SOCIAL MEDIA

Newsletter

PARTNER SITES
Select language

अनंत सिंह... नाम ही काफी है! 'छोटे सरकार' की छवि और विवादों से गहरा नाता रहा है मोकामा के विधायक का

मोकामा विधायक अनंत सिंह का विवादों से गहरा नाता रहा है. वह अक्सर विवादों में रहते हैं, कभी वह अपने कारनामों की वजह से, तो कभी वह अपने बयानों की वजह से. कई मौके पर उन्होंने अपनी पार्टी जदयू को असहज कर दिया है.

Written By Shailendra
Published: Oct 24, 2026, 06:40 PM IST | Updated: Oct 24, 2026, 07:18 PM IST
Image Credit: मोकामा विधायक अनंत सिंह (Photo- वीडियो ग्रैब)
Join

अनंत सिंह को जनता दल यूनाइटेड से 6 साल के लिए निकाल दिया गया है. उनके साथ उनकी पत्नी नीलम देवी को भी पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है. पिछले कुछ दिनों से अनंत सिंह लगातार पार्टी विरोधी गतिविधियों को अंजाम दे रहे थे. बिहार विधान परिषद चुनाव में पटना स्नातक सीट से वे जन सुराज पार्टी के प्रत्याशी अनुज सिंह को जिताने के लिए हरसंभव कोशिश कर रहे थे और पार्टी को एक तरह से चैलेंज कर रहे थे. 'छोटे सरकार' की छवि ​से पहचाने जाने वाले अनंत सिंह ने एक तरह से आलाकमान को चुनौती दे रखी थी. पार्टी की ओर से उनको मनाने के लिए ललन सिंह को जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन वे नहीं मानें. एक दिन पहले तो अनंत सिंह ने ललन सिंह को पहचानने से भी इनकार कर दिया था. अगले दिन अनंत सिंह के खिलाफ जनता दल यूनाइटेड ने बड़ी कार्रवाई कर दी. अनंत सिंह का मोकामा की राजनीति में अपनी पहचान है. बाहुबल और आपराधिक छवि के लिए अनंत सिंह राजनीति में जाने जाते हैं.

अनंत सिंह उन राजनीतिक हस्तियों में से हैं, जिनकी पहचान केवल चुनाव लड़ने तक सीमित नहीं है. मोकामा और आसपास के इलाकों में उनका अपना प्रभाव है और समर्थकों का बड़ा नेटवर्क भी. राजनीति में अपराधीकरण के वे साक्षात उदाहरण कहे जा सकते हैं. हालांकि, इसमें वे अकेले शामिल नहीं हैं. और भी कई बाहुबली हैं, जो राजनीति की शोभा बढ़ा रहे हैं.

अनंत सिंह ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत 2005 में जनता दल यूनाइटेड से की थी. इसी साल वे विधानसभा के लिए दो बार निर्वाचित हुए थे. बता दें कि 2005 में बिहार में दो बार विधानसभा चुनाव हुए थे. एक बार त्रिशंकु विधानसभा आई थी, जिसके बाद राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया था और उसके बाद हुए चुनाव में जनता दल यूनाइटेड के नेता नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए को जीत हासिल हुई थी. 2010 में तीसरी बार मोकामा से जीते थे. 2015 में जनता दल यूनाइटेड से उनकी दूरी कायम हो गई और उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा था. फिर भी वे जीत गए थे. 2020 में भी वे राष्ट्रीय जनता दल से चुनाव जीत गए थे, लेकिन 2022 में उनकी सदस्यता चली गई थी और वहां हुए उपचुनाव में उनकी पत्नी नीलम देवी जीती थीं. 2024 में पटना हाई कोर्ट से अनंत सिंह बरी हो गए थे, जिसमें उन्हें सजा हुई थी. 2024 के जनवरी महीने में जब नीतीश कुमार फिर से एनडीए के साथ आए और विश्वास मत हासिल करने की नौबत आई तो नीलम देवी ने राजद के बदले नीतीश कुमार का साथ दिया था. 2025 के विधानसभा चुनाव में अनंत सिंह एक बार फिर जनता दल यूनाइटेड के टिकट पर चुनाव लड़े और जीत भी गए.

अनंत सिंह का आपराधिक इतिहास

राजनीति और अपराध की दुनिया से अनंत सिंह का बराबर का नाता रहा है. 2015 में एक अपहरण के मामले में उनकी गिरफ्तारी हुई थी और इसके बाद से ही वह चर्चा में आ गए थे. 2019 में उनके आवास पर छापेमारी हुई थी, जिसमें एके 47 और ग्रेनेड बरामद किए गए थे.

2025 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले जन सुराज से जुड़े 75 साल के दुलारचंद यादव हत्याकांड में अनंत सिंह का नाम आया था. एफआईआर में आरोप था कि झड़प के दौरान अनंत सिंह ने गोली चलाई और उनके साथ के लोगों ने गाड़ी से दुलारचंद यादव को कुचल दिया था. 1 नवंबर, 2025 को अनंत सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया था. 19 मार्च, 2026 को पटना हाई कोर्ट ने अनंत सिंह को इस मामले में जमानत दे दी थी.

अनंत सिंह की संपत्ति

2025 के विधानसभा चुनाव में दाखिल हलफनामे के आधार पर अनंत सिंह के पास कुल 39.73 करोड़ की संपत्ति है. इसमें नीलम देवी के नाम की संपत्ति भी शामिल है. उनकी अपनी संपत्ति 26.66 करोड़ रुपये बताई गई है. 2.48 करोड़ की उन पर देनदारियां हैं. उन पर दर्ज आपराधिक मामलों की संख्या 28 बताई गई है. हलफनामे में उन्होंने खुद को साक्षर बताया है.

बड़ा बयान: नीतीश कुमार के साथ रहते 9 मर्डर करवाए थे

बिहार विधान परिषद चुनाव के दौरान 16 अक्टूबर, 2026 को अनंत सिंह ने एक सनसनीखेज बयान दिया था. उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार का साथ देते हुए उन्होंने 9 लोगों का मर्डर करवाया था. हालांकि शाम होते होते वे अपने इस बयान से पलट गए थे और कहा कि उनकी बातों का गलत मतलब निकाला गया था. उनका मतलब था कि लालू प्रसाद के शासनकाल में उनके 9 करीबी मारे गए थे, क्योंकि उस समय वे नीतीश कुमार का साथ दे रहे थे. जनता दल यूनाइटेड ने उनके इस बयान से दूरी बना ली थी और नीतीश कुमार की राजनीति को हिंसा और अपराध से अलग बताया था. राष्ट्रीय जनता दल ने इस मुद्दे को हवा देने की जरूर कोशिश की थी.

अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच विवाद

पटना स्नातक सीट से नीरज कुमार को जनता दल यूनाइटेड ने प्रत्याशी बनाया तो अनंत सिंह को यह रास नहीं आया था. उन्होंने जन सुराज पार्टी के प्रत्याशी अनुज सिंह को समर्थन देना शुरू कर दिया था. इस दौरान अनंत सिंह के कुछ बयान भी वायरल हुए, जिनमें उन्होंने कहा था- 'यह रसगुल्ला वाला चुनाव नहीं है.' 'नीरज कुमार का किला टूट चुका है.' 'हम पुदीना सिंह हैं, सारा गैस निकाल देंगे.' 'न हमको मरने का गम है और न जीने की खुशी.'

यह भी पढ़ें: बिहार विधान परिषद चुनाव में मनमानी पड़ी भारी: JDU ने अनंत सिंह और उनकी पत्नी नीलम देवी को 6 साल के लिए पार्टी से निकाला

Add Zee News as a Preferred Source
TAGS:

About the Author

शैलेंद्र जी न्यूज के रीजनल चैनल, जी बिहार झारखंड की डिजिटल टीम में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम करते हैं. वह बिहार और झारखंड की सियासत और क्राइम समेत कई समसामयिक मुद्दों पर न्यूज लिखते हैं. वह कभी-कभी राष्ट्रीय मुद्दों पर भी लिखते हैं. उनको मीडिया के तीनों प्रारूप प्रिंट, टेलीविजन और डिजिटल में काम करने का अनुभव. जनसंदेश टाइम्स, स्वतंत्र चेतना, टीवी 100, साधना न्यूज, एफएम न्यूज आदि न्यूज चैनलों से होते हुए न्यूज नेशन, इंडिया अहेड, ईटीवी भारत और न्यूज स्ट्रीट मीडिया (NYOOOZ) में अहम जिम्मेदारी निभाई. मीडिया जगत में सफर पिछले 12 सालों से बिना रुके जारी है.
Read More

ZEENEWS TRENDING STORIES