने के बाद दुकान का शटर बाहर से बंद कर दिया गया, ताकि घटना की जानकारी तत्काल किसी को नहीं मिल सके. घटना के बाद आक्रोशित परिजनों और स्थानीय लोगों ने शव को तरवारा बाजार के मुख्य मार्ग पर रखकर सड़क जाम कर दिया.
इस दौरान सड़क पर वाहनों की लंबी कतार लग गई और आने-जाने वाले लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा. सड़क जाम और हंगामे की सूचना मिलने के बाद सदर एसडीपीओ प्रांजल कुमार और सदर एसडीएम आशुतोष कुमार गुप्ता घटनास्थल पर पहुंचे. दोनों अधिकारियों ने आक्रोशित परिजनों और स्थानीय लोगों से बातचीत की. इसके बाद कार्रवाई का आश्वासन देकर स्थिति को सामान्य कराया. फिलहाल, पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है.
22 साल पहले भी दो युवकों को जलाया गया था जिंदा
बता दें कि ठीक इसी तरह से आज से 22 साल पहले सिवान में जिंदा जलाने की वारदात हो चुकी है. बात साल 2004 की है, जब जिले में मोहम्मद शहाबुद्दीन का सिक्का चलता था और उनके नाम मात्र से लोग थर-थर कांपते थे. 16 अगस्त की उस सुबह सरैया बाजार के व्यापारी चंदा बाबू की दुकान पर शहाबुद्दीन के गुर्गे ढाई लाख रुपये रंगदारी मांगने पहुंचे थे. जब चंदा बाबू ने इतनी बड़ी रकम देने से इनकार किया, तो बात इतनी बढ़ गई कि अपराधियों ने उनके बेटों सतीश और गिरीश को अगवा कर सीधे प्रतापपुर गांव स्थित शहाबुद्दीन के दरबार में पेश कर दिया, जहां क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए दोनों भाइयों पर तेजाब उड़ेलकर उनकी जान ले ली गई और सबूत मिटाने के लिए शवों को बोरे में भरकर गायब कर दिया गया.
इस खौफनाक वारदात का चश्मदीद उनका तीसरा भाई राजीव किसी तरह जान बचाकर उत्तर प्रदेश के पडरौना भाग निकला था और स्थानीय सांसद के यहां शरण ली थी. हालांकि, अपनों को खोने के बाद न्याय की लंबी और अकेली लड़ाई लड़ने वाले राजीव की भी बाद में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. इसी ने कोर्ट में बयान दिया था, जिसके बाद शहाबुद्दीन को तेजाब कांड में दोषी ठहराया गया था.
रिपोर्ट: अमित सिंह
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