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अनंत सिंह और नीलम देवी का निष्कासन: नेताओं को 6 साल के लिए ही क्यों निकाली हैं पार्टियां, क्या है गणित?

मोकामा विधायक अनंत सिंह और उनकी पत्नी नीलम सिंह को जदयू से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया. दोनों को जदयू ने 6 साल के लिए पार्टी से निकाल दिया. अब सवाल ये की आखिर पार्टियां नेताओं को 6 साल के लिए ही बाहर क्यों निकालती है. इस आर्टिकल में जानते हैं.

Written By Shailendra
Published: Oct 24, 2026, 10:05 PM IST | Updated: Oct 24, 2026, 10:14 PM IST
Image Credit: अनंत सिंह और नीलम देवी (File- Photo)
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जनता दल यूनाइटेड ने अनंत सिंह और उनकी पत्नी नीलम देवी को शनिवार को 6 साल के लिए पार्टी से निकाल दिया है. आम तौर पर राजनीतिक दल जब अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधियों को आधार बनाकर कार्रवाई करते हैं, तो 6 साल के लिए ही पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाते हैं. अब सवाल यह है कि नेताओं को 6 साल के लिए ही क्यों पार्टी से निकाला जाता है? क्या इसके पीछे कोई कानूनी आधार है या फिर राजनीतिक दल अपनी सुविधा के अनुसार यह अवधि तय करते हैं.

6 साल की अवधि क्यों तय करते हैं राजनीतिक दल?

राजनीतिक दलों के लिए नेताओं को 6 साल के लिए निकालना कोई कानूनी बाध्यता नहीं है. दरअसल, 6 साल की अवधि राजनीतिक दल इसलिए तय करते हैं, ताकि वर्तमान 5 साल का कार्यकाल बीत जाए और अगले कार्यकाल के लिए भी संबंधित पार्टी नेता चुनावी राजनीति से दूर रहे. विधानसभा और लोकसभा का कार्यकाल चूंकि 5 साल के लिए होता है और 6 साल का निष्कासन झेलने का मतलब होता है कि अगले 5 साल के चक्र भी प्रभावित हो जाए. शायद इसलिए इसे लंबी अनुशासनात्मक कार्रवाई कह सकते हैं.

पार्टी संगठन, चुनाव चिह्न और आधिकारिक कार्यक्रमों से दूर हो सकता है नेता

6 साल के लंबे निष्कासन के चलते संबंधित नेता पार्टी संगठन, चुनाव चिह्न और आधिकारिक कार्यक्रमों से दूर हो सकता है. इससे वह खुद राजनीतिक रूप से वीरान हो जाएगा या फिर दूसरे दलों के आगोश में चला जाएगा. यह नेता के जनाधार और परिस्थितियों के आधार पर तय होगा. 6 साल के निष्कासन का मतलब यह नहीं है कि बीच में उसे पार्टी में वापस नहीं लिया जाएगा. राजनीतिक दल और संबंधित नेता के बीच की अंडरस्टैंडिंग तय करेगी कि दोनों के बीच दूरी बनी रहे या खत्म हो जाए.

यह भी जरूरी नहीं है कि 6 साल बाद वह नेता अपनी पार्टी लौट ही आए. इसको लेकर भी कोई तय नियम नहीं है.

यह भी पढ़ें: अनंत सिंह... नाम ही काफी है! 'छोटे सरकार' की छवि और विवादों से गहरा नाता रहा है मोकामा के विधायक का

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शैलेंद्र जी न्यूज के रीजनल चैनल, जी बिहार झारखंड की डिजिटल टीम में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम करते हैं. वह बिहार और झारखंड की सियासत और क्राइम समेत कई समसामयिक मुद्दों पर न्यूज लिखते हैं. वह कभी-कभी राष्ट्रीय मुद्दों पर भी लिखते हैं. उनको मीडिया के तीनों प्रारूप प्रिंट, टेलीविजन और डिजिटल में काम करने का अनुभव. जनसंदेश टाइम्स, स्वतंत्र चेतना, टीवी 100, साधना न्यूज, एफएम न्यूज आदि न्यूज चैनलों से होते हुए न्यूज नेशन, इंडिया अहेड, ईटीवी भारत और न्यूज स्ट्रीट मीडिया (NYOOOZ) में अहम जिम्मेदारी निभाई. मीडिया जगत में सफर पिछले 12 सालों से बिना रुके जारी है.
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